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भरत मिलाप मंदिर: जहां भाइयों का प्रेम देख पिघल गए थे पत्थर, आज भी दिखते हैं श्रीराम के पैरों के निशान

राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। प्राण प्रतिष्ठा से जुड़े अनुष्ठान भी शुरू हो गए हैं। 22 जनवरी को भव्य आयोजन के बीच रामलला के उत्सव मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान राम ने जन्म लिया था।

रामायण के अनुसार भगवान राम से जुड़े स्थान भारत और इसके पड़ोसी देश नेपाल और श्रीलंका में स्थित हैं। हमने आपको कई प्रसिद्ध राम मंदिरों के बारे में बताया। वैसे मंदिर जिनका राम से कोई संबंध हो या अपने अवतार के वक्त श्री राम ने वहां समय व्यतीत किया हो। आज इस कड़ी में हम आपको बताने वाले हैं उस मंदिर के बारे में जहां वनवास के दौरान भरत अपने भ्राता श्री राम से मिले थे और जहां उन्होंने श्री राम के वापस लौटने का इंतजार किया था।

Bharat Milap Mandir

भरत मिलाप मंदिर
ये मंदिर स्थित है मध्य प्रदेश के चित्रकूट में। मानो ये मंदिर चित्रकूट की पहचान सा बन गया हो। चित्रकूट यानी भरत मिलाप मंदिर। पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार चित्रकूट में जहां भरत मिलाप मंदिर स्थित है उसी स्थान पर श्री राम अपने अनुज भरत से वनवास के दौरान मिले थे। मान्यताओं के अनुसार जब राम को वनवास हुआ था तब भरत और शत्रुघ्न अयोध्या में नहीं थे।

जब दोनों भाई वापस लौटे तब वो भगवान राम को मना कर वापस लाने पहुंचे। यहां लंबे समय के बाद भगवान राम अपने छोटे भाई भरत और शत्रुघ्न से मिले। तब से ये स्थान 'भरत मिलाप' यानी की भगवान राम और भरत के मिलन के लिए जाना जाता है।

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मान्यताओं के अनुसार भरत अपनी सेना, शाही परिवार और प्रजा के साथ कुछ समय तक रहे थे। इसी स्थान से श्री राम पादुका लेकर भगवान राम के अनुपस्थिति में राज्य चलाया था। ऐसा भी कहा जाता है कि भरत ने श्री राम को वापसी तक यहां वनवासी की तरह जीवन बिताया था।

यहां के पत्थर पिघले हुए लगते हैं
श्री रामचरितमानस के अयोध्या कांड में जैसा गोस्वामी तुलसीदास ने भरत मिलाप के स्थान का उल्लेख किया है ठीक वैसा ही कुछ दृश्य चित्रकूट में नजर आता है। यहां के पत्थर पिघले हुए से प्रतीत होते हैं। तुलसीदास जी ने लिखा है, "द्रवहिं बचन सुनि कुलिस पषाना। पुरजन प्रेमु न जाइ बखाना। बीच बास करि जमुनहीं आए। निरखि नीरू लोचन जल छाए।" यानी जब भरत श्री राम को मनाने चित्रकूट जा रहे थे तो मार्ग के पत्थर भी पिघल गए थे।

भरत मिलाप मंदिर में श्री राम के चरण चिन्ह स्थित हैं। ऐसी मान्यता है कि चित्रकूट की इस पहाड़ी की परिक्रमा करने से सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

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