DU में सिलेबस को लेकर विवाद! PG कोर्स के राजनीति-इतिहास में हो सकते हैं बदलाव, ड्राप होंगे कौन से टॉपिक्स?
Delhi University Syllabus: दिल्ली यूनिवर्सिटी एक बार फिर अपने कोर्स में बदलाव को लेकर विवादों के घेरे में आ गई है। पिछले कुछ वर्षों में डीयू की अकादमिक नीतियों को लेकर उठे सवालों की फेहरिस्त में अब एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। इस बार निशाने पर हैं राजनीति विज्ञान और इतिहास जैसे विषय, जिनके कुछ चैप्टर को हटाने की सिफारिश की गई है।
हटाए जाने वाले विषयों में हिंदू राष्ट्रवाद, आदिवासी आंदोलनों, इस्लाम के सामाजिक विस्तार और दक्षिणपंथी विचारधाराओं से जुड़े कंटेंट शामिल हैं। यूनिवर्सिटी का कहना है कि ये टॉपिक्स संवेदनशील हैं और छात्रों के बीच वैचारिक टकराव का कारण बन सकते हैं। लेकिन इस फैसले ने शिक्षकों और छात्रों के बीच बहस छेड़ दी है - क्या यह शिक्षण में हस्तक्षेप है या फिर एक शांति कायम रखने वाला कदम?

राजनीति विज्ञान और इतिहास के सिलेबस में बदलाव की तैयारी
दिल्ली यूनिवर्सिटी एक बार फिर अपने पाठ्यक्रम बदलाव को लेकर चर्चा में है। इस बार यूनिवर्सिटी के पोस्ट ग्रेजुएट (PG) स्तर के कोर्स में कुछ अहम चैप्टर हटाने की सिफारिश की गई है। स्टैंडिंग कमेटी ने उन टॉपिक्स को हटाने की बात कही है जो धार्मिक या राजनीतिक रूप से संवेदनशील माने जा रहे हैं।
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कौन-कौन से चैप्टर हटाए जा सकते हैं?
राजनीति विज्ञान विषय से जिन टॉपिक्स को हटाने की सिफारिश की गई है, उनमें शामिल हैं:
- 'Hindu Nationalism: A Reader' - हिंदू राष्ट्रवाद से जुड़ी विचारधारा पर आधारित किताब
- 'In the Belly of the River' - नर्मदा आंदोलन और आदिवासी मुद्दों पर केंद्रित
- 'Public Policy in South Asia' - इसमें आदिवासियों के कथित 'हिंदूकरण' की बात की गई है
- 'Routine Violence' - इसमें दक्षिणपंथ और गांधी-सावरकर जैसे नेताओं के विचारों का विश्लेषण है
इतिहास विषय में जिन चैप्टरों को हटाने की बात हो रही है, वे हैं:
- 'Sultan Among Hindu Kings' - विजयनगर में इस्लामी प्रभाव को दर्शाता है
- 'The Rise of Islam and the Bengal Frontier' - बंगाल में इस्लाम के फैलाव की सामाजिक और आर्थिक कहानी बताता है
पहले भी हटाए गए थे कुछ टॉपिक्स
यह पहला मौका नहीं है जब डीयू ने कोर्स से विवादित माने जा रहे विषयों को हटाया हो। जून 2025 में 'ग्लोबल पॉलिटिक्स' सब्जेक्ट से पाकिस्तान, चीन और इस्लाम से जुड़ा पूरा पेपर सिलेबस से हटा दिया गया था। उस समय भी प्रशासन का कहना था कि ये विषय छात्रों में वैचारिक मतभेद पैदा कर सकते हैं।
क्या कहता है यूनिवर्सिटी प्रशासन?
यूनिवर्सिटी के कोर्स रिव्यू पैनल का कहना है कि कुछ विषय इतने संवेदनशील हैं कि क्लासरूम में उनके कारण विवाद या तनाव हो सकता है। ऐसे में शैक्षणिक माहौल शांतिपूर्ण और सकारात्मक बनाए रखने के लिए यह फैसला जरूरी है।
अध्यापकों और छात्रों का अलग नजरिया
यूनिवर्सिटी के इस कदम को लेकर शिक्षा जगत में दो तरह की राय सामने आई है। कुछ प्रोफेसर मानते हैं कि इस तरह की कटौती अकादमिक स्वतंत्रता को कमजोर करती है। वहीं, कुछ शिक्षकों और छात्रों का कहना है कि ऐसे विषयों से बचना ही बेहतर है ताकि पढ़ाई का माहौल सुरक्षित और शांत बना रहे।
अभी नहीं हुआ अंतिम फैसला
हालांकि, ये सिफारिशें अभी शुरुआती चरण में हैं। अंतिम निर्णय यूनिवर्सिटी की अगली बैठक में लिया जाएगा। तब तक छात्रों और फैकल्टी की नजरें इस फैसले पर टिकी रहेंगी।
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