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UPSC: 'देशसेवा के लिए छोड़ी मोटी सैलरी वाली जॉब', मिलिए 57 रैंक हासिल करने वालीं लावण्या गौर से, Oi Exclusive

Success Story, AIR 57 , Lavanya Gaur, Oi Exclusive: 'कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं, अगर ये आदत बन जाए, तो सफलता ही तकदीर बन जाती है', देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की इन लाइनों को पूरी तरह से चरितार्थ किया है, दिल्ली की रहने वाली लावण्या गौर ने, जिन्होंने UPSC रिजल्ट 2024 में 57 रैंक हासिल की है।

मेहनत को ही सफलता का मूल मंत्र मानने वाली लावण्या गौर ने वनइंडिया से Exclusive बातचीत में अपनी सफलता और अपने अब तक सफर के बारे में खुलकर बात की। चौथे प्रयास में UPSC क्रैक करने वाली लावण्या से पूछा गया कि आपकी सक्सेस का कारण क्या है?

UPSC

तो उन्होंने कहा कि 'इसमें कोई शक नहीं कि UPSC का एग्जाम काफी टफ होता है और इसका सिलेबस भी काफी ज्यादा है लेकिन मेरा मानना है कि अगर आपका Why क्लियर हो तो आपके लिए चीजें आसान हो जाती हैं, आप उसे बोझ की तरह नहीं लेते हैं।

आखिर ये Why क्या है? (UPSC)

तब लावण्या गौर ने कहा कि 'लोगों को आईएस क्यों बनना है? क्यों UPSC क्रैक करना है? ये बात साफ होनी बहुत ज्यादा जरूरी है। हर किसी के इसके बारे में अलग-अलग कारण हो सकते हैं, मेरे केस में अगर बात की जाए तो मैंने कंप्यूटर साइंस में साल 2021 में इंदिरा गांधी टेक्निकल विवि से बीटेक किया है और उसके बाद मैंने फेसबुक और गूगल जैसे कंपनियों में एक साल जॉब भी की थी। नौकरी के दौरान मुझे कुछ बातों एहसास हुआ, दरअसल मुझे लोगों से बातें करना पसंद है, मैं उनकी समस्याओं को दूर करने की कोशिश करती हूं।

'मैं ग्राउंड में रहकर देश के लोगों के लिए कुछ कर सकती हूं'

'तब ही मैंने UPSC के बारे में सोचा कि यही मुझे वो प्लेटफार्म देगा, जिससे मैं ग्राउंड में रहकर अपने देश के लोगों के लिए कुछ कर सकती हूं और थोड़ा सा भी अपना योगदान देकर देश के लिए कुछ कर पाऊं तो इससे अच्छा क्या होगा, ये तो पहला कारण था लेकिन दूसरा प्रमुख कारण मेरी बुआ हैं, जो कि मेरी आदर्श रही है, मेरी बुआ बैच 2001 की IRTS रही हैं, उन्होंने अपनी जर्नी के जरिए ये बताया है कि 'कैसे एक प्लेटफार्म खूबसूरत स्थान मुहैया कराता है, जिसमें आप लोगों की सेवा कर पाते हैं।'

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फेसबुक-गूगल की मोटी सैलरी पैकेज को छोड़कर सिविल सेवा के बारे में कैसे सोचा?

इस सवाल के जवाब में लावण्या ने कहा कि 'कोई संदेह नहीं कि सैलरी पैकेज काफी अच्छा था लेकिन हर मंथ के एंड में सैलरी तो आ रही थी लेकिन खुशी नहीं हो रही थी, हमेशा लगता था कि अपनी नॉलेज का हमें बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए , सैलरी बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन मेरे लिए वो मोटिवेटिंग फैक्टर नहीं था, मुझे लगता था कि अगर मेरी वजह से एक-दो इंसान के भी जीवन में सकारात्मक असर होता है तो मुझे संतुष्टी मिलेगी।'

हर दिन नियमित पढ़ाई, सेल्फ स्टडी को दिया महत्व (UPSC)

लावण्या ने कहा कि 'साल 2021 से ही मैंने UPSC के लिए तैयारी शुरू कर दी थी, फिर मुझे लगा कि जॉब के साथ मैं पढ़ाई नहीं कर पा रही हूं और इसलिए मैंने जॉब छोड़ दी, मैंने सेल्फ स्टडी की है, मैंने कोई कोचिंग सेंटर ज्वाइन नहीं किया। मैंने सारी तैयारी ऑनलाइन की है, इंटरनेट का बहुत फायदा हुआ । यूट्यूब से काफी कुछ सीखने को मिला।'

क्या सोशल मीडिया पढ़ाई में बाधा नहीं डालता है?

लावण्या ने कहा कि 'यूट्यूब बहुत सारी ज्ञान की बातें मुहैया कराता है, सोशल मीडया जैसे इंस्टा को मैंने भी डिएक्टिव कर दिया था, ये आप पर पूरी तरह से निर्भर करता है कि आप किसी भी चीज को कैसे यूज करते हैं।'

क्या कभी निराश होती थीं? कभी लगा कि हमसे नहीं हो पाएगा?

