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Rajit Gupta : 'जो दिल कहे वो करो, प्रेशर से बचो', JEE Topper राजित गुप्ता ने बताया सक्सेस मंत्र, OI Exclusive

Rajit Gupta Interview, oneindia Exclusive: देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग परीक्षा जेईई एडवांस्ड का रिजल्ट सोमवार को जारी हो गया, इस रिजल्ट के सामने आते ही चारों ओर केवल एक ही नाम गूंज रहा है और वो है 'राजित गुप्ता' का, आपको बता दें कि कोटा के महावीर नगर के रहने वाले राजित ने इस एग्जाम में पहला स्थान प्राप्त किया है, उन्हें 360 में से 332 अंक मिले हैं।

गौरतलब है कि इस एग्जाम में नंबर दो के स्थान पर 'सक्षम जिंदल' रहे, जिन्हें भी 332 नंबर मिले हैं लेकिन 'टाई ब्रेकिंग' नियम के तहत नंबर 1 की कुर्सी राजित गुप्ता के हाथ लगी। रिजल्ट के आउट होते ही बच्चे-बच्चे की जुबान पर 'राजित गुप्ता' का ही नाम था, घर-परिवार में जश्न का माहौल है, बधाई देते लोग थक नहीं रहे हैं।

Rajit Gupta

सोमवार को राजित के पिता दीपक गुप्ता का फोन लगातार बिजी था, आम से लेकर खास तक, हर कोई राजित गुप्ता को बधाई दे रहा था। इस अभूतपूर्व सफलता के बाद राजित ने वनइंडिया हिंदी से खास बातचीत की और अपनी सफलता के राज खोले।

राजित ने शेयर किए सक्केस मंत्र (Rajit Gupta Interview)

वनइंडिया हिंदी से फोन पर बात करते हुए राजित ने अपनी पढ़ाई, परिवार और हॉबी के बारे में खुलकर बातें की, यहां पर पेश हैं उनके साक्षात्कार के मुख्य अंश।

सवाल: राजित गुप्ता, पहले तो आपको बहुत सारी बधाई, ये बताइए किसने बताया आपको सबसे पहले रिजल्ट?

राजित गुप्ता: बहुत बहुत शुक्रिया (हंसते हुए) , मैंने ही खोला अपना रिजल्ट, पहले मां को बोला था लेकिन वो थोड़ा चिंतित हो गईं तो मैंने ही अपना रिजल्ट ओपन किया।

सवाल: आपको उम्मीद थी कि रिजल्ट ऐसा ही होने वाला है?

राजित गुप्ता: मुझे भरोसा था कि मैं टॉपर लिस्ट में रहूंगा लेकिन नंबर वन पर आ गया, एक्साइटमेंट तो था उस वक्त, झूठ नहीं कहूंगा।

सवाल: आपके बाद वाला नंबर यानी कि सक्षम जिंदल का नंबर आपके ही बराबर है, क्या कहना चाहेंगे आप इस पर?

राजित गुप्ता: जी, बड़ा दुख हुआ, भाई जैसा है वो मेरे लिए, मैं उसे सफलता के लिए बधाई देता हूं।

सवाल: आपकी सफलता का राज क्या है? किस तरह से आपने तैयारी की और लक्ष्य को भेदने में कामयाब हुए?

राजित गुप्ता: 'सुबह मैं उठता था, सवा आठ बजे मेरी क्लास होती थी, क्लास करने जाता था, फिर डेढ़ से दो बजे तक मैं फ्री होता था। साढ़े तीन बजे तक मैं पढ़ता नहीं था, मैं कुछ रिलैक्स रहने वाला काम करता था जैसे अपनी बहन के साथ मस्ती कर ली फिर मैं ब्रेक लेकर शाम साढ़े सात तक पढ़ता था।'

'जब मेरा मन होता था तो मैं ब्रेक ले लेता था' (Rajit Gupta)

'जब मेरा मन होता था तो मैं ब्रेक ले लेता था, वो मेरी च्वाइस पर निर्भर करता था। मैं खेलने जाता था, उसी बीच में खाना लिया। मैं नौ-सवा नौ के बीच पढ़ने बैठता था फिर ग्यारह-सवा ग्यारह तक पढ़ लेता था, कभी-कभी और लेट हो जाता था, मेरी कोशिश रहती थी कि मैं नींद पूरी करूं, जिससे अगला दिन खराब ना हो।'

JEE Advanced

सवाल: ALLEN कोचिंग आपने बहुत कम उम्र में ज्वाइन की थी, क्या ये सही है, क्या आपके ऊपर कोई अतिरिक्त भार था?

