Iran जंग के बीच Pakistan में America ने बंद किया कॉन्सुलेट, मुनीर की सिक्योरिटी पर ट्रंप को नहीं रहा भरोसा
US Consulate Pakistan: अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत कर अपनी पीठ थपथपा रहे शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा झटका दे दिया है। दरअसल अमेरिका ने पेशावर स्थित अपना Consulate (वाणिज्य दूतावास) बंद करने का फैसला लिया है। यह कदम खास तौर पर वहां तैनात अमेरिकी राजनयिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
पाकिस्तान में कैसे चलेगा US का व्यापार?
विदेश विभाग के मुताबिक, पेशावर दूतावास के बंद होने के बाद सभी राजनयिक गतिविधियों की जिम्मेदारी U.S. Embassy Islamabad को सौंप दी जाएगी। इससे स्थानीय अधिकारियों के साथ अमेरिका का संपर्क बना रहेगा और कामकाज में कोई बड़ी रुकावट नहीं आएगी। इस बदलाव का मकसद सुरक्षा के साथ-साथ कामकाज को ज्यादा प्रभावी बनाना है।

अमेरिका ने क्या सफाई दी?
अमेरिकी विदेश विभाग ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि पेशावर स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट को धीरे-धीरे बंद किया जाएगा और खैबर पख्तूनख्वा से जुड़े सभी राजनयिक काम इस्लामाबाद से किए जाएंगे। विभाग ने यह भी बताया कि यह फैसला सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर उपयोग को ध्यान में रखकर लिया गया है।
क्या है असल वजह?
दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया था। जिससे पाकिस्तान में रहने वाले शिया समुदाय के लोग भड़क गए और कराची स्थिति अमेरिकी कॉन्सुलेट पर 1 मार्च को हमला कर दिया। जिससे अमेरिकी राजनायिकों को तब से ही सुरक्षा की चिंता सता रही है। ऐसे में KPK जैसे इलाके, जो पहले से आतंकियों और उपद्रवियों के निशाने पर रहे हों वहां ये चिंता और बढ़ जाती है। ऐसे में अमेरिका को भी पाकिस्तान में अपनी सुरक्षा को लेकर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लिहाजा कोई बड़ी बात नहीं कि इसी वजह से फैसला लिया गया हो।
व्यापार पर क्या होगा असर?
अमेरिका ने कहने को तो कह दिया कि भले ही पेशावर में उसकी मौजूदगी कम होने के बावजूद पाकिस्तान को लेकर उसकी नीतिगत प्राथमिकताएं बिल्कुल नहीं बदलेंगी। लेकिन अमेरिका ने ये नहीं बताया कि पेशावर के जिन व्यापारियों को पूरा काम पेशावर से ही हो जाता था तो वह कितनी बार इस्लामाबाद एंबेसी के चक्कर लगा पाएंगे? साथ ही क्या एंबेसी में व्यापारियों को उतनी ही आसानी से एंट्री मिल जाएगी जितनी पेशावर के इस कॉन्सुलेट में मिल जाती थी। क्योंकि एंबेसी में पॉलिटिकल दखल और सुरक्षा 10 गुना ज्यादा होती है।
पाकिस्तान के बाकी शहरों से जारी रहेगा मिशन
अमेरिका ने अपने बयान में ये भी कहा कि वह पाकिस्तान में अपने अन्य राजनयिक ठिकानों-इस्लामाबाद, कराची और लाहौर के जरिए संबंधों को आगे बढ़ाता रहेगा। यानी पेशावर दूतावास बंद होने के बावजूद पूरे देश में अमेरिकी गतिविधियां जारी रहेंगी।
ईरान युद्ध के बीच फैसला आने का क्या मतलब?
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब Pakistan अमेरिका और Iran के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म कराने के लिए मध्यस्थता करने की कोशिश कर रहा है। इस वजह से क्षेत्र में तनाव और कूटनीतिक गतिविधियां दोनों बढ़ी हुई हैं। साथ ही यह पाकिस्तान को लिए एक संदेश है कि मध्यस्थता कराने से उन्हें कोई फायदा नहीं, होगा वही जो अमेरिका को ठीक लगेगा।
पाकिस्तान का इसमें क्या नुकसान?
पेशावर में बने इस कॉन्सुलेट के बंद होने से डायरेक्ट तो नहीं लेकिन पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान जरूर होगा। पेशावर और आस-पास के शहरों से इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट के लिए जो व्यापारी कॉन्सुलेट आसानी से चले आते थे, अब उनका आना काफी कम संख्या में होगा। लिहाजा पाकिस्तान जो भी मैन्युफैक्चरिंग कर रहा है उसे बचेना, डील करना और अपने लिए ऑप्शन तलाशना जैसे काम बहुत मुश्किल हो जाएंगे। जिसका असर पेशावर के आसपास के इलाके के इकॉनोमी पर सीधा पड़ेगा।
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