Chander Dev Chalisa: पूर्णिमा के दिन जरूर करें इस चालीसा का पाठ, बन जाएंगे बिगड़े काम
Chander Dev Chalisa: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है, जिससे मन, बुद्धि और भावनाओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए दान-पुण्य, जप-तप और पूजा का कई गुना फल प्राप्त होता है लेकिन पूर्णिमा की पूजा तब तक अधूरी है, जब तक कि चंद्रदेव की चालीसा ना की जाए। हर पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव की चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए इससे मन को शीतलता की प्राप्ति होती है और साथ ही इंसान को यश भी मिलता है।

चंद्रदेव चालीसा
- शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूं प्रणाम।
- उपाध्याय आचार्य का, ले सुखकारी नाम।।
- सर्व साधु और सरस्वती, जिन मंदिर सुखकर।
- चन्द्रपुरी के चन्द्र को, मन मंदिर में धार।।
।। चौपाई ।।
- जय-जय स्वामी श्री जिन चन्दा, तुमको निरख भये आनन्दा।
- तुम ही प्रभु देवन के देवा, करूँ तुम्हारे पद की सेवा।।
- वेष दिगम्बर कहलाता है, सब जग के मन भाता है।
- नासा पर है द्रष्टि तुम्हारी, मोहनि मूरति कितनी प्यारी।।
- तीन लोक की बातें जानो, तीन काल क्षण में पहचानो।
- नाम तुम्हारा कितना प्यारा , भूत प्रेत सब करें निवारा।।
- तुम जग में सर्वज्ञ कहाओ, अष्टम तीर्थंकर कहलाओ।।
- महासेन जो पिता तुम्हारे, लक्ष्मणा के दिल के प्यारे।।
- तज वैजंत विमान सिधाये , लक्ष्मणा के उर में आये।
- पोष वदी एकादश नामी , जन्म लिया चन्दा प्रभु स्वामी।।
- मुनि समन्तभद्र थे स्वामी, उन्हें भस्म व्याधि बीमारी।
- वैष्णव धर्म जभी अपनाया, अपने को पण्डित कहाया।।
- कहा राव से बात बताऊं , महादेव को भोग खिलाऊं।
- प्रतिदिन उत्तम भोजन आवे , उनको मुनि छिपाकर खावे।।
- इसी तरह निज रोग भगाया , बन गई कंचन जैसी काया।
- इक लड़के ने पता चलाया , फौरन राजा को बतलाया।।
- तब राजा फरमाया मुनि जी को , नमस्कार करो शिवपिंडी को।
- राजा से तब मुनि जी बोले, नमस्कार पिंडी नहिं झेले।।
- राजा ने जंजीर मंगाई , उस शिवपिंडी में बंधवाई।
- मुनि ने स्वयंभू पाठ बनाया , पिंडी फटी अचम्भा छाया।।
- चन्द्रप्रभ की मूर्ति दिखाई, सब ने जय-जयकार मनाई।
- नगर फिरोजाबाद कहाये , पास नगर चन्दवार बताये।।
- चन्द्रसैन राजा कहलाया , उस पर दुश्मन चढ़कर आया।
- राव तुम्हारी स्तुति गई , सब फौजो को मार भगाई।।
- दुश्मन को मालूम हो जावे , नगर घेरने फिर आ जावे।
- प्रतिमा जमना में पधराई , नगर छोड़कर परजा धाई।।
- बहुत समय ही बीता है कि , एक यती को सपना दीखा।
- बड़े जतन से प्रतिमा पाई , मन्दिर में लाकर पधराई।।
- वैष्णवों ने चाल चलाई , प्रतिमा लक्ष्मण की बतलाई।
- अब तो जैनी जन घबरावें , चन्द्र प्रभु की मूर्ति बतावें।।
- चिन्ह चन्द्रमा का बतलाया , तब स्वामी तुमको था पाया।
- सोनागिरि में सौ मन्दिर हैं , इक बढ़कर इक सुन्दर हैं।।
- समवशरण था यहां पर आया , चन्द्र प्रभु उपदेश सुनाया।
- चन्द्र प्रभु का मंदिर भारी , जिसको पूजे सब नर - नारी।।
- सात हाथ की मूर्ति बताई , लाल रंग प्रतिमा बतलाई।
- मंदिर और बहुत बतलाये , शोभा वरणत पार न पाये।।
- पार करो मेरी यह नैया , तुम बिन कोई नहीं खिवैया।
- प्रभु मैं तुमसे कुछ नहीं चाहूं , भव - भव में दर्शन पाऊँ।।
- मैं हूं स्वामी दास तिहारा , करो नाथ अब तो निस्तारा।
- स्वामी आप दया दिखलाओ , चन्द्रदास को चन्द्र बनाओ।।
।।सोरठ।।
- नित चालीसहिं बार , पाठ करे चालीस दिन।
- खेय सुगन्ध अपार , सोनागिर में आय के।।
- होय कुबेर सामान , जन्म दरिद्री होय जो।
- जिसके नहिं संतान , नाम वंश जग में चले।।
- || इति संपूर्णंम् ||
पूर्णिमा के दिन करें ये उपाय
सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें। चंद्रमा को शाम के समय दूध मिश्रित जल का अर्घ्य दें।सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, मिश्री और वस्त्र का दान करें।घर में खीर बनाकर भगवान को भोग लगाएं और प्रसाद वितरित करें।जरूरतमंदों को भोजन कराएं और यथाशक्ति दान करें। किसी का अपमान या कटु वचन न बोलें। तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें। क्रोध, झूठ और विवाद से बचें।
चंद्रदेव चालीसा FAQ
- चंद्रदेव चालीसा का पाठ कब करना चाहिए?
- उत्तर: चंद्रदेव चालीसा का पाठ सोमवार, पूर्णिमा तिथि और चंद्रमा उदय होने के समय करना विशेष फलदायी माना जाता है।
- Q2. चंद्रदेव चालीसा पढ़ने से क्या लाभ मिलता है?
- उत्तर: मान्यता है कि इसके पाठ से मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक सुख और चंद्र दोषों से राहत मिलती है।
- Q3. क्या पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव चालीसा का पाठ किया जा सकता है?
- उत्तर: हां, पूर्णिमा के दिन चंद्रदेव चालीसा का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है।
- Q4. चंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए क्या अर्पित करें?
- उत्तर: सफेद फूल, दूध, चावल, मिश्री और सफेद वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं।
- Q5. चंद्रदेव चालीसा कितनी बार पढ़नी चाहिए?
- उत्तर: सामान्य रूप से एक बार पाठ किया जा सकता है, लेकिन विशेष मनोकामना के लिए 11, 21 या 40 दिनों तक नियमित पाठ करने की परंपरा भी है।
- Q6. क्या चंद्रदेव चालीसा का पाठ रात में किया जा सकता है?
- उत्तर: हां, चंद्रमा के दर्शन के बाद रात्रि में चंद्रदेव चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
- Q7. चंद्र दोष होने पर चंद्रदेव चालीसा कैसे लाभकारी है?
- उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित पाठ से चंद्र ग्रह से संबंधित अशुभ प्रभावों को कम करने और मन को स्थिर रखने में सहायता मिलती है।
- Q8. चंद्रदेव चालीसा पढ़ने से किन समस्याओं में लाभ माना जाता है?
- उत्तर: मानसिक तनाव, भय, अनिद्रा, अस्थिरता और पारिवारिक कलह जैसी समस्याओं में इसके पाठ को लाभकारी माना जाता है।














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