Trigrahi yoga: 18 अक्टूबर से तुला राशि में बनेगा त्रिग्रही योग, जानिए ये अच्छा है या बुरा?
तुला राशि में बनेगा त्रिग्रही योग: 17 अक्टूबर 2022 को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करने के अगले दिन 18 अक्टूबर को शुक्र भी तुला राशि में प्रवेश कर जाएगा। तुला राशि में पहले से ही केतु विद्यमान है। इसलिए 18 अक्टूबर से तुला राशि में सूर्य, शुक्र और केतु की त्रिग्रही युति हो जाएगा। इसके साथ ही सूर्य-केतु की युति से यहां सूर्य ग्रहण दोष भी बन जाएगा। चूंकिइनके साथ प्रेम संबंध, दांपत्य, भौतिक सुखों का ग्रह शुक्र भी रहेगा इसलिए सबसे ज्यादा प्रभाव वृषभ-तुला राशि के जातकों पर होगा। वृषभ और तुला राशि के जातकों के प्रेम संबंध संकटपूर्ण स्थिति में रहेंगे। विवाहितों का दांपत्य जीवन संकट में आ सकता है। इसके साथ ही भौतिक सुखों में भी कमी आ सकती है।

केतु का गोचर पहले से तुला राशि में चल रहा है। सूर्य 17 अक्टूबर को रात्रि 9.38 बजे तुला राशि में जाएगा जो उसकी नीच राशि है। इसके ठीक 24 घंटे बाद 18 अक्टूबर को शुक्र रात्रि 9.38 बजे तुला में प्रवेश कर जाएगा। इस प्रकार 18 अक्टूबर से शुक्र सूर्य और केतु के प्रभाव में आ जाएगा। शुक्र अस्त सा हो जाएगा, शुक्र निस्तेज हो जाएगा और उसका कोई प्रभाव नहीं रह जाएगा। इसके प्रभाव से अन्य राशि के जातक भी प्रभावित होंगे।
शुक्र के निस्तेज होने का अर्थ
सूर्य के प्रभाव में शुक्र का अपना कोई असर नहीं रह जाएगा। तुला शुक्र की स्वराशि है, इसके बावजूद शुक्र का प्रभाव समाप्त सा हो जाएगा। शुक्र प्रेम, दांपत्य, यौन शक्ति, सौंदर्य, आकर्षण का प्रतिनिधि ग्रह है। ये सारे प्रभाव कम हो जाएंगे और इससे सभी राशियां प्रभावित होंगी। सूर्य-केतु के ग्रहण दोष के कारण सभी राशियों के मान-सम्मान में कमी आएगी।
क्या उपाय करें
त्रिग्रही दोष से बचने के लिए नवग्रह स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करें। यह स्थिति एक मास अर्थात 17 नवंबर तक रहेगी इसलिए तब तक के समय में प्रतिदिन नवग्रह स्तोत्र का पाठ करना आवश्यक है। नवग्रह पेंडेंट अथवा नवग्रह की अंगूठी धारण करें।












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