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माणिक्य धारण करने से लाभ होगा या हानि?

सूर्य के प्रथम भाव में होने पर माणिक्य रत्न पहने से शुभ व अशुभ दोनों प्रकार फल प्राप्त होते है।

लखनऊ। यदि सूर्य आपकी कुण्डली में प्रथम भाव में बैठा है तो उसकी सप्तम दृष्टि सातवें भाव पर पड़ती है। सातवॉ भाव जीवन साथी से सम्बन्धित होता है। इसलिए जातक के वैवाहिक सुख में बाधा आती है एंव स्वयं को क्रेाध भी आता है।

किन्तु यह सूर्य आपके मान-सम्मान एंव पद-प्रतिष्ठा प्राप्त कराने में सहायक भी होता है। सूर्य के प्रथम भाव में होने पर माणिक्य रत्न पहने से शुभ व अशुभ दोनों प्रकार फल प्राप्त होते है।

आइये जानते है कि किस लग्न के जातक को माणिक्य पहनने से लाभ होगा एंव किसको हानि ?

पंचम भाव बुद्धि, विद्या व सन्तान

पंचम भाव बुद्धि, विद्या व सन्तान

  • मेष लग्न: इस लग्न में सूर्य पंचम भाव का स्वामी होकर लग्न में बैठा है। पंचम भाव बुद्धि, विद्या व सन्तान का कारक है। अतः माणिक्य धारण करने से बुद्धि, विद्या व धन लाभ होगा।
  • वृष लग्न: इसमें सूर्य चौथे भाव का मालिक होकर लग्न स्थान में बैठा है। चौथा भाव वाहन, मकान, माता, जायदाद व सुख आदि का होता है। माणिक्य पहनने से इन सब चीजों का सुख मिलेाग।
  • मिथुन लग्न: इस कुण्डली में सूर्य तृतीयेश होकर लग्न में स्थित है। तृतीय भाव साहस व पराक्रम का होता है। सूर्य के लग्न में होने से जातक अद्धभुत पराक्रम की क्षमता रखता है। वह बड़े-बड़े कार्यो को अपने हाथ में ले लेता है। अतः ऐसे व्यक्ति को कामयाब होने के लिए माणिक्य पहनना लाभप्रद साबित होता है।
  • परिवार व ससुराल में सम्मान

    परिवार व ससुराल में सम्मान

    • कर्क लग्न: इस कुण्डली में सूर्य दूसरे घर का मालिक होता है। दूसरा भाव वाणी, परिवार, ससुराल व प्रोफेशनल शिक्षा का कारक होता है। माणिक्य पहने से नौकरी में प्रमोशन, शिक्षा में सफलता, परिवार व ससुराल में सम्मान, वाणी में गजब का निखार व धन की प्राप्ति होती है।
    • सिंह लग्न: इस जन्मपत्री में सूर्य लग्नाधिपति होकर लग्न में ही बैठा है। माणिक्य पहनने से दीर्घायु, शरीर में निरोगता, धन-धान्य में वृद्धि होती है एंव जातक कुलदीपक होकर परिवार का नाम रोशन करता है।
    • कन्या लग्न: सूर्य 12वें भाव का मालिक होकर लग्न में बैठा है। बारहवॉ भाव व्यय, अस्पताल का, ऑख का, नींद का होता है। अतः इस लग्न वाले जातकों को माणिक्य नहीं धारण करना चाहिए अन्यथा खर्चो में वृद्धि होती है, आस्पताल का आना-जाना लगा रह सकता है और नींद आदि में कमी आ सकती है।
    • लाभ व मित्रता से सम्बन्धित

      लाभ व मित्रता से सम्बन्धित

      • तुला लग्न-इस लग्न में सूर्य 11वें भाव का मालिक रहेगा। 11वें भाव लाभ व मित्रता से सम्बन्धित होता है। अतः माणिक्य धारण करने से मित्रों के साथ सम्बन्ध अच्छे होते है एंव हर प्राकर लाभ की सम्भावना बढ़ती है।
      • वृश्चिक लग्न-इस कुण्डली में सूर्य दसवें भाव का स्वामी रहेगा। दसवॉ भाव राजनति, पद-प्रतिष्ठा, जीविका आदि का कारक होता है। इसलिए माणिक्य पहनने से सरकारी नौकरी मिल सकती है, सरकारी ठेके मिल सकते है, राजनीति में सफलता मिल सकती है व कुछ लोगों को उच्च पद की प्राप्ति हो सकती है।
      • धनु लग्न-इस कुण्डली में सूर्य भाग्येश होकर प्रथम भाव में बैठा है। अतः माणिक्य धारण धर्म-कर्म में रूचि बढ़ेगा, विदेश की यात्रा करने का सौभाग्य प्राप्त होगा, भाग्य पक्ष में मजबूती आयेगी, व पिता के सम्बन्धों में मधुरता आयेगी।
      • माणिक्य धारण करना लाभप्रद नहीं

        माणिक्य धारण करना लाभप्रद नहीं

        • मकर लग्न-इस कुण्डली में सूर्य अष्टमेश होने के कारण अशुभ हो जाता है। इसलिए माणिक्य धारण करना लाभप्रद नहीं। माणिक्य पहनने से शरीर में रोग बढ़ते है एंव ससुराल पक्ष से रिश्ते खराब होते है।
        • कुम्भ लग्न-सूर्य सप्तमेश होने के कारण मारक हो जाता है। किन्तु प्रथम भाव में होने से सप्तम स्थान पर दृष्टि पड़ती है जिससे पति-पत्नी के सुख में वृद्धि होती है। केन्द्र का मालिक होने से सूर्य शुभ हो जाता है। अतः माणिक्य पहनना लाभप्रद है।
        • शत्रु व विरोधियों का होता है

          शत्रु व विरोधियों का होता है

          मीन लग्न- इस कुण्डली में सूर्य षष्ठेश होकर लग्न भाव पर कब्जा किये हुये है। छठा भाव रोग, शत्रु व विरोधियों का होता है। माणिक्य पहनने से रोग में वृद्धि होगी व शत्रुओं का आतंक बढ़ेगा इसलिए इस कुण्डली वाले जातक माणिक्य न धारण करें।

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