Mushroom Farming : जम्मू-कश्मीर में कुकुरमुत्ता की खेती से सक्सेस की प्रेरणा, कई युवाओं ने हासिल की कामयाबी

मशरूम की खेती (mushroom farming) से आर्थिक सुरक्षा हासिल की जा सकती है। जम्मू-कश्मीर में मशरूम यानी कुकुरमुत्ता की खेती कर कई युवाओं ने सफलता हासिल की है। इनकी सक्सेस प्रेरक है। आप भी जानिए मशरूम की खेती का सक्सेस मंत्रा

श्रीनगर, 16 मई : खेती-किसानी से जुड़े तमाम लोगों की आम चिंता मुनाफा और फसलों के मार्केट को लेकर होती है। आर्थिक चिंता को दूर करने के लिए मशरूम की खेती (mushroom farming) एक शानदार ऑप्शन है। मशरूम की खेती करने वाले किसानों की सफलता इंस्पायरिंग है। जम्मू-कश्मीर में कई युवाओं ने नौकरी करने के बजाय मशरूम की खेती शुरू करने का फैसला लिया और इसमें कामयाबी भी हासिल की।

mushroom

1200 रुपये प्रति किलो !
मशरूम यानी कुकुरमुत्ता की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा है। मार्केट में अच्छी मांग होने के कारण मशरूम की कीमत भी अच्छी मिलती है। सावन के महीने में मशरूम 1200 रुपये प्रति किलो तक भी बिकता है। झारखंड और छत्तीसगढ़ में इसे खुखरी भी कहते हैं। इस प्रेरक कहानी में हम बताएंगे कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, पुंछ, कुपवाड़ा, राजौरी और ऊधमपुर में युवाओं को मशरूम की खेती में कैसे मिली कामयाबी। पढ़िए और जानिए मशरूम की खेती का सक्सेस मंत्रा

स्कूल की नौकरी छोड़ मशरूम की खेती

स्कूल की नौकरी छोड़ मशरूम की खेती

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में रहने वाले 27 वर्षीय निसार अहमद गनी ने अर्थशास्त्र में ग्रैजुएशन कि डिग्री हासिल की। उन्होंने दो साल पहले इनकम के एक नए सोर्स की तलाश में अपनी नौकरी छोड़ दी कर मशरूम की खेती शुरू की। निसार बताते हैं कि 2018 में देहरादून से अर्थशास्त्र में ही मास्टर्स डिग्री पूरी की। इसके बाद अपने परिवार का आर्थिक समर्थन करने के लिए वापस कश्मीर लौट गए।

स्कूल की नौकरी छोड़ मशरूम की खेती
बकौल निसार जुलाई, 2018 में हंदवाड़ा के प्राइवेट स्कूल में नौकरी की, लेकिन इससे उनके परिवार की वित्तीय जरूरतें पूरी नहीं हो रही थीं। निसार बताते हैं कि उन्होंने स्कूल की नौकरी छोड़ दी और कुछ नया करने का फैसला लिया। आर्थिक रूप से मजबूत बनने और परिवार की मदद के लिए साल 2019 में निसार ने अपने गांव ब्रमरी कुपवाड़ा में कृषि विभाग द्वारा आयोजित मशरूम की खेती जागरूकता कार्यक्रम में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने मशरूम की खेती शुरू कर दी।

पांच क्विंटल से अधिक मशरूम
उन्होंने बताया कि तीन महीनों की ट्रेनिंग के बाद महज 40 दिनों में उन्होंने मशरूम की अच्छी उपज हासिल की। पहले सीजन में 2 क्विंटल से अधिक मशरूम का प्रोडक्शन हुआ। अच्छी खासी कमाई के बाद मशरूम की खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित हुए निसार अभी पांच क्विंटल से भी अधिक मशरूम उपजा रहे हैं।

उपराज्यपाल से मिला अवॉर्ड, दो लाख तक की आमदनी

उपराज्यपाल से मिला अवॉर्ड, दो लाख तक की आमदनी

जम्मू-कश्मीर के एक अन्य युवा राजौरी जिले में मशरूम की खेती कर रहे हैं। डूंगी ब्लॉक के युवा किसान कार्तिक कुमार शर्मा ने को जैविक मशरूम की खेती (organic mushroom farming) के लिए 'राजौरी जिले में सर्वश्रेष्ठ किसान' का पुरस्कार भी मिल चुका है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल, मनोज सिन्हा (JK LG Manoj Sinha mushroom farming award) ने कार्तिक को अवॉर्ड दिया था।


दो लाख तक की आमदनी
कार्तिक के मुताबिक कृषि विज्ञान केंद्र, राजौरी की ओर से बागवानी में बेसिक ट्रेनिंग लेने के बाद, उन्होंने मशरूम उगाने के लिए वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल किया। बीज और अन्य चीजों में कृषि विज्ञान केंद्र से बहुत मदद मिली। उन्होंने बताया, जैविक रूप से मशरूम की खेती के लिए उन्होंने सात लोगों को खुद प्रशिक्षित किया है। बकौल कार्तिक, यह चार महीने की फसल है। यदि आप 70-80 हजार का निवेश करते हैं, तो तीन से चार महीने बाद इसकी फसल से लगभग 2 लाख रुपये तक की आमदनी हो सकती है।

