भजनलाल के लिए आसान नहीं है इस बार चुनावी समर
आदमपुर(हरियाणा), 19 मई (आईएएनएस)। आगामी 22 मई को होने वाले उपचुनावों के दौरान भजनलाल अपने आज तक के राजनीतिक जीवन की सबसे चुनौतीपूर्ण जंग लड़ेंगे। पिछले कुछ माह से खराब सेहत से जूझ रहे भजनलाल के लिए यह उपचुनाव अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए बेहद जरूरी हैं। राज्य में ती विधानसभा सीटों आदमपुर, गोहाना और इंद्री पर उपचुनाव कराए जा रहे हैं।
आदमपुर(हरियाणा), 19 मई (आईएएनएस)। आगामी 22 मई को होने वाले उपचुनावों के दौरान भजनलाल अपने आज तक के राजनीतिक जीवन की सबसे चुनौतीपूर्ण जंग लड़ेंगे। पिछले कुछ माह से खराब सेहत से जूझ रहे भजनलाल के लिए यह उपचुनाव अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए बेहद जरूरी हैं। राज्य में ती विधानसभा सीटों आदमपुर, गोहाना और इंद्री पर उपचुनाव कराए जा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि हरियाणा की जाट बहुल राजनीति में भजनलाल एक गैर-जाट नेता के तौर पर छाए रहे हैं। फरवरी 2005 में वह अपने निर्वाचन क्षेत्र आदमपुर से रिकॉर्ड 71,000 वोटों से नौवीं बार जीते थे, लेकिन इस बार हालात कुछ भिन्न दिखाई पड़ रहे हैं।
पिछले चुनाव में भारी भरकम जीत के बावजूद कांग्रेस ने उनके स्थान पर भूपिंदर सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना था। कांग्रेस आलाकमान की अपने प्रति इसी उदासीनता को देखते हुए उन्होंने पार्टी से बगावत कर 'हरियाणा जनहित कांग्रेस' का गठन कर लिया था । उन्हें उनके इस कदम के लिए दलबदल विरोधी कानून के तहत विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य ठहरा दिया गया था।
इस बार उनका मुकाबला हरियाणा के एक अन्य राजनीतिक दिग्गज स्वर्गीय देवी लाल के सुपुत्र और कांग्रेसी नेता रंजीतसिंह और इंडियन नेशनल लोकदल के प्रत्याशी तथा पूर्व वित्त मंत्री सम्पत सिंह से है।
यही कारण है कि इस बार भजनलाल के सुपुत्र और नवगठित हरियाणा जनहित कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई उनके लिए वोट मांग रहे हैं।
दूसरी ओर, भजनलाल के बड़े बेटे और राज्य की कांग्रेस सरकार में उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन चुनाव प्रचार से दूर हैं। उनकी हालत संभवत: पार्टी (कांग्रेस) और परिवार के बीच में पिसने जैसी हो रही है।
उधर मुख्यमंत्री हुड्डा के लिए रंजीत सिंह की जीत दोहरा लाभ पहुंचा सकती है। पहला, भजनलाल के हारने की सूरत में हरियाणा कांग्रेस में हुड्डा का दबदबा सदा के लिए कायम हो जाएगा। दूसरा, भजनलाल के हारने पर अपने पहले ही चुनावी समर में हरियाणा जनहित कांग्रेस के लिए यह एक अशुभ शुरुआत होगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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