Success Story: पति की शहादत के बाद खुद टीचर बन वीरांगना ने बेटी को डॉक्टर व बेटे को फौजी बनाया
Success Story in Hindi: ये हैं सिंपल कंवर। इनके संघर्ष और हौसलों की कहानी हर किसी को प्रेरित करने वाली है। सिंपल कंवर वीरांगना हैं। पति की शहादत के बाद न केवल खुद बल्कि बेटा-बेटी को काबिल बना दिया।
सिंपल कंवर राजस्थान के झुंझुनूं जिले में खेतड़ी उपखंड के गांव बीलवा की रहने वाली हैं। इनके पति बनवारीलाल की वीरांगना है। इनके पति जम्मू कश्मीर शहीद हो गए थे। पति की मौत के बाद सिंपल कंवर ने बेटा व बेटी के साथ-साथ खुद ने पढ़ाई की।

सिंपल कंवर के हौसला का नतीजा यह रहा है कि न केवल वह खुद टीचर बन गई बल्कि बेटी को डॉक्टर और बेटे को भारतीय वायुसेना में अफसर बना दिया। पूरे गांव में इनकी सक्सेस स्टोरी की चर्चा हो रही है।
बता दें कि गांव बीलवा निवासी बनवारी लाल भारतीय सेना में नायक पद पर 28 जून 1996 को 25 राजपूत राइफल्स भर्ती हुए थे। वे जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में 8 फरवरी 2010 को बर्फबारी होने की वजह से हुए हादसे में 17 जवानों के साथ शहीद हो गए थे। तब उनकी पत्नी सिंपल ने खुद को संभाला और बच्चों की जिम्मेदारी भी उठाई।
बनवारी लाल शहीद हुए थे तब बेटे निखिल की उम्र 7 साल और बेटी सुधा 10 साल की थी। दोनों भाई बहन पांचवीं और दूसरी कक्षा में पढ़ रहे थे। खुद सिंपल कंवर उस समय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। इसलिए अनुकंपा नौकरी की बजाय अपनी पढ़ाई जारी रखी। साल 2014 में RPSC की लेक्चरर भर्ती परीक्षा में सफलता पाई और व्याख्याता बन गईं। साथ ही बच्चों को पढ़ाया।
वीरांगना सिंपल कंवर के हौसलों के दम पर ही आज बेटी सुधा डॉक्टर है। वर्तमान में वह उदयपुर से पीजी कर रही हैं। बेटा निखिल भारतीय वायुसेना में नौकरी कर रहा है। बकौल, वीरांगना सिंपल कंवर, पति की शहीद होने का समाचार आया। सिंपल कंवर ने बेटे को देश सेवा के लिए भेजा।
दैनिक भास्कर में छपी एक खबर के अनुसार बनवारी लाल ने साल 1999 में हुई करगिल जंग में भी हिस्सा लिया था। वीरांगना बताती हैं कि करगिल जंग पूरी होने के बाद बनवारी अवकाश लेकर घर आए थे तो जंग में दिखाए अदम्य साहस की चर्चा किया करते थे। वो कहा करते थे जवान तो देश के सेवक होते हैं। कभी भी दुश्मन की गोली आर-पास हो सकती है।












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