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Raja Ram Temple Orchha: देश की दूसरी अयोध्या, जहां राजा के रूप में पूजे जाते हैं रामलला

Raja Ram Temple, Orchha, MP:मध्य प्रदेश के महलों के शहर ओरछा को दूसरी अयोध्या के रूप में भी जाना जाता है। बेतवा नदी के तट पर स्थित है इस शहर में राजा राम का भव्य मंदिर है। माना जाता है कि यह एकलौता मंदिर है जहां भगवान राम की पूजा राजा के रूप में की जाती है। अयोध्या के रामलला और ओरछा के राजा राम हमेशा चर्चा में रहते हैं।

अयोध्या से करीब साढ़े चार सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है मध्य प्रदेश का ओरछा। कहने को दोनों स्थानों के बीच मीलों की दूरी है लेकिन दोनों ही जगहों के बीच गहरा संबंध है। यहां रामलला के राजा राम बनने की एक बेहद दिलचस्प कहानी है।

orchha dham

16वीं शताब्दी के दौरान ओरछा के बुंदेला शासक मधुकर शाह का शासन था। राजा कृष्ण भक्त थे वहीं उनकी महारानी कुंवरि गणेश राम भक्त थी। एक बार की बात है, राजा मधुकर शाह ने रानी को वृंदावन जाने का प्रस्ताव दिया लेकिन उन्होंने वृंदावन की जगह अयोध्या जाने की जिद पकड़ ली। इस बात पर रुष्ट होकर राजा ने रानी पर व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर तुम्हारे राम सच में हैं तो उन्हें अयोध्या से ओरछा लाकर दिखाओ।

इस बात पर रानी ने ठान ली कि वो राम को अयोध्या से ओरछा ला कर रहेंगी। स्थानीय लोगों की मान्यता और पौराणिक कथाओं के अनुसार रानी अयोध्या पहुंची और भगवान राम के दर्शन के लिए कड़ी तपस्या की। लेकिन उन्हें भगवान राम के दर्शन नहीं हुए। निराश होकर रानी ने अपना जीवन त्यागने की ठान ली। जल से भरी सरयू नदी में रानी ने छलांग लगा दी। लेकिन रानी के नदी में कूदते ही नदी का जल घटकर घुटने तक रह गया। तब रानी ने कहा कि ना तो दर्शन देते हो ना मरने देते हो। इसके बाद भगवान ने उन्हें विष्णु के रूप में दर्शन दिए।

रानी ने कहा मुझे कोई युद्ध थोड़ी ही कराना है जो आप चक्र, गदा आदि लेकर पधारे हो। छोटे बालक का रूप लेकर मेरी गोदी में आ जाओ और मेरे साथ ओरछा चलो। भगवान ने कहा मैं चलने के लिए तैयार हूं लेकिन मेरी तीन शर्ते हैं। भगवान ने पहली शर्त रखी कि वो पुष्य नक्षत्र में रानी के साथ चलेंगे, दूसरी शर्त थी कि भगवान राम को रानी जहां बैठा लेंगी वो वहां से उठेंगे नहीं। भगवान ने तीसरी शर्त रखी कि वो ओरछा में रामलला बनकर नहीं राजा राम बनकर जाएंगे।

यह भी देखें: Ayodhya Ram Mandir: PM मोदी ने भगवान राम और राम जन्मभूमि सहित जारी किए 6 डाक टिकट

अंततः रानी भगवान राम को लेकर साधु-संतों और गाजे बाजे के साथ ओरछा पहुंची। ये देख राजा बहुत प्रभावित हुए। भगवान राम के लिए भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि रानी के मन में लोभ आ गया कि वो अपने शयन कक्ष से ही भगवान के दर्शन कर सकें इसलिए उन्होंने मंदिर का द्वार अपने कक्ष के द्वार के ठीक सामने बनवाया। मंदिर का काम अधूरा था और भगवान राम ने रानी के लोभ को तोड़ने के लिए उनकी मती फिरा दी। रानी ये भूल गईं कि जहां एक बार भगवान राम बैठ जाएंगे वहां से उठेंगे नहीं।

मंदिर का काम बाकी रहने की वजह से रानी ने अपने महल के सबसे पवित्र स्थान, अपनी रसोई में भगवान को कुछ देर के लिए बिठा दिया। लेकिन भगवान अपनी शर्त के अनुसार वहां से नहीं उठे। इस प्रकार रानी का अपने कक्ष से भगवान के दर्शन करने का लालच भी समाप्त हो गया। तब से भगवान राम रानी के रसोई में विराजमान राजा राम के रूप में पूजे जा रहे हैं।

यह भी देखें: Ram Mandir Construction: वे पत्थर और शिलाएं जिनसे निखरा अयोध्या का भव्य राम मंदिर

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