क्या पायलट की एक गलती ने ली 260 जान या विमान में ही था 'Death Fault'? Air India क्रैश का वो खौफनाक सच
Air India Dreamliner crash probe: एविएशन इंडस्ट्री (Aviation Industry) के इतिहास में कुछ हादसे ऐसे होते हैं जो सालों तक अनसुलझी पहेली बन जाते हैं। जून 2025 में अहमदाबाद में क्रैश हुई एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 का दर्दनाक हादसा भी कुछ ऐसा ही है। बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान के इस क्रैश में 260 बेकसूर लोगों की जान चली गई थी।
13 जून 2025 को हुए इस भीषण हादसे को 8 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन आज भी विमानन गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है- आखिर उस दिन आसमान में क्या हुआ था? क्या यह पायलट की कोई आत्मघाती साजिश थी, या फिर बोइंग विमान के सिस्टम में छुपा कोई तकनीकी 'डेथ फॉल्ट'?

हाल ही में फरवरी 2026 में लंदन से बेंगलुरु आ रहे एक दूसरे ड्रीमलाइनर विमान को सिर्फ इसलिए ग्राउंडेड (उड़ान पर रोक) करना पड़ा क्योंकि उसका फ्यूल कंट्रोल स्विच (Fuel Control Switch) अपने आप बंद हो रहा था। इस नई घटना ने AI 171 क्रैश की जांच की आग में घी डालने का काम किया है। इस पूरे मामले को लेकर एविएशन इंडस्ट्री दो धड़ों में बंट चुकी है और दोनों के पास अपनी-अपनी पुख्ता थ्योरी हैं। आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं।
फरवरी 2026 की वो घटना, जिसने क्रैश की जांच को नया मोड़ दिया
13 जून 2025 को हुए अहमदाबाद एयर इंडिया हादसे के ठीक आठ महीने बाद, यानी फरवरी 2026 में एयर इंडिया के एक दूसरे बोइंग 787-8 विमान में एक अजीब गड़बड़ी सामने आई। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पायलट डिफेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक, इस विमान का फ्यूल कंट्रोल स्विच (FCS) बेहद संवेदनशील हो चुका था। उसे हल्का सा छूने या पुश करने पर ही वह 'RUN' (चालू) पोजीशन से सरक कर सीधे 'CUTOFF' (बंद) पर आ जा रहा था। यानी स्विच अपनी जगह पर ठीक से लॉक ही नहीं हो रहा था।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MOCA) ने सुरक्षा को देखते हुए तुरंत इस विमान को जमीन पर खड़ा कर दिया। हालांकि, बोइंग के निर्देश पर जब इस स्विच की शुरुआती जांच की गई, तो कंपनी ने दावा किया कि मैकेनिकली इसमें कोई खराबी नहीं है। गहन जांच के लिए इस स्विच को अमेरिका भेजा गया है। भले ही विमान को दोबारा उड़ान की मंजूरी मिल गई हो, लेकिन इस घटना ने जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। क्या AI 171 के क्रैश होने के पीछे भी ऐसा ही कोई रहस्यमयी स्विच था, जिसने 'अपने आप' काम करना शुरू कर दिया था?

थ्योरी नंबर 1: पायलट को बलि का बकरा बनाने की साजिश?
क्रैश की जांच कर रही एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की फाइनल रिपोर्ट इस साल अगस्त तक आने की उम्मीद है। लेकिन उससे पहले ही भारतीय पायलट कम्युनिटी, अनुभवी एयरक्राफ्ट इंजीनियर्स और भारतीय वायुसेना (IAF) के रिटायर्ड दिग्गजों का एक मजबूत धड़ा बोइंग और एयर इंडिया के दावों को चुनौती दे रहा है।
इस ग्रुप का मानना है कि विमान में कोई 'पायलट की गलती' नहीं थी, बल्कि यह एक बहुत बड़ा इलेक्ट्रिकल फेलियर (Massive Electrical Failure) था। उनके पास इसके पीछे कई ठोस और तकनीकी तर्क हैं:
रैम एयर टर्बाइन (RAT) का खुलना: टेकऑफ के महज 4 से 8 सेकंड के भीतर ही इस विमान का 'रैम एयर टर्बाइन' (RAT) अपने आप खुल गया था। ड्रीमलाइनर विमानों में यह टर्बाइन सिर्फ तब बाहर आता है जब विमान के दोनों जनरेटर पूरी तरह फेल हो जाएं या बिजली पूरी तरह गुल हो जाए।
ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट माइक का बंद होना: प्रिलिमनरी (शुरुआती) रिपोर्ट बताती है कि हादसे से ठीक पहले पायलटों के बूम माइक्रोफोन ने काम करना बंद कर दिया था क्योंकि उन्हें बिजली नहीं मिल रही थी। इतना ही नहीं, विमान का पिछला रिकॉर्डर (Tail Box) अंदरूनी तौर पर पूरी तरह पिघल गया था, जो फ्यूल की आग से नहीं बल्कि इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट की भीषण आग से ही संभव है।
विमान का पुराना इतिहास: जिस ड्रीमलाइनर विमान (AI 171) का एक्सीडेंट हुआ, उसका ट्रैक रिकॉर्ड पहले से खराब था। साल 2022 में भी इस विमान के इलेक्ट्रिकल पैनल में आग लगने, शॉर्ट सर्किट होने और बार-बार सर्किट ब्रेकर ट्रिप होने की घटनाएं दर्ज की गई थीं।
इस विंग का सीधा आरोप है कि बोइंग और एयर इंडिया अपनी खाल बचाने के लिए सारा दोष मृत कमांडर पर मढ़ना चाहते हैं, क्योंकि कमांडर अब खुद का बचाव करने के लिए इस दुनिया में नहीं हैं।

