Putin China Visit: Trump के तत्काल बाद पुतिन जा रहे चीन, भारत-पाक की रहेगी पैनी नजर! पश्चिमी में अभी से टेंशन
Putin China Visit: अभी अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग से उड़कर होकर अमेरिका पहुंचे ही थे कि एक और बड़ी खबर आ गई। दरअसल अब रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin 19 मई चीन के दौर पर जा रहे हैं और इनका दौरा भी ट्रंप की तरह दो दिनों का होगा। क्रेमलिन ने भी इस बात की औपचारिक जानकारी मीडिया को दी है। यह दौरा इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की चीन यात्रा खत्म होने के तुरंत बाद पुतिन बीजिंग पहुंचने वाले हैं। इससे कई सारी सुगबुगाहटें एक साथ चल पड़ी हैं, आइए जानते हैं कि इस दौरे से चीन के कद में क्या इजाफा होगा और पुतिन ने यही वक्त क्यों चुना बीजिंग की सैर के लिए।
शी जिनपिंग के साथ होगी बड़ी रणनीतिक बैठक
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुतिन चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से मुलाकात करेंगे। इस बैठक का मुख्य मकसद रूस और चीन के बीच व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है। दोनों नेता कई बड़े अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत करेंगे और एक ज्वॉइंट मेनिफेस्टो पर साइन भी कर सकते हैं। कुछ इसे दुनिया के एनर्जी सोर्सेस की डील बता रहे हैं तो कोई जियो-पॉलिटिक्स से जोड़ रहा है।

चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मिलेंगे पुतिन
राष्ट्रपति पुतिन सिर्फ शी जिनपिंग से ही नहीं, बल्कि चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। खास बात यह है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिमी देशों और रूस के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। जिसमें चीन का झुकाव रूस की तरफ पश्चिम की तुलना में ज्यादा दिख रहा है।
भारत-पाकिस्तान की रहेगी नजर
एक्सपर्ट्स की मानें तो पुतिन की चीन यात्रा पर भारत और पाकिस्तान दोनों की पैनी नजर रहेगी। क्योंकि चीन पाकिस्तान के हित में कई बड़े फैसले ले चुका है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी मदद की थी। वहीं, भारत ने उस दौरान रूसी हथियार जरूर इस्तेमाल किए लेकिन उतना समर्थन मिलता नहीं दिखा। इसके अलावा पाकिस्तान भी रूस के साथ ट्रेड डील करने की कोशिश कर रहा है। इसीलिए देखना होगा कि जो भी ट्रेड या फिर एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर डील होंगी उसमें भारत या फिर पाकिस्तान के लिए कुछ निकलता है या नहीं।
ट्रंप की यात्रा के तुरंत बाद क्यों अहम है यह दौरा?
पुतिन की यह यात्रा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की दो दिवसीय चीन यात्रा खत्म होने के ठीक बाद हो रही है। ट्रंप की यात्रा शुक्रवार को समाप्त हुई थी। चीन ने ट्रंप का भव्य स्वागत किया, जो 2017 के बाद उनकी पहली चीन यात्रा थी। इस वजह से अब पूरी दुनिया यह देखने की कोशिश कर रही है कि बीजिंग अमेरिका और रूस दोनों के साथ अपने रिश्तों को किस तरह संतुलित कर रहा है।
ट्रंप ने किए बड़े दावे लेकिन मिला कुछ खास नहीं
चीन यात्रा खत्म होने के बाद ट्रंप ने दावा किया कि उनकी शी जिनपिंग के साथ शानदार व्यापारिक डीलें हुई हैं। हालांकि इसके बावजूद ताइवान मुद्दा, टेक्नोलॉजी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे कई बड़े विषय अब भी अमेरिका और चीन के बीच तनाव की वजह बने हुए हैं। हालांकि कोई बड़े ऐसे MoUs साइन नहीं हुए जिनकी उम्मीद थी।
पहली बार एक महीने में दो प्रतिद्वंदी चीन की धरती पर
ट्रंप और पुतिन की लगातार यात्राएं बेहद खास मानी जा रही हैं। संभवतः पहली बार ऐसा हो रहा है जब चीन एक ही महीने में अमेरिका और रूस दोनों के राष्ट्रपतियों की द्विपक्षीय बैठकों की मेजबानी कर रहा है। इसे चीन की बड़ी कूटनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पता चलता है कि चीन का अतंर्राष्ट्रीय कद कितना बड़ चुका है।
बीजिंग क्या दिखाना चाहता है?
एक्सपर्ट का मानना है कि चीन यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह वैश्विक तनाव और संघर्षों के बावजूद दुनिया की दोनों बड़ी शक्तियों के साथ स्थिर संबंध बनाए रख सकता है। यानी बीजिंग खुद को सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति केंद्र के रूप में पेश करना चाहता है।
रूस-चीन रिश्ते लगातार हो रहे मजबूत
पिछले कुछ सालों में रूस और चीन के रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं। पुतिन आखिरी बार सितंबर में एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन के लिए चीन गए थे। इसके अलावा मई 2024 में राष्ट्रपति पद पर दोबारा नियुक्त होने के तुरंत बाद भी उन्होंने शी जिनपिंग के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक की थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदल गया पूरा समीकरण
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से चीन और रूस के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग लगातार बढ़ा है। पश्चिमी देशों ने रूस पर कई बड़े प्रतिबंध लगाए, लेकिन चीन मॉस्को के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारों में से एक बन गया। यूक्रेन मामले पर चीन खुलकर रूस के साथ है। वह पश्चिमी मदद की भी आलोचना कर चुका है।
रूस के लिए चीन क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
आज चीन रूस के लिए सबसे बड़े आर्थिक सहारों में से एक बन चुका है। खासकर ऊर्जा क्षेत्र में चीन की भूमिका बेहद अहम है। चीन दुनिया में रूसी जीवाश्म ईंधन का सबसे बड़ा खरीदार माना जाता है। यही वजह है कि पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिलता रहा है।
पुतिन का बॉडी लैंग्वेज कहेगा बहुत कुछ
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में जितने तेवर दिखाए थे वे चीन यात्रा को दौरान बुरी तरह फीके पड़ते दिखे। ऐसे में ये देखने वाली बात होगी कि जब पुतिन बीजिंग पहुंचेंगे तो उनका बॉडी लैंग्वेज कैसा रहता है। क्या वे ट्रंप की तरह कुर्सी पर सिकुड़कर बैठेंग या सीना तानकर बराबरी की हैसियत के साथ हाथ मिलाएंगे। जो भी हो, लेकिन ये पश्चिम के लिए नींद उड़ाने वाली यात्रा हो सकती है।
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