नई दुनिया, नई उडान, आओ बनाए अलग पहचान

एक बस स्टाप पर लिखा था, इसमे कोई शक नही कि जमाना बदल रहा है. चारो तरफ बस बदलाव ही बदलाव है. कोई भी क्षेत्र ले लो हर जगह यही हाल है. समय की माँग़ को देखते हुए आजकल पढ़ाई पर भी बहुत जोर दिया जाने लगा है. बहुत अच्छा लगता है यह सब देख कर. पर दुख तब होता है जब इतनी पढ़ाई के बाद भी ढंग की नौकरी नही मिलती. खास कर लड़कियों और महिलाओं के लिए तो और भी ज्यादा सोचने की बात हो जाती है.

ऐसे मे ना सिर्फ उन्हे घर बैठना पड़ जाता है, बलिक वो खुद को भी बेकार महसूस करने लगती हैं, कि हमारा पढ़ा लिखा होना सब बेकार. किसी काम ना आया. यही बात लागू होती है उन लोगों पर जो नौकरी से रिटायर होकर खाली बैठ जाते है. अब सोचने की बात है कि इतना अनुभव किस काम आएगा. ना तो कोई उनकी बाते सुनने को तैयार ना कोई पास बैठने को. तो फिर वो क्या करें.

क्लिक करें- नौकरी से रिटायरमेंट अब नहीं रहा फुल स्टॉप

बात सिर्फ इनकी ही नही है, बल्कि उन नौजवानों की भी है जो दिन-रात अच्छी नौकरी की तलाश मे बस घूमते ही रहते है पर मन पसंद नौकरी नही मिल पाती. तो क्या वो भी हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाए. घर वालों पर बोझ बन जाएं. कई बार ऐसे भी परिवार होते हैं, जिनका तबादला होता रहता है और नया सर्कल ना बनने के कारण वो अकेले हो जाते हैं और बोर होते रहते हैं. उन्हे नई जगह आकर समय निकालना एक बोझ लगने लगता है ऐसे मे वो करें तो क्या करें, जबकि वो कुछ क्रियात्मक करना चाहते हैं. ऐसे ना जाने कितने उदाहरण हैं. पर सोचने की बात है कि फिर ऐसे मे किया तो क्या किया जाए. कहने को हमारी टेक्‍नोलॉजी ने बहुत कुछ किया है, पर इस क्षेत्र मे भी कुछ किया है या नही.

इसका जवाब है हाँ. इस क्षेत्र मे भी बहुत कुछ हो रहा है पर अभी पूरी जानकारी ना होने के कारण इसे सही दिशा नही मिल पा रही है. अब आपके मन मे प्रश्न आ रहा होगा कि क्या है यह. और हम क्या कर सकते हैं. असल मे अगर हम काम करना चाहते है तो चाहे हम खाली घर पर बैठे हों या पार्ट टाईम काम कर रहे हो.

क्लिक करें- मोनिका गुप्‍ता की कलम से अन्‍य लेख

हम इसे आराम से घर बैठ कर कमाई का साधन बना सकते हैं बस इसके लिए आपको थोड़ी कम्प्यूटर की नालिज होनी जरुरी है और आपकी लग्न और इच्छा शक्ति. अगर यह सब आप में है तो ज्यादा समय मत लगाइए बस काम मे जुट जाइए और मौके का फायदा उठा कर इसे कमाई का साधन भी बनाइए.

इसे 'होम बेस्‍ड बिजनस', 'वर्क एट होम' या 'वर्क फ्रॉम होम' यानि घर बैठ कर काम करना भी कहते है. इस काम मे आप दिन में अपने हिसाब से 2-4 घंटे या जितना आप समय निकाल सकते हैं उतना निकाल कर जुट जाइए. अब बात यहाँ आती है कि सही जानकारी कहाँ से और कैसे मिल सकती है तो इसका हल भी है. वैसे तो बहुत सारी वेबसाइट्स हैं। उन पर आपको तमाम जानकारियां मिल जाएंगी। यदि आपको सही और आपके मुताबिक जानकारी चाहिए तो इस क्षेत्र मे एक जाना माना नाम है संजय गुप्ता का. उन्होने पिछ्ले 3-4 सालों मे इस पर बहुत काम किया है और वो इस नतीजे पर पहुचें है, कि अगर इस काम को गम्भीरता से किया जाए तो सफलता आपके कदमो मे होगी.

इंटरनेट पर तमाम वेबसाइट्स हैं, जो वर्क फ्रॉम होम की सुविधा मुहैया कराती हैं।

http://www.linkmerchant.net/blog/
http://www.workathomeindia.com/
http://www.workathomeforum.in/
http://www.stardomindia.com/
http://www.emoindia.com/
http://www.dataworkindia.com/

(नोट- इनमें से किसी भी वेबसाइट का ताल्‍लुक दैट्स हिन्‍दी से नहीं है और न ही यह लेख इनका विज्ञापन है।)

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