CyberDost से दोस्ती देगी डिजिटल सुरक्षा? डीपफेक-फेक ऐप्स से बचने के लिए सरकार का शानदार प्लान
CyberDost: भारत में डिजिटल दुनिया तेजी से बढ़ रही है। अब हर घर तक इंटरनेट की पहुंच है और लोग ऑनलाइन काम कर रहे हैं, लेन-देन कर रहे हैं और सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे से जुड़े हैं। लेकिन इस डिजिटल क्रांति के साथ ही साइबर अपराधों में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। धोखाधड़ी अब सिर्फ छोटे स्तर पर नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर तकनीकी तरीके से होने लगी है।
डीपफेक वीडियो, फेक ऐप्स, और सोशल मीडिया फर्जीवाड़ों ने लोगों की सुरक्षा को चुनौती दे दी है। ऐसे में गृह मंत्रालय ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कई पहलें शुरू की हैं। जैसे कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, हेल्पलाइन नंबर, और पुलिस अधिकारियों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण। अब जागरूकता, तकनीक और त्वरित प्रतिक्रिया के जरिए भारत को एक सुरक्षित डिजिटल देश बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

साइबर फ्रॉड की संख्या में बड़ी तेजी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 में साइबर अपराध के 10.29 लाख मामले दर्ज हुए थे, जो 2024 तक बढ़कर 22.68 लाख हो गए। वहीं, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर फरवरी 2025 तक कुल ₹36.45 लाख के ऑनलाइन फ्रॉड रिपोर्ट किए गए।
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तकनीकी हथकंडों से बढ़ती धोखाधड़ी
साइबर अपराधी अब फ़िशिंग, स्पूफिंग और डीपफेक जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर नागरिकों को ठग रहे हैं। हाल ही में बेंगलुरु की एक 57 वर्षीय महिला ने ₹3.75 करोड़ का नुकसान झेला, जब उन्होंने एक डीपफेक वीडियो में दिखाए गए "साधगुरु" के निवेश प्लेटफॉर्म में पैसा लगाया।
इसी तरह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के डीपफेक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें उन्हें सरकारी निवेश योजना का समर्थन करते दिखाया गया। हैदराबाद के एक 25 वर्षीय युवक ने भी फेक ट्रेडिंग ऐप में ₹12.5 लाख गंवा दिए। ये मामले दिखाते हैं कि साइबर फ्रॉड अब बहुत ही परिष्कृत और संगठित हो गया है।
MHA की कड़ी कार्रवाई और नए प्लेटफॉर्म
इन खतरों से निपटने के लिए MHA ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के तहत बहु-स्तरीय साइबर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है।
- रिपोर्टिंग पोर्टल: नागरिक NCRP (www.cybercrime.gov.in) पर ऑनलाइन फ्रॉड, पहचान चोरी और महिलाओं व बच्चों पर होने वाले अपराध की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- हेल्पलाइन: 1930 नंबर पर तुरंत मदद मिलती है, ताकि बैंक और अधिकारियों द्वारा फर्जी लेनदेन रोक सकें।
- अधिकारियों को प्रशिक्षण: 1,05,796 पुलिस अधिकारी CyTrain प्लेटफॉर्म पर साइबर अपराध की जांच का प्रशिक्षण ले चुके हैं और अब तक 82,704 सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं।
विभिन्न मंत्रालयों का सहयोग
साइबर खतरे कई क्षेत्रों में फैलते हैं। इसलिए MHA दूरसंचार विभाग (DoT) और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर रोकथाम पर काम कर रही है।
DoT का Financial Fraud Risk Indicator (FRI) सिस्टम संदिग्ध नंबरों को पहचानकर Medium, High या Very High Risk में बांटता है। इससे बैंक और टेलीकॉम कंपनियां फर्जी नेटवर्क को पहले ही ब्लॉक कर सकती हैं।
जागरूकता: सबसे बड़ी रक्षा
तकनीक जरूरी है, लेकिन सबसे मजबूत सुरक्षा नागरिकों की जागरूकता है।
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- OTP और निजी जानकारी साझा न करें।
- सोशल मीडिया पर आने वाले निवेश ऑफ़र पर भरोसा न करें।
RBI और SEBI भी फेक ट्रेडिंग ऐप्स और गलत ऑनलाइन विज्ञापनों के खिलाफ लगातार चेतावनी जारी कर रहे हैं। CyberDost पहल के तहत आम लोगों को सरल तरीके से साइबर धोखाधड़ी से बचने की जानकारी दी जाती है।
सुरक्षित डिजिटल भारत की दिशा में
सरकार का लक्ष्य सिर्फ साइबर अपराधियों को पकड़ना नहीं है, बल्कि डिजिटल सतर्कता की संस्कृति बनाना भी है। बेहतर रिपोर्टिंग, रियल टाइम प्रतिक्रिया और प्रशिक्षण के जरिए MHA यह सुनिश्चित कर रही है कि नागरिक भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था में सुरक्षित रहकर भाग ले सकें।
नागरिक सतर्क रहें, ऑनलाइन सुरक्षित रहें।
शिकायत दर्ज करने के लिए 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर जाएं।
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