सैंडी कोहेनः गरीबी के खिलाफ जंग
करीब से देखी गरीबी
अपनी यात्रा में उन्होंने गरीबी को बहुत करीब से देखा, इतने करीब से देखा कि उन्हें एक अजीब सी अनुभूति हुई। सैंडी को पता लग चुका था कि जरूरी नहीं है कि जो आदमी गरीब है, वह खुश न हो। उसके बाद सैंडी बार-बार भारत आती रहीं और हर बार भारत को अपनाती गईं और एक मुकाम उनकी जिंदगी में आया जब वे भारत के बिना अपने अस्तित्व के बारे में सोच भी नहीं सकती थीं।
वो खौफनाक हकीकत
1993 में सैंडी ने राजस्थान की एक सड़क पर एक नजारा देखा जिसके बाद वह दहल गईं। राजस्थान के किसी गांव में उन्होंने करीब पंद्रह साल की एक लड़की देखी, जिसकी गोद में एक बच्चा था, एक बच्चा उस लड़की की उंगली पकड़कर चल रहा था। लोगों से पूछने के बाद जब सैंडी को पता लगा कि दोनों बच्चों की मां और कोई नहीं वही लड़की है, तो उनके पांव की जमीन खिसक गई। वे सन्न रह गईं। आगे जानकारी लेने की कोशिश की तो पता लगा कि वह लड़की एकदम निरक्षर है और उसके पास मेहनत के अलावा रोटी कमाने का और कोई ज़रिया नहीं है। उनको विश्वास ही नहीं हुआ कि गरीबी की सच्चाई इतनी खौफनाक हो सकती है।
अंतरात्मा की पहरेदार
दो बच्चों की मां, वह किशोरी सैंडी की अंतरात्मा की पहरेदार बन गयी और जब भी उनको भारत की याद आती, वह बच्ची ज़रुर याद आती। उनके दिमाग में हमेशा यह बात घूमती रहती कि गरीबी के इस भयानक रूप को कैसे पराजित किया जा सकता है। सोच-विचार के बाद उनकी समझ में महिला सशक्तीकरण को बुनियादी बातें आने लगीं। जब उनकी मां के निधन के बाद उन्हें पंद्रह हजार पांच सौ डॉलर विरासत में मिले तो उन्होंने तय किया कि उस पैसे को वे भारत में इस्तेमाल करेंगी।
मुहब्बतनामा से मिशन तक
यहीं से शुरुआत होती है सैंडी कोहेन के भारत के मुहब्बतनामे को एक मिशन में बदलने की कहानी। उन्होंने गरीबी रेखा के बहुत नीचे वाले परिवारों को समृद्घ बनाने की एक योजना पर काम शुरू कर दिया। इस योजना को कार्य रूप देने के लिए अक्टूबर 2003 में सैंडी कोहेन ने अपना पहला केंद्र दिल्ली से लगे साहिबाबाद के शहीद नगर मुहल्ले में शुरू किया। उसके बाद अमरोहा और हैवतपुर में भी सेंटर शुरू किए गए। जो सफलता पूर्वक चल रहे हैं।
गरीबी हटाने और बच्चियों को आत्म-निर्भर बनाने की अपनी इस मुहिम में सैंडी को पता है कि भोजन, रहने का ठिकाना, स्वास्थ्य और शिक्षा के सहारे ही वे सफल हो पाएंगी। सैंडी कोहेन की योजना है कि देश के अन्य भागों में भी वे अपने सेंटर खोलेंगी और गरीबी के खिलाफ जारी जंग में अपना योगदान करेंगी। [सैंडी से विशेष साक्षात्कार पढने के लिए यहां क्लिक करें]
[शेष नारायण सिंह वरिष्ठ राजनीतिक पत्रकार हैं।]
-
Ishan Kishan ने आंसुओं को दबाकर फहराया तिरंगा, घर से आई दो मौतों की खबर फिर भी नहीं हारी हिम्मत, जज्बे को सलाम -
संजू सैमसन पर हुई नोटों की बारिश! प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनने पर मिली इतनी प्राइज मनी? -
जश्न या अश्लीलता? हार्दिक पांड्या की इस हरकत पर फूटा फैंस का गुस्सा, सोशल मीडिया पर लगा 'छपरी' का टैग -
T20 World Cup फाइनल से पहले न्यूजीलैंड के खिलाड़ी ने लिया संन्यास, क्रिकेट जगत में मची खलबली, फैंस हैरान -
IND vs NZ Final: फाइनल से पहले सन्नाटे में क्रिकेट फैंस! आज अपना आखिरी मैच खेलेंगे कप्तान सूर्यकुमार यादव? -
T20 World Cup 2026: धोनी के 'कोच साहब' कहने पर गंभीर ने दिया ऐसा जवाब, लोग रह गए हैरान, जानें क्या कहा? -
कौन थीं Ishan Kishan की बहन वैष्णवी सिंह? खुद के दम पर बनाई थी अपनी पहचान, करती थी ये काम -
IAS IPS Love Story: 'ट्रेनिंग के दौरान कर बैठे इश्क',कौन हैं ये IAS जिसने देश सेवा के लिए छोड़ी 30 लाख की Job? -
Mojtaba Khamenei Wife: ईरानी नए नेता की बीवी कौन? 10वीं के बाद बनीं दुल्हन-निकाह में दी ये चीजें, कितने बच्चे? -
'आपके पापा से शादी करूं, चाहे कितने भी मर्दों के साथ', मुसलमानों पर कमेंट करते ही एक्ट्रेस का कर दिया ऐसा हाल -
Trump Netanyahu Clash: Iran से जंग के बीच आपस में भिड़े ट्रंप-नेतन्याहू! Khamenei की मौत के बाद पड़ी फूट? -
T20 World Cup जीतने के बाद अब सूर्यकुमार यादव लेंगे संन्यास? प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया फ्यूचर प्लान













Click it and Unblock the Notifications