गरीबी उन्मूलन के लिए जरूरी है सामाजिक क्रांति : अभिजीत बनर्जी
नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। देश में गरीबी उन्मूलन के लिए एक सामाजिक क्रांति की आवश्यकता है। इसके लिए 'गरीबी हटाओ' का नारा एक बार फिर बुलंद करने की जरूरत है। यह कहना है 'मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी' (एमआईटी) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अभिजीत विनायक बनर्जी का।
नई दिल्ली, 21 मई (आईएएनएस)। देश में गरीबी उन्मूलन के लिए एक सामाजिक क्रांति की आवश्यकता है। इसके लिए 'गरीबी हटाओ' का नारा एक बार फिर बुलंद करने की जरूरत है। यह कहना है 'मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी' (एमआईटी) में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अभिजीत विनायक बनर्जी का।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और 'एस्पेन इंस्टीट्यूट इंडिया' द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने अमेरिका से यहां आए बनर्जी ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए कहा कि गरीबी से प्रभावी ढंग से लड़ने के लिए सरकार को उचित कदम उठाने की आवश्यकता है। बनर्जी ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सामाजिक अभियान के जरिए बड़े बदलाव करने की वकालत की।
बनर्जी ने कहा, "देश के अधिकतर गांवों में ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही प्राथमिक विद्यालयों के अभाव के कारण बच्चों को शिक्षा से दूर रहना पड़ रहा है।" गौरतलब है कि बनर्जी भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को लेकर लगातार अध्ययन कर रहे हैं। खासकर गरीबी उन्मूलन को लेकर उन्होंने कई शोध कार्य किए हैं।
बनर्जी का मानना है कि हिंदी भाषी राज्यों में आज भी 'सर्व शिक्षा अभियान' के तहत उठाए जा रहे कदमों को सफलता नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के कई गांवों में लोग 'ग्राम शिक्षा समिति' (वीईसी) से अनजान है। बनर्जी ने कहा, "जब मैंने कुछ ग्रामीणों से इस संबंध में बातचीत की तो पता चला कि इन्हें इस योजना के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है।"
देश में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए बनर्जी का सुझाव है कि इसके लिए भारतीय रेलवे से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, "रेलवे के तर्ज पर विकास कार्यक्रमों को क्रियान्वित करना होगा।" उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य को जन-जन तक पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर कार्य करने की आवश्यकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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