Yogi Cabinet Expansion: अखिलेश के PDA की उड़ेगी नींद! योगी कैबिनेट विस्तार में इन 6 विधायकों की चमकेगी किस्मत
Yogi Cabinet Expansion: पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में मिली शानदार जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी अब उत्तर प्रदेश के मिशन 2027 के लिए कमर कस चुकी है। दिल्ली आलाकमान की हरी झंडी मिलने के बाद योगी आदित्यनाथ सरकार के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
माना जा रहा है कि कल यानी 10 मई को राजभवन में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय संतुलन बनाने के साथ-साथ विपक्षी गठबंधन के 'PDA' फॉर्मूले की काट खोजना और सरकार में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।

कौन हो सकते हैं 6 नए चेहरे
- कृष्णा पासवान (दलित (पासी)
- मनोज पांडे ( ब्राह्मण )
- भूपेंद्र चौधरी (जाट)
- अशोक कटारिया (गुर्जर)
- रोमी साहनी (पंजाबी खत्री )
इसके अलावा पूजा पाल, कमलेश पासवान और अवध से एक कुर्मी विधायक को भी कैबिनेट में शामिल किए जाने की चर्चा है।
Yogi Adityanath New Ministers: सामाजिक और जातीय संतुलन पर फोकस
योगी सरकार के इस विस्तार में 'सर्वजन' को साधने की कोशिश की गई है। इसमें दलितों के पासी समाज, पिछड़ों में जाट और कुर्मी, ब्राह्मणों और पंजाबी खत्री समाज को विशेष प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी एक क्षेत्र या वर्ग में असंतोष न रहे और विपक्षी दलों के जातीय लामबंदी के दांव को समय रहते कुंद किया जा सके।
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पश्चिम से पूर्व तक का क्षेत्रीय समीकरण
विस्तार में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और अवध क्षेत्र का विशेष ध्यान रखा गया है। पश्चिमी यूपी से भूपेंद्र चौधरी और अशोक कटारिया के जरिए जाट और गुर्जर वोटों को सहेजने की रणनीति है। वहीं, अवध और पूर्वांचल से पूजा पाल और मनोज पांडे जैसे चेहरों के जरिए कुर्मी और ब्राह्मण मतदाताओं को एकजुट रखने की कोशिश की जा रही है।
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दलित और महिला प्रतिनिधित्व को मजबूती
बीजेपी इस बार दलित समुदाय के भीतर भी उप-जातियों के प्रतिनिधित्व पर जोर दे रही है। कृष्णा पासवान (पासी) और कमलेश पासवान की चर्चा इस बात का संकेत है कि पार्टी दलित वोटों के बड़े हिस्से पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। साथ ही, पूजा पाल जैसी महिला नेताओं को शामिल कर आधी आबादी के बीच पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने का लक्ष्य है।












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