केरल की इस महिला टीचर को सलाम, नदी और पहाड़ों को पार कर पढ़ाने पहुंचती है स्कूल
नई दिल्ली। आपने अपने आसपास कई ऐसे टीचर देखे होंगे जिनके लिए बच्चों को पढ़ाना ही सबकुछ होता है और वो इस कार्य के प्रति इतना समर्पित होते हैं कि हर कोई उन्हें सम्मान की नजर से देखता है और उनका आदर करता है। इसी प्रकार, केरल में एक महिला टीचर हैं जो बच्चों को पढ़ाने के लिए नाव के सहारे नदी पार कर और फिर दुर्गम पहाड़ी इलाकों को पार करते हुए स्कूल पहुंचती हैं और वहां बच्चों को पढ़ाती हैं।
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उषा कुमारी, सुबह 7:30 बजे स्कूटी से तिरूवनंतपुरम स्थित अपने घर से निकलती हैं। इसके बाद वो नाव के सहारे एक दुर्गम पहाड़ी इलाके के किनारे पहुंचती हैं, जहां से उन्हें एक लंबा रास्ता तय करना होता है। यह पहले दो किलोमीटर तक तो ठीक है लेकिन उसके बाद, और दो किलोमीटर की चढ़ाई है। वो छड़ी के सहारे उस पहाड़ी इलाके को पार करती हैं, उस वक्त उनके साथ कुछ बच्चे भी होते हैं जिन्हें वो पढ़ाती हैं।
उषा कुमारी अगस्त्य ईगा विद्यालय में अकेली अध्यापिका हैं। वो 16 सालों से यही कार्य रोज करती हैं। इसके पहले, कोट्टूर के इस स्कूल में इकलौता अध्यापक ही था। सरकार ने पिछड़े जनजातीय इलाकों में स्कूलों की शुरूआत 1999 में की थी। उषा बताती हैं कि वो शाम को 8 बजे अपने घर पहुंचती हैं। अगर उनकी तबीयत ठीक नहीं होती है या फिर, बारिश होने लगती है तब वो किसी छात्र के घर ठहर जाती हैं ताकि वो अगले दिन स्कूल आ सकें। इस स्कूल में कक्षा 1 से 4 तक की पढ़ाई होती है और सारे विषय को वे अकेले पढ़ाती हैं।
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