लावण्या ने कहा कि 'इस एग्जाम के लिए रणनीति होना बहुत जरूरी है, अपने सोर्सेज लिमिटेड रखने हैं और सबसे बड़ी बात निरंतरता आपको लगातार मेंटन करनी है। मैं नियमित तौर पर 7-8 घंटे पढ़ती थी और जब प्री या मेंस आते थे तो 10-12 घंटे हो जाते थे।

'हर किसी के पास एक हॉबी जरूर होनी चाहिए'

कभी-कभी लगता था ये बहुत कठिन है तो मेरा मानना है कि इस चीज से बाहर निकलने के लिए हर किसी के पास एक हॉबी जरूर होनी चाहिए और शारीरिक व्यायाम पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि ये आपको मेंटली भी फिट रखता है। कोई भी 24 घंटे नहीं पढ़ सकता है, जैसे मैं भजन सुनती थी, फैमिली से बातें करती थीं, कुछ ना कुछ ऐसा करना चाहिए जो आपको खुशी दे, जिससे आपका तनाव कम हो आप कूल माइंड होकर पढ़ाई कर पाएं।'

पढ़ाई के अलावा क्या शौक है?

लावण्या ने हंसते हुए कहा कि 'मैं बहुत बड़ी फूडी हूं, जब मुझे थोड़ा सा तनाव होता था तो मैं बेकरी के आइटम या मीठा खाती थी, जिससे स्ट्रेस कम हो जाता था। मैं लॉग टेनिस को फॉलो करती हूं, मुझे भजन सुनना पसंद है, मुझे फैमिली और दोस्तों से बात करना पसंद है। सच कहूं तो नॉन यूपीएसएसी फ्रेंडस होना बहुत ज्यादा जरूरी है।'

शादी के बारे में क्या सोचा है?

लावण्या ने मुस्कुराते हुए बोला कि 'अभी तक तो पढ़ ही रहे थे, मैंने इस बारे में कुछ सोचा नहीं है, घरवाले चुनें या फिर मैं, मुझे लगता है कि जोड़ियां तो ऊपर से बनकर आती हैं, जब उसकी मर्जी होगी तो जैसी होनी होगी हो जाएगी।'

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UPSC की तैयारी करने वालों से क्या कहना चाहेंगी?

लावण्या ने कहा कि 'UPSC की तैयारी करने वालों को ये समझना होगा कि UPSC केवल एक एग्जाम है और उसे उसी की तरह देखना चाहिए, किसी भी चीज को जिंदगी से बढ़कर ना मानिए क्योंकि कभी-कभी आप इसे "Larger than life" बना देते हैं और इस वजह से इंसान को जब सफलता नहीं मिलती है तो वो डिप्रेशन में चला जाता है, ये नहीं होना चाहिए। हर किसी को ये समझना होगा कि हम 60-70 के दौर में नहीं जी रहे हैं, ये 2025 है, जहां चारों ओर बहुत सारे अवसर हैं।'

'बच्चे आधी जंग वहीं जीत जाते है, जहां उनके मां-बाप उनका साथ देते हैं'

'अगर आपने सारे प्रोसेस फॉलो किए हैं लेकिन किसी भी कारण से आपका सेलेक्शन नहीं हुआ है तो आप मान कर चलिए कि ऊपरवाला आपको इससे बेटर कुछ देने वाला है। मैं अभिभावकों और मां-बाप से भी एक बात कहना चाहती हूं कि उनका सपोर्ट बहुत जरूरी है, बच्चे आधी जंग वहीं जीत जाते है, जहां उनके मां-बाप उनका साथ देते हैं। सफलता से ज्यादा निराशा के वक्त मां-बाप का सपोर्ट बहुत जरूरी होता है।'

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' देश में शांति का माहौल बनाए रखना हमारा भी नैतिक कर्तव्य'

पहलगाम हिंसा के बारे में लावण्या ने कहा कि 'ये एक घृणित अपराध है, जो भी हुआ है वो गलत हुआ है, एक धर्म विशेष को टारगेट करना हमारी संस्कृति है ही नहीं, ये निंदनीय है। पाकिस्तान के खिलाफ हमारी सरकार जो कुछ भी कर रही है।'

'इस घिनौनी हरकत से हमारे देश में सांप्रदायिक तनाव ना हों'

'वो सही है और पूरा भरोसा है कि हमारी सरकार इसे बहुत अच्छे से हैंडल करेगी, हमें ये समझना होगा कि इस घिनौनी हरकत से हमारे देश में सांप्रदायिक तनाव ना हों, देश में शांति का माहौल बनाए रखना हमारा भी नैतिक कर्तव्य है, जिन्होने भी अपने करीबी लोगों को इस हमले में खोया है, उनके लिए 'रेस्ट इन पीस' कहना बहुत छोटा है, उन सभी के लिए सभी को सहानुभूति है, सरकार इस बारे में उचित कदम उठाएगी, इसका विश्वास है।'

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