Gurugram Puja Hopping: माता रानी के दर्शन के लिए ये पंडाल हैं बेस्ट! किस दिन खुलेगा मां का पट?
Gurugram Puja Hopping: गुरुग्राम में दुर्गा पूजा के पंडालों की धूम देखने लायक है। नवरात्रि शुरू होते ही यहां के अलग-अलग इलाकों में भव्य पंडाल सजाए गए हैं, जहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। हर पंडाल को खास थीम और सुंदर सजावट से तैयार किया गया है। कहीं पारंपरिक बंगाली शैली का पंडाल लोगों को आकर्षित कर रहा है तो कहीं आधुनिक लाइटिंग और सजावट ने माहौल को खास बना दिया है।
गुरुग्राम में इस बार कई पंडालों की थीम चर्चा में है। भक्त यहां सिर्फ पूजा करने ही नहीं बल्कि फोटोग्राफी और घूमने के लिए भी आते हैं। दुर्गा पूजा के अवसर पर सुरक्षा और सुविधा का भी खास ध्यान रखा गया है। प्रशासन ने यातायात व्यवस्था और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं।

गुरुग्राम के पंडालों में इस बार न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि दिल्ली-NCR से भी बड़ी संख्या में भक्त आ रहे हैं। आइए आपको बताते हैं गुरूग्राम के कुछ खास पंडालों के बारे में जिन्हें आप इस दुर्गा पूजा में मिस नहीं कर सकते!
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गुरुग्राम के 6 प्रमुख दुर्गा पूजा पंडाल
📍 पीबीसी दुर्गा पूजा (PBC Durga Puja) - वटिका इंडिया नेक्स्ट, सेक्टर 82
📍 पूर्वापल्ली दुर्गोत्सव (Purbapalli Durgotsav) - सेक्टर 15, पार्ट 2
📍 बंगिया परिसद (Bangiya Parisad) - सेक्टर 56
📍 शाश्राब्दी दुर्गा पूजा समिति (Shashrabdi Durga Puja Samiti) - कम्युनिटी सेंटर, सेक्टर 46
📍 उत्सव सोशियो कल्चरल ट्रस्ट (Utsav Socio Cultural Trust) - कम्युनिटी सेंटर, सेक्टर 45
📍 दुर्गा पूजा (Durga Puja) - सेक्टर 4
इस साल गुरुग्राम के इन 6 पंडालों में जा कर मां के दर्शन जरुर करें। ये आपके लिए एक बेहतरीन एक्सपीरियंस होने वाला है!
किस दिन खुलता है माता रानी का पट?
- पारंपरिक रूप से दुर्गा पूजा में पंडाल का 'पट खुलना' (माता रानी का मुंह खुलना) सप्तमी के दिन होता है, यानी नवरात्रि का सातवां दिन।
- पहले दिन से ही पूजा आरंभ होती है, लेकिन माता का मुख दर्शन और पट खुलना सप्तमी को ही होता है।
- इसे "माता का मुंह खुलना" भी कहा जाता है, और इसी दिन भक्त माता के साक्षात दर्शन के लिए पंडाल आते हैं।
- इसके बाद अष्टमी और नवमी को विशेष आरती, भजन‑कीर्तन और पूजा होती है।
किस दिन होती है मां के किस स्वरुप की पूजा?
- प्रथम दिन - शैलपुत्री (Shailaputri)
- द्वितीय दिन - ब्रह्मचारिणी (Brahmacharini)
- तृतीय दिन - चंद्रघंटा (Chandraghanta)
- चतुर्थ दिन - कूष्मांडा (Kushmanda)
- पंचम दिन - स्कंदमाता (Skandamata)
- षष्ठ दिन - कात्यायनी (Katyayani)
- सप्तम दिन - कालरात्रि (Kalaratri)
- अष्टम दिन - महागौरी (Mahagauri)
- नवम दिन - सिद्धिदात्री (Siddhidatri)
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