सादगी की मिसाल: आईएएस पति-पत्नी ने आंगनबाड़ी केंद्र में कराया बच्चे का दाखिला
शॉर्ट हेडलाइन
देहरादून। उत्तराखंड के चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया और आईएएस अफसर नितिन भदौरिया ने सादगी की ऐसी मिसाल पेश की है, जिससे हर किसी को सीख लेनी चाहिए। आईएएस पति-पत्नी ने अपने दो साल के बेटे अभ्युदय का दाखिला किसी महंगे प्ले-वे स्कूल में नहीं बल्कि आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है।

दूसरों को प्रेरण के मकसद से आंगनबाड़ी में कराया बच्चे का दाखिला
बीते मंगलवार को जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया और आईएएस अफसर नितिन भदौरिया ने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे को दाखिला कराया। पति-पत्नी ने अपने बच्चे का दाखिला कराने को लेकर कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र सरकार बड़ी अच्छी योजना है। लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। स्वाति भदौरिया ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चे का दाखिला आंगनबाड़ी में इसलिए कराया है, ताकि उनके कदम से लोग प्रेरणा ले सकें।

शादी के बाद स्वाति ने बदल लिया कैडर
उत्तराखंड के चमोली में जिलाधिकारी के तौर पर तैनात स्वाति मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। उत्तर प्रदेश के ही रहने वाले आईएएस नितिन भदौरिया से 9 फरवरी 2014 को हुई थी। शादी के बाद आईएएस पति-पत्नी कैडर बदल लिया और स्वाति उत्तराखंड आ गईं। स्वाति के पति नितिन भदौरिया उत्तराखंड कैडर से ही हैं। दोनों पति-पत्नी देहरादून सचिवालय में भी रह चुके हैं।

क्या है केंद्र सरकार की आंगनबाड़ी योजना
केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी की शुरुआत 1985 में की थी। बाद में इस योजना में राज्य सरकारें भी सहयोग करने लगीं, लेकिन इसका ज्यादातर खर्च केंद्र सरकार ही उठाती है। आंगनबाड़ी में 6 वर्ष की उम्र के बच्चों को बुनियादी शिक्षा, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण आदि सुविधाएं दी जाती हैं।












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