Damayanti Sen: कौन हैं दमयंती सेन? ममता राज में हुईं साइडलाइन, अब शुवेंदु सरकार में करेंगी पाई-पाई का हिसाब
Who Is IPS Damayanti Sen: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा (BJP) सरकार ने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) शासनकाल के दौरान हुए संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए दो बेहद शक्तिशाली आयोगों का गठन किया है।
इस फैसले ने बंगाल के सियासी गलियारे में भूचाल ला दिया है, क्योंकि इसमें एक ऐसे नाम की वापसी हुई है जिसने कभी ममता सरकार की नींद उड़ा दी थी। साल 2012 के चर्चित पार्क स्ट्रीट रेप केस के बाद साइडलाइन कर दी गईं तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन को इस जांच पैनल में बेहद अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कौन हैं दमयंती सेन?
दमयंती सेन 1996 बैच की बेहद ईमानदार और कड़क आईपीएस (IPS) अधिकारी हैं। उनके नाम एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज है- वह कोलकाता पुलिस की पहली महिला जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) बनी थीं। इसके बाद वह कोलकाता पुलिस की स्पेशल कमिश्नर भी रहीं और 2023 में उन्हें एडीजी (ट्रेनिंग) बनाया गया था।
कौन हैं जस्टिस समाप्ति चटर्जी
कलकत्ता हाई कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं। इन्हें महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अत्याचारों की जांच करने वाले इस नए आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। दमयंती सेन इस आयोग में 'सदस्य सचिव' (Member Secretary) के रूप में काम करेंगी।
क्या है पूरा मामला और आयोग का काम?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को घोषणा की कि यह विशेष आयोग पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार के कार्यकाल के दौरान अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अल्पसंख्यक समुदायों सहित महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हुए अत्याचारों की गहन जांच करेगा।
किन-किन मामलों की होगी जांच?
यह आयोग संदेशखाली (Sandeshkhali), कस्बा (Kasba), बोगतुई (Bogtui) और पिछले शासनकाल में हुई अन्य सभी प्रमुख हिंसक घटनाओं की फाइलें दोबारा खोलेगा।
यह कमेटी महज कागजों पर काम नहीं करेगी। 1 जून 2026 से यह आयोग अपना काम शुरू कर देगा। पुलिस थानों में ही जनसुनवाई (Public Hearings) की तर्ज पर शिकायतें दर्ज की जाएंगी। इससे पहले अधिकारी हर तरह का जरूरी डेटा जुटाने में लगे हैं।
क्यों साइडलाइन हुई थीं दमयंती सेन?
दमयंती सेन की इस आयोग में नियुक्ति को बंगाल की ब्यूरोक्रेसी में 'लाइफ कम्स फुल सर्कल' (वक्त का पहिया घूमना) कहा जा रहा है। इसके पीछे 14 साल पुरानी एक कड़वी दास्तान है:
- पार्क स्ट्रीट गैंगरेप (6 फरवरी 2012): कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में एक नाइटक्लब से लौट रही सुज़ेट जॉर्डन नाम की महिला के साथ चलती कार में सामूहिक दुष्कर्म हुआ था।
- सच्चाई के साथ खड़ी रहीं दमयंती: तत्कालीन जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) दमयंती सेन ने राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया। उनकी टीम ने महज कुछ ही दिनों में आरोपियों को ढूंढ निकाला और वैज्ञानिक सबूतों से साबित कर दिया कि बलात्कार की घटना सच थी।
- सजा भुगती, पर डिगी नहीं: सरकार के आधिकारिक नैरेटिव को झूठा साबित करने का खामियाजा दमयंती सेन को भुगतना पड़ा। केस सुलझते ही उनका तबादला कोलकाता पुलिस मुख्यालय (लालबाजार) से हटाकर बैरकपुर पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में एक कम महत्वपूर्ण पद पर कर दिया गया। इसके बाद पूरे टीएमसी शासन के दौरान उन्हें किसी भी हाई-प्रोफाइल या राजनीतिक रूप से संवेदनशील केस से दूर रखा गया।
कहां-कहां तक फैलेगा इस जांच का दायरा?
इस आयोग का कार्यक्षेत्र पूरा पश्चिम बंगाल होगा, लेकिन इसका मुख्य फोकस उन इलाकों पर रहेगा जो पिछले कुछ सालों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के केंद्र बने थे:
- संदेशखाली (Sandeshkhali): इस क्षेत्र में पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान महिलाओं के साथ हुए संस्थागत उत्पीड़न, यौन शोषण और जबरन जमीन हड़पने के गंभीर आरोपों की गहराई से जांच की जाएगी।
- बोगतुई (Bogtui): यहां हुई भयानक हिंसा और आगजनी के मामले की जांच होगी, जिसमें राजनीतिक प्रतिशोध के चलते कई महिलाओं और बच्चों को बेरहमी से जिंदा जला दिया गया था।
- कस्बा (Kasba): इस इलाके में कानून व्यवस्था को ताक पर रखकर अंजाम दिए गए गंभीर अपराधों और महिलाओं से जुड़े अन्य संवेदनशील मामलों को दोबारा खंगाला जाएगा।














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