राजित गुप्ता: मैंने बहुत कम उम्र में यानी कि क्लास 6 में कोचिंग संस्थान ज्वाइन कर लिया था इसलिए एक बहुत गलतफहमी है लोगों के अंदर कि मैं बचपन से ही JEE की तैयारी कर रहा हूं। मशीन की तरह काम करता हूं, इतनी छोटी उम्र से पढ़ रहा हूं। तो मैं बता दूं कि मैंने नार्मल स्कूल वाली स्टडी को बस 7 घंटे के बजाय 4 घंटे में की है और कोई अतिरिक्त प्रेशर मेरे ऊपर कभी नहीं रहा।

सवाल: आपके घर-परिवार में कौन हैं?

राजित गुप्ता: मेरे पापा ने कम्यूनिकेशन में एमटेक किया हुआ है तो वहीं मेरी मां टेक्सटाइल में पीएचडी हैं और एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं, तो शुरू से ही घर में पढ़ाई का काफी अच्छा माहौल रहा लेकिन इस माहौल ने कभी दिल-दिमाग पर कोई प्रेशर नहीं डाला। मेरी एक छोटी बहन है, जिसका नाम 'लाखी गुप्ता' है।

सवाल: पढ़ाई के अलावा क्या-क्या शौक है?

राजित गुप्ता: मैं अपनी छोटी बहन संग काफी मस्ती करता हूं, मेरे कुछ अच्छे दोस्त भी हैं, जिनके साथ मैं खेलने जाता हूं। मैं अपने मम्मा-पापा के साथ काफी बातें करता हूं, बहुत इंज्वाय करता हूं उनके साथ, मैं कार्टून भी देख लेता था। इन सारी बातों से मैं खुद को फ्रेश फील कराता हूं। मैं क्रिकेट और बैडमिंटन भी खेलता हूं। मुझे कोई आकर पूछे कि खेलने चलना है तो मैं मना नहीं करूंगा, मैं गली में खेल लूंगा, क्योंकि मुझे एक तरीका चाहिए होता है खुद को रिलैक्स करने का, प्रेशर से बचने का।

सवाल: सोशल मीडिया को आप कैसे हैडिंल करते हैं?

राजित गुप्ता: सोशल मीडिया को आपको नियंत्रित करना आना चाहिए क्योंकि आप उसे इग्नोर नहीं कर सकते हैं, WhatsApp तो आज वार्तालाप का सीधा सरल साधन है। मम्मी-पापा से बात करनी है तो ये काफी जरूरी है, कभी-कभी कोचिंग के सर भी आपको व्हाटसअप पर जानकारी देते हैं तो मैं उसे बिल्कुल गलत नहीं मानता हूं। रही बात दूसरे सोशल प्लेटफार्म जैसे ट्विटर, फेसबुक तो इन सबसे मैं दूर ही रहता हूं क्योंकि इसका कांसेप्ट ही मुझे पसंद नहीं है इसलिए मैं कभी इससे जुड़ ही नहीं पाया।

सवाल: कोटा को कोचिंग का गढ़ कहा जाता है? आप इससे सहमत हैं?

राजित गुप्ता: कोटा को कोटा बच्चों की सक्सेस और मेहनत ने बनाया है तो मैं ये कह सकता हूं कि दोनों ने ही एक-दूसरे की सफलता में खास भूमिका निभाई है।

सवाल: जिन बच्चों का सेलेक्शन नहीं हुआ, उनके लिए कुछ कहना चाहते हैं?

राजित गुप्ता: 'ये बहुत लंबी जर्नी है, आपको 720 के 720 दिन फाइट करना है, ना केवल अकेडमिक पार्ट से बल्कि नॉनअकेडमिक पार्ट से भी आपको फिट रहना है, आपको बीमार नहीं पड़ना है। कोई बात नहीं अगर एक टेस्ट बुरा चला गया तो, ये बस छोटी-छोटी बातें हैं, जिनसे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए, वो करो जो दिल करे और तनाव से बचने की कोशिश करो।'

'पहले अपने स्टडी के तरीके को चेक कीजिए'

'सबसे महत्वपूर्ण है खुद का satisfaction, आप अपनी मेहनत से कितने संतुष्ट हैं, ये मायने रखता है। अगर आदमी पूरा एफर्ट देता है तो उसका सेलेक्शन हर हालत में होता ही है, अगर आपके नंबर कम आ रहे हैं तो पहले अपने स्टडी के तरीके को चेक कीजिए, वो सही है या नहीं उसे समझिए, लोगो से कंसल्ट कीजिए और कोई धारणा ना बनाइए, अपने डाउट को क्लीयर कीजिए और आगे बढ़िए।'

धन्यवाद।

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