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Aromatic Plant Farming : सुगंधित पौधों की खेती कर रही 'फैबुलस फाइव' की टीम, जानें 5 दोस्तों की सक्सेस स्टोरी

सुगंधित पौधों की खेती से अच्छे पैसे कमाए जा सकते हैं। अरोमा मिशन के तहत सरकार भी सुगंध वाले पौधों की खेती को बढ़ावा दे रही है। जम्मू-कश्मीर के बाद अब हरियाणा में कुछ किसानों ने सुगंधित पौधों की खेती शुरू कर सफलता पाई है।

पानीपत, 04 जून : सुगंधित पौधों की खेती (aromatic plant farming) किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बनती जा रही है। जम्मू कश्मीर में अरोमा मिशन के तहत लैवेंडर की सफल खेती दूसरे राज्यों के किसानों को भी इंस्पायर कर रही है। हरियाणा के पानीपत में पांच दोस्तों ने सुगंधित पौधों की खेती शुरू की है। पानीपत के दोस्तों की अरोमेटिक फार्मिंग दूसरे राज्यों में भी अरोमेटिक प्लांट्स यानी खुशबूदार पौधों की खेती के लिए किसानों को प्रेरित कर सकती है। पढ़िए, हरियाणा के इन युवा किसानों की सक्सेस स्टोरी

aroma farming

हरियाणा में इन युवा किसानों की सफलता को देखते हुए अगर फैबुलस फाइव कहा जाए तो गलत नहीं होगा। सुगंधित पौधों की खेती कर रहे पांच किसान दोस्तों ने अपने खेतों में तुलसी, पुदीना, गुलाब और मेंथा जैसे सुगंधित पौधों की रोपाई कर हजारों रुपये की बचत की है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन किसानों का कहना है कि सुगंधित पौधों से बनने वाले तेल की मार्केट डिमांड काफी अच्छी है, ऐसे में उन्हें बढ़िया मुनाफा हो रहा है।

50 हजार रुपये का मुनाफा

पौधों और इनके पत्तों से बनने वाले तेल को बाजार में बेचकर हजारों रुपये का मुनाफा कमा रहे किसानों का कहना है कि एक एकड़ में सुगंधित पौधों की खेती की लागत लगभग 20 हजार रुपये है। इससे लगभग 70 हजार रुपये का मुनाफा होता है। आमदनी से सारे खर्चे निकालने के बाद इन किसानों को लगभग 50 हजार रुपये का मुनाफा हो रहा है।

पानीपत में अरोमेटिक फार्मिंग से प्रेरणा

किसानी में सफलता के झंडे गाड़ने वाली दोस्तों की इस टीम की सुगंधित पौधों की यात्रा उस समय शुरू हुई जब पारंपरिक खेती में नुकसान हुआ। कृषिजागरण डॉटकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक इन युवा किसानों के नाम विनोद, मिठन लाल सैनी, बलिंद्र कुमार, अशोक, राजेश हैं। इन दोस्तों से इंस्पायर होकर आसपास के किसानों ने भी सुगंधित पौधों की खेती शुरू की है।

गौरतलब है कि अरोमेटिक प्लांट की खेती में संभावनाओं को देखते हुए भारत सरकार सीएसआईआर मिशन अरोमा (CSIR Mission Aroma) स्कीम के तहत खुशबू वाले पौधों की खेती को बढ़ावा दे रही है। इन्ही कोशिशों के तहत गत मई में देश का पहला लैवेंडर फेस्टिवल आयोजित किया गया था। जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर हो रही लैवेंडर फार्मिंग और लैवेंडर फूल के बैंगनी रंग के आधार पर इसे पर्पल रिवॉल्यूशन भी कहा गया।

मिशन अरोमा से जुड़ रहे युवा

जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में लैवेंडर प्लांट की खेती (Lavender plant cultivation) के अलावा गुलाब और अन्य सुगंधित पौधों की खेती भी की जा रही है। इन सुगंधित पौधों का औषधीय महत्व भी है। ऐसे में अरोमेटिक प्लांट उपजाने वाले युवाओं के लिए अरोमा फार्मिंग रोजगार का भी श्रोत है। सुगंधित पौधों की खेती में इंटरेस्ट रखने वाले युवा सीएसआईआर मिशन अरोमा से जुड़ रहे हैं।

फूलों के उत्पाद की मार्केट डिमांड

सरकार युवाओं सुगंधित पौधों का महत्व बताने के साथ-साथ मार्केट डिमांड के बारे में भी जागरुक कर रही है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट में पुलवामा में सुगंधित पौधे- लैवेंडर की खेती कर रहे मोहम्मद अयूब के मुताबिक लैवेंडर फ्लावर की प्रोसेसिंग के बाद इसका तेल 10,000 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।

ये भी पढ़ें- Lavender Farming : 10 हजार प्रति किलो बिकता है ये तेल, किसानों के लिए शानदार विकल्प

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