जब सीएम खट्टर ने सदन में सुनाई स्वरचित कविता, श्रीगुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों को किया नमन

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों वीर जोरावर सिंह व फतेह सिंह की शहादत को स्वरचित कविता के माध्यम से श्रद्धांजलि दी।

When CM haryana Khattar recited a self composed poem in vidhansabha Shri Guru Gobind Singh

हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव पढ़ने के बाद सदन के नेता व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने गुरु गोबिंद सिंह के साहिबजादों वीर जोरावर सिंह व फतेह सिंह की शहादत को स्वरचित कविता के माध्यम से श्रद्धांजलि दी।

मुख्यमंत्री ने अपनी कविता में कहा, 'गुरू गोबिंद सिंह के बच्चे, उमर में थे अगर कच्चे, मगर थे सिंह के बच्चे। धर्म ईमान के सच्चे। गर्ज कर बोले थे यूं, सिंह मुंह खोल उठे थे यूं। नहीं हम झुक नहीं सकते, कहीं रुक नहीं सकते। कहीं पर्वत झुके भी हैं, कभी दरिया रूके भी हैं। नहीं रुकती है रवानगी, नहीं कभी झुकती जवानी है। जोरावर जोर से बोला, फतेह सिंह छोर से बोला, रखो इंटें, भरो गारे, चिनों दीवार हत्यारे। निकलती सांस बोलेगी, हमारी लाश बोलेगी, यही दीवार बोलेगी, हजारों बार बोलेगी'।

मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत करवाया कि आज 26 दिसम्बर का दिन है और प्रधानमंत्री ने इस दिन को पिछले वर्ष 'वीर बाल दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसी कड़ी में हम विधानसभा सत्र में उन वीर बाल शहीदों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

श्री गुरू गोबिंद सिंह जी के चार बच्चों में से दो ने तो पहले ही धर्म की रक्षा के लिए शहादत दे दी थी। जोरावर सिंह व फतेह सिंह को जब दीवार में चिनवाया गया था तो दीवार के एक-दूसरे छोर से दोनों ने धर्म की रक्षा के लिए ललकार लगाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि धन्य हैं माता गुजरी जिन्होंने ऐसे वीर पुत्रों को जन्म दिया।

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