कार्तिक की तरह और भी युवा करें खेती
जनवरी, 2021 में बेस्ट फार्मर अवॉर्ड पर कार्तिक शर्मा ने कहा था, भावनाओं को शब्दों में बयां करना नामुमकिन है. उपराज्यपाल से हाथ मिलाना बड़ी बात है. राजौरी के मुख्य कृषि अधिकारी महेश वर्मा ने कार्तिक को दूसरे युवाओं के लिए उदाहरण करार दिया था। उन्होंने कहा था, ऐसे बेरोजगार युवा, जिनके पास सब्जियां और जैविक मशरूम उगाने के लिए जमीन हो, वे कार्तिक की तरह मशरूम की खेती से जुड़ सकते हैं।

इंजीनियर से मशरूम किसान बने राकेश शर्मा

इंजीनियर से मशरूम किसान बने राकेश शर्मा

कोरोना महामारी (COVID-19) से प्रभावित कई लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। ऐसे ही एक शख्स जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में हैं। लॉकडाउन के कारण आजीविका प्रभावित होने के बाद इस इंजीनियर ने जिला अधिकारियों की मदद से मशरूम की खेती शुरू की। इंजीनियर से मशरूम किसान बने राकेश शर्मा बताते हैं कि उन्हें COVID-19 लॉकडाउन के कारण घर आने के लिए मजबूर होना पड़ा। इंजीनियर की नौकरी छूट गई और जीवन यापन के लिए संघर्ष का दौर शुरू हो गया।

'आत्मनिर्भर भारत' के आह्वान से प्रेरित
उन्होंने बताया कि मशरूम फार्म शुरू करने का मुख्य उद्देश्य जीवन में कुछ बेहतर करना और रोजगार के अवसर पैदा करना था। उन्होंने कहा कि उनके आस-पास के लोगों के पास काम नहीं है। बकौल राकेश शर्मा, घाटी में बेरोजगारी व्याप्त है। ऐसे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल से प्रेरणा लेकर मशरूम की खेती शुरू कर दी।

घर के अंदर उगाएं मशरूम, स्वरोजगार का अच्छा अवसर

घर के अंदर उगाएं मशरूम, स्वरोजगार का अच्छा अवसर

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में कृषि विभाग की पहल पर मशरूम की खेती शुरू की गई। इससे जुड़े लोगों को सफलता भी मिल रही है। पुंछ के झालास गांव में मशरूम की खेती के बारे में कृषि विकास सहायक जसबीर सिंह के अनुसार मशरूम विकास केंद्र स्थापित किया गया है। इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य स्थानीय लोगों को मशरूम की खेती के प्रति जागरूक करना है, जिससे स्वरोजगार का अवसर पैदा हो सके। उन्होंने बताया कि सरकार स्थानीय किसानों को सही तरीके से खाद बनाना, मशरूम की कटाई और कुकुरमुत्ता की खेती की बारीकियां सिखाती है। उन्होंने बताया कि हम लोगों को यह भी सिखाते हैं कि फसल को कैसे उगाना है। कैसे इससे मुनाफा कमाना है।

घर के अंदर होती है खेती, मौसम का असर कम
बकौल जसबीर सिंह, मशरूम की खेती आसानी से की जा सकती है। इसे घर के ही उपजाया जा सकता है। इसके लिए ज्यादा जमीन की भी जरूरत नहीं। उन्होंने बताया कि इनडोर मशरूम फार्मिंग के कारण बारिश और धूप जैसे प्राकृतिक कारकों से मशरूम की खेती काफी हद प्रभावित नहीं होती। उन्होंने कहा, कई लोगों को स्पॉनिंग के लिए बीज दिए गए हैं ताकि वे खुद अपने स्तर पर ही मशरूम की खेती आगे बढ़ा सकें। यह स्वरोजगार का एक अच्छा अवसर है।

70 हजार से अधिक की आमदनी

70 हजार से अधिक की आमदनी

जम्मू-कश्मीर में कई स्थानीय किसान मशरूम की खेती सीखने की शुरुआत कर चुके हैं। मशरूम की खेती से अच्छी कमाई से प्रेरित युवा पढ़ाई के लिए पैसों का इंतजाम करने के लिए मशरूम फार्मंग के लिए बनाए गए सेंटर पर काम करते हैं। पुंछ जिले के झालास कृषि केंद्र पर सहायक के रूप में काम कर रहे रूम लाल पिछले 15 वर्षों से मशरूम उगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मशरूम की खेती क्षेत्र काफी आकर्षक है क्योंकि इसमें कम निवेश की आवश्यकता होती है और रिटर्न भरपूर होता है।

70 हजार से अधिक की आमदनी
एक अन्य मशरूम किसान अमरीक सिंह का दावा है कि मशरूम विकास केंद्र से ट्रेनिंग लेने के बाद हर फसल से उन्हें 70,000 रुपये से अधिक की आमदनी हो जाती है। उन्होंने बताया, अपना मशरूम शेड खोलने के लिए, सरकार से 75 प्रतिशत सब्सिडी भी मिली। हर सीजन में 70,000 रुपये से अधिक कमा लेते हैं।

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