Farming में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल घातक! इंसानों की सेहत और इम्युनिटी खतरे में
Farming में रसायन और दवाओं का इस्तेमाल नई बात नहीं। हालांकि, इस बार वैज्ञानिकों ने बताया है कि पशुपालन में एंटीबायोटिक का इस्तेमाल 'मानव प्रतिरक्षा प्रणाली' यानी इम्युनिटी को खतरे में डाल रहा है।

Farming में प्राकृतिक तरीके और संसाधनों की अनदेखी कर मुनाफा कमाने की होड़ में लगे लोगों को वैज्ञानिकों ने आगाह किया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पशुपालन में एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल का सेहत पर बेहद खराब असर हो रहा है।
रिसर्च के दौरान ऐसे बैक्टीरिया सामने पाए गए हैं जो इंसान की इम्युनिटी को कमजोर बना रहे हैं। गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, शोध से पता चला है कि रोगाणुरोधी कोलिस्टिन (antimicrobial colistin) का दशकों तक इस्तेमाल किया गया।

चीन में सुअर और चिकन फार्मों में antimicrobial colistin का बहुत अधिक इस्तेमाल हुआ। इसके नतीजा ऐसा हुआ कि ई कोलाई (E Coli) स्ट्रैन डेवलप होने लगे। ये हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा दे सकता है, इस बात की अधिक संभावना है।
कोलिस्टिन के दुष्प्रभाव को देखते हुए चीन और कई अन्य देशों में पशुधन के आहार के रूप में इसका इस्तेमाल प्रतिबंधित कर दिया गया है। बैन के बावजूद वैज्ञानिकों ने एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक उपयोग बेहद खतरनाक है। इनका इस्तेमाल सेहत के लिए खतरे की घंटी है।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में शोध का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर क्रेग मैकलीन के अनुसार, पशुपालन में दवाओं का इस्तेमाल संभावित रूप से एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोध से कहीं अधिक खतरनाक है।

कीटनाशक के अंधाधुंध उपयोग के खतरों का अंदाजा इसी से होता है कि मोटी मुर्गियां पाने के लिए गलती से हमने अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्युनिटी से समझौता कर लिया है।
कोलिस्टिन को रोगाणुरोधी पेप्टाइड्स (Antimicrobial Peptides; AMPs) इसी ग्रुप में नई एंटीबायोटिक दवाएं डेवलप हो रही हैं। इनकी स्टडी से पता चला है कि ऐसी दवाओं के इस्तेमाल से सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रतिरक्षा से समझौते का जोखिम पैदा हो सकता है।

एएमपी इम्युनिटी के लिहाज से अहम है। संक्रमण से बचाव में मदद मिलती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, कोलिस्टिन जीवाणु एएमपी पर आधारित है। गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार, 1980 के दशक से पशुधन में कोलिस्टिन के व्यापक उपयोग के कारण कोलिस्टिन प्रतिरोध जीन वाले ई कोलाई बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ी।
खतरों को देखते हुए Farming में इस दवा के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया। अध्ययन के अनुसार, ई कोलाई बैक्टीरिया में कोलिस्टिन जीन होता है। इस कारण रोग का कारण बनने वाले बैक्टीरिया एएमपी को अधिक आसानी से चकमा दे देते हैं।

न्यूयॉर्क में मोहॉक वैली हेल्थ सिस्टम के डॉ जॉर्ज टेगोस ने बताया, एएमपी के संभावित जोखिमों के बारे में व्यापक निष्कर्ष भले ही केवल एक अध्ययन से नहीं निकाले जा सकते, लेकिन निष्कर्ष से चिंता जरूर होती है। ये उचित हैं और समझ में भी आती हैं।
एलायंस टू सेव अवर एंटीबायोटिक्स के सलाहकार कोइलिन नूनन ने कहा, "नया अध्ययन दिखाता है कि कॉलिस्टिन प्रतिरोध शायद पहले की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक है ... यह भी उल्लेखनीय है कि ब्रिटिश सरकार अभी भी इस निवारक दवा के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का विरोध कर रही है।
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एंटीबायोटिक दवाओं के नुकसान को भांपते हुए यूरोपीय संघ ने एक साल पहले ही इस तरह के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में शोध का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर क्रेग मैकलीन ने कहा, अगर बैक्टीरिया AMP आधारित दवाओं से बच निकलें तो इम्युनिटी कमजोर हो सकती है।

उन्होंने कहा, ई कोलाई संक्रमण के जोखिम से सेप्सिस और मृत्यु तक हो सकते हैं। चीन में ई कोलाई की रिपोर्ट में तेजी से गिरावट आई है, क्योंकि चीन में कॉलिस्टिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। डॉक्टरों ने मामना है कि इससे "फिटनेस को नुकसान" होता है।
अध्ययन के दौरान एमसीआर-1 नामक एक प्रतिरोध जीन वाले ई कोलाई को एएमपी के संपर्क में लाया गया। ये जीन मुर्गियों, सूअरों और मनुष्यों में जन्मजात प्रतिरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानव रक्त सीरम के लिहाज से बैक्टीरिया संवेदनशील था। ऐसे में बैक्टीरिया का भी परीक्षण किया गया।













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