अखबार के दफ्तर में संता

वहां जाकर उसने कहा- मैं अपने दोस्त की मौत पर एक शोक संदेश छपवाना चाहता हूं। क्या रेट है?
जवाब मिला- चालीस रुपए प्रति इंच।
संता ने कहा- बाप रे! यह तो मुझे बहुत महंगा पड़ेगा। मेरा दोस्त तो 6 फुट लंबा था।
ऑफिस की चटपटी नोकझोंक
संता ने फोन पर नंबर डायल किया। दूसरी तरफ से एक लड़की ने फोन रिसीव किया।
संता (लड़की से)- हैलो आप कौन बोल रही हैं?
लड़की (संता से)- जी, मैं सीता बोल रही हूं।
संता (लड़की से)- अरे मैंने तो दिल्ली का नंबर मिलाया था, यह तो अयोध्या मिल गया।
आत्महत्या पर कोई किताब...
संता (बंता से)- भाई पार्टी किस खुशी में दे रहे हो?
बंता (संता से)- मेरी बाइक खो गई है इसलिए।
संता (बंता से)- लेकिन यह तो दुख की बात है?
बंता (संता से)- हां, लेकिन खुशी की बात यह है कि मैं उस पर बैठा नहीं था, वरना आज मैं भी खो जाता।












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