US Iran Peace Deal: खत्म होगा युद्ध? 14 पॉइंट्स के उस गुप्त समझौते में क्या है, जिससे शांति की उम्मीद
US Iran Peace Deal: वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध की स्थिति को खत्म करने के लिए एक बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देश एक 14-पॉइंट के समझौते (MoU) पर बातचीत कर रहे हैं, जिसका मकसद फिलहाल चल रही दुश्मनी को रोकना और परमाणु मुद्दों पर लंबी बातचीत का रास्ता खोलना है।
हालांकि अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि यह तनाव कम करने की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम है। इस समझौते के तहत 30 दिनों का एक 'नेगोशिएशन विंडो' खुलेगा, जिसमें बड़े विवादों को सुलझाया जाएगा।

US Iran 14-point Memorandum: क्या है 14-पॉइंट का यह खास फॉर्मूला?
यह समझौता महज एक पन्ने का है, जिसमें 14 मुख्य बातें लिखी गई हैं। इसका पहला लक्ष्य तुरंत 'सीजफायर' यानी गोलाबारी रोकना है। इसके बाद 30 दिनों का समय तय किया गया है, जिसमें दोनों देश बैठकर एक स्थाई समाधान ढूंढेंगे। अगर यह सफल रहा, तो इसे आधिकारिक तौर पर "युद्ध की समाप्ति" माना जाएगा। इस दौरान ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों पर रोक लगाएगा और बदले में अमेरिका उस पर लगी पाबंदियों (Sanctions) में ढील देना शुरू कर देगा।
ये भी पढे़ं: Iran जंग के बीच Pakistan में America ने बंद किया कॉन्सुलेट, मुनीर की सिक्योरिटी पर ट्रंप को नहीं रहा भरोसा
पाबंदियां हटेंगी और पैसा होगा रिलीज
समझौते की सबसे बड़ी शर्त यह है कि अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए अरबों डॉलर वापस करेगा। इसके साथ ही ईरान के व्यापार पर लगी कड़ी पाबंदियां भी हटाई जाएंगी। बदले में ईरान को यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) का काम रोकना होगा। इसके अलावा, दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता आसान बनाने और वहां सैन्य तनाव कम करने पर भी सहमत हुए हैं। इससे वैश्विक तेल बाजार को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
यूरेनियम पर 'टाइम लिमिट' का पेंच
सबसे ज्यादा बहस इस बात पर है कि ईरान कितने सालों तक परमाणु काम रोके रखेगा। अमेरिका चाहता है कि यह रोक 20 साल के लिए हो, जबकि ईरान सिर्फ 5 साल की बात कह रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 12 से 15 साल के बीच कोई समझौता हो सकता है। इस समय सीमा के बाद ईरान को केवल 3.67% तक ही यूरेनियम संवर्धित करने की इजाजत होगी, जो परमाणु बम बनाने के लिए काफी नहीं होता।
कड़ी निगरानी और सुरक्षा शर्तें
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने Underground परमाणु ठिकानों को बंद करे। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र (UN) के इंस्पेक्टरों को कभी भी, कहीं भी जांच (Snap checks) करने की आजादी दी जाए। एक प्रस्ताव यह भी है कि ईरान के पास मौजूद 'हाई एनरिच्ड यूरेनियम' का स्टॉक अमेरिका को सौंप दिया जाए। अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके, और अगर वह नियम तोड़ता है, तो पाबंदियां दोबारा लगा दी जाएं।
ये भी पढ़ें: Hormuz Crisis: बीच समंदर फंसा अमेरिकी जहाज, न निकलने का रास्ता, न पीछे हटने की जगह
इस समझौते को लेकर दो फाड़
White House को डर है कि ईरान की सरकार के अंदर ही इस समझौते को लेकर दो फाड़ हैं, जिससे बात बिगड़ सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ईरान की विश्वसनीयता पर शक जताया है, हालांकि उन्होंने माना कि तकनीकी बारीकियों को सुलझाने में समय लगेगा। अगले 48 घंटे बेहद अहम हैं, क्योंकि अमेरिका ईरान के जवाब का इंतजार कर रहा है। अगर बात बनी, तो अगली बड़ी बैठक इस्लामाबाद या जिनेवा में हो सकती है।
ट्रंप ने क्या कहा?
वहीं इस समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि, 'अगर ईरान उन बातों को मान लेता है जिन पर सहमति बनी है-हालांकि ऐसा होना थोड़ा मुश्किल लग रहा है-तो हमारा सैन्य अभियान 'एपिक फ्यूरी' खत्म हो जाएगा। इसके बाद, जो सख्त नाकाबंदी हमने लगा रखी है, उसे हटा लिया जाएगा और हॉर्मुज समुद्री रास्ता ईरान समेत सबके लिए खोल दिया जाएगा। लेकिन अगर वे बात नहीं मानते, तो बमबारी फिर से शुरू होगी, और इस बार हमला पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और तेज होगा।












Click it and Unblock the Notifications