विलुप्त हो रही लोक कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं को पुनर्जीवित करेगी योगी सरकार
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इन लोक कलाओं और सांस्कृतिक परम्पराओं के संरक्षण और उन्नयन के लिए निरन्तर प्रयत्न कर रही है। समय के साथ हाशिये पर आ गई इन लोक कलाओं को पुनर्जीवन के लिए योगी सरकार आगे आई है।
भारतीय संस्कृति अपनी समन्वयवादी प्रवृत्ति के कारण विश्व में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। यह प्रवृत्ति यहां की लोक कलाओं में भी देखी जा सकती है, जिसके माध्यम से उन्हें प्रस्तुत किया जाता है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इन लोक कलाओं और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और उन्नयन के लिए लगातार प्रयास कर रही है। समय के साथ हाशिए पर चली गई इन लोक कलाओं को पुनर्जीवित करने के लिए योगी सरकार आगे आई है।

यूपी में लोक कलाओं की प्रस्तुति का मंच देगी सरकार
उत्तर प्रदेश में लोक कलाओं की समृद्ध विरासत है। यहां हर क्षेत्र और क्षेत्र की अपनी-अपनी लोक कला है, जिसे यहां के लोक कलाकार आज भी जीवित रखे हुए हैं। प्रौद्योगिकी के विकास के साथ-साथ इन लोक कलाओं का उत्पादन कम होता गया, जिसके कारण कई लोक कलाएँ विलुप्त होने के कगार पर पहुँच गईं। योगी सरकार ने इन्हें पुनर्जीवित करने की कोशिशें शुरू कर दी है।
जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री के मुताबिक भजन-कीर्तन मंडली, राम लीला और कृष्ण लीला जैसी लोक कलाओं की प्रस्तुतियां देने वाली संस्थाओं को राज्य सरकार एक मंच उपलब्ध कराएगी। इन संस्थाओं से जुड़े लोक कलाकारों और लोक मंडलियों के पंजीकरण के लिए प्रशासन की ओर से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। उन्हें सांस्कृतिक विभाग द्वारा आयोजित स्थानीय मेलों, त्योहारों, आयोजनों और कार्यक्रमों में प्रदर्शन करने का अवसर दिया जाएगा।
योगी सरकार लोक कलाकारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब राज्य में भजन-कीर्तन मंडली, राम लीला और कृष्ण लीला से जुड़ी लोक कलाओं को संरक्षित करने के साथ-साथ उन्हें प्रदर्शन के लिए मंच भी मिलेगा। लोक कलाकारों को आजीविका के साधन से जोड़ा जायेगा। इसके लिए सरकार की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है।
इसके लिए भजन-कीर्तन मंडली को पांच साल तक कार्यक्रम प्रस्तुत करने का अनुभव होना चाहिए। मण्डली में न्यूनतम 5 और अधिकतम 25 सदस्य होने चाहिए। यह भी अनिवार्य है कि यदि यह मंडली किसी मंदिर से संबद्ध है तो उसके पास प्रमाणपत्र भी होना चाहिए। इसके लिए राज्य संस्कृति विभाग की वेबसाइट पर निःशुल्क पंजीयन कराना अनिवार्य है।












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