थ्योरी नंबर 2: क्या कॉकपिट के अंदर पायलट ने खुद बंद किया फ्यूल?
दूसरी तरफ, एक ऐसा गुट भी है जो सीधे तौर पर पायलट की मानवीय गलती या जानबूझकर की गई हरकत को हादसे की वजह मानता है। एक इटैलियन रिपोर्ट ने भी यह दावा किया था कि पायलट ने जानबूझकर फ्यूल स्विच को बंद किया था। यह गुट AAIB की शुरुआती रिपोर्ट में दर्ज कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) की उस आखिरी बातचीत को अपना सबसे बड़ा आधार बनाता है, जिसमें एक पायलट दूसरे से चीखते हुए पूछता है, "तुमने फ्यूल कट-ऑफ क्यों किया?" जिस पर दूसरा पायलट जवाब देता है, "मैंने ऐसा नहीं किया।"
एनालिसिस के मुताबिक, उड़ान भरते समय फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर विमान को उड़ा रहे थे और उनका पूरा ध्यान कॉकपिट से बाहर था। वहीं कमांडर सुमीत सभरवाल अंदर के सिस्टम की मॉनिटरिंग कर रहे थे। इस थ्योरी के समर्थकों का कहना है:
अगर फ्यूल स्विच को जानबूझकर बंद किया गया, तो वह टेकऑफ के वक्त ही क्यों किया गया?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही हरकत 30,000 फीट की ऊंचाई पर की जाती, तो दूसरे पायलट के पास एक्शन को पलटने और स्विच को वापस 'RUN' पर लाने का पर्याप्त समय होता। लेकिन जमीन से महज कुछ फीट की ऊंचाई पर इंजन बंद होने के बाद विमान को संभालने का मौका ही नहीं मिला।
टाटा समूह और बोइंग के लिए बेहद गंभीर हैं इस जांच के मायने
इस जांच रिपोर्ट का नतीजा जो भी हो, लेकिन इसने टाटा ग्रुप (Tata Sons) और बोइंग (Boeing) की साख को दांव पर लगा दिया है। अगर फाइनल रिपोर्ट में यह साबित हो जाता है कि हादसा इलेक्ट्रिकल खराबी या विमान के मेंटेनेंस में चूक की वजह से हुआ, तो एयर इंडिया के लिए मुश्किलें बहुत बढ़ जाएंगी।
हैरानी की बात यह है कि जून 2025 के इस क्रैश से पहले ही, डीजीसीए (DGCA) के पूर्व महानिदेशक विक्रम देव दत्त (2023-2024) ने एक आधिकारिक नोट जारी कर एयर इंडिया की सेफ्टी प्रैक्टिसेज (सुरक्षा मानकों) पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर अदालत में यह साबित हो गया कि चेतावनी के बावजूद एयर इंडिया ने विमानों के मेंटेनेंस को नजरअंदाज किया, तो यह 'क्रिमिनल नेग्लिजेंस' यानी आपराधिक लापरवाही का मामला बन जाएगा।
बहरहाल, जून में आने वाली अंतरिम रिपोर्ट और अगस्त की फाइनल रिपोर्ट ही इस राज से पर्दा उठाएगी कि 260 यात्रियों की मौत का असली गुनहगार कौन है- एक बेबस पायलट या एक नाकाम मशीन।












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