Karnataka Crisis: राज्यपाल राज्य से बाहर, कैसे इस्तीफा देंगे CM सिद्धारमैया? जानें क्या कहता है आर्टिकल 164
Karnataka CM Siddaramaiah Resignation: कर्नाटक की राजनीति इस समय बेहद नाटकीय मोड़ पर पहुंच गई है। दरअसल, कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं के बीच खबर है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। लेकिन इसी बीच राज्यपाल थावरचंद गहलोत एक पारिवारिक मेडिकल इमरजेंसी के चलते 27 मई की देर रात बेंगलुरु से इंदौर रवाना हो गए। बताया जा रहा है कि उन्होंने फिलहाल वापसी की कोई टिकट भी बुक नहीं कराई है।
ऐसे में राजनीतिक और संवैधानिक हलकों में यह सवाल तेज हो गया कि क्या राज्यपाल की अनुपस्थिति में मुख्यमंत्री का इस्तीफा वैध माना जाएगा? और अगर हां, तो उसकी प्रक्रिया क्या होगी?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के सूत्रों ने साफ किया है कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत की अनुपस्थिति के बावजूद सिद्धारमैया के इस्तीफे की प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं आएगी। राज्यपाल बुधवार रात करीब 10:30 बजे राजभवन से निकले और 11:30 बजे की फ्लाइट से अपने गृह राज्य के लिए रवाना हो गए। उनके वापस लौटने का शेड्यूल अभी तय नहीं है। इसके बावजूद सिद्धारमैया आज दोपहर अपना त्यागपत्र राजभवन भेजेंगे।
Can CM Resign If Governor Out of State क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 164?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करते हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार:
कोई भी मुख्यमंत्री तब तक आधिकारिक रूप से पदमुक्त नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह अपना लिखित इस्तीफा राज्य के राज्यपाल को न सौंप दे। संविधान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि इस्तीफा सौंपने के लिए मुख्यमंत्री और राज्यपाल का एक ही कमरे में या भौतिक रूप से (Physically) आमने-सामने होना अनिवार्य है।
'राज्यपाल की संवैधानिक शक्ति उनके साथ चलती है'
India Today की एक रिपोर्ट कहती है कि- इस डिजिटल युग में तकनीकी और प्रक्रियात्मक रूप से इस्तीफा कैसे स्वीकार किया जाता है:
राज्यपाल का अधिकार क्षेत्र (Constitutional Authority Travels With Office)
राज्यपाल एक संवैधानिक संस्था और राज्य के प्रमुख हैं। उनका कार्यालय राजभवन की इमारत या किसी राज्य की भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं होता। राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियां और उनका पद उनके साथ यात्रा करता है। वे देश के किसी भी हिस्से में हों, या अस्पताल के बिस्तर पर ही क्यों न हों, वे आधिकारिक दस्तावेजों और प्रशासनिक फैसलों को मंजूरी दे सकते हैं।
इस्तीफे के तीन वैकल्पिक रास्ते (Alternative Routes to Resign)
यदि सिद्धारमैया आज इस्तीफा देना चाहते हैं, तो वे निम्नलिखित संवैधानिक विकल्पों का उपयोग कर सकते हैं:
राजभवन के अधिकारियों को सौंपना: मुख्यमंत्री अपना मूल इस्तीफा बेंगलुरु स्थित राजभवन के सचिव (Governor's Secretary) या वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप सकते हैं, जो इसे तुरंत प्राप्त (Acknowledge) मानेंगे।
डिजिटल माध्यम (Fax/Email): मुख्यमंत्री कार्यालय से इस इस्तीफे की प्रति सीधे राज्यपाल को फैक्स (Fax) या आधिकारिक ईमेल के जरिए भेजी जा सकती है।
फोन पर पुष्टि: राजभवन से कॉपी मिलने के बाद राज्यपाल फोन पर मुख्यमंत्री से बात कर इसकी पुष्टि कर सकते हैं।
स्तीफे की एकमात्र सबसे बड़ी शर्त यह है कि वह पूरी तरह से स्पष्ट, लिखित और बिना किसी भ्रम (Clear and Unambiguous) का होना चाहिए, ताकि उसे स्वीकार करते समय कोई कानूनी विवाद न खड़ा हो।
कार्यवाहक मुख्यमंत्री की व्यवस्था
संविधान के तहत जैसे ही राज्यपाल डिजिटल माध्यम या राजभवन सचिव के जरिए सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार करेंगे, मौजूदा कैबिनेट तकनीकी रूप से भंग हो जाएगी। इसके तुरंत बाद का प्रोटोकॉल यह है कि राज्यपाल एक आधिकारिक आदेश जारी कर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से यह अनुरोध करेंगे कि "जब तक राज्य में वैकल्पिक व्यवस्था (नए मुख्यमंत्री का चयन और शपथ ग्रहण) नहीं हो जाती, तब तक वे 'केयरटेकर सीएम' (Caretaker Chief Minister) के रूप में कामकाज संभालते रहें।" इसलिए, राज्यपाल थावरचंद गहलोत का इंदौर या मुंबई में होना कर्नाटक की सत्ता के हस्तांतरण (Transition of Power) में कोई कानूनी अड़चन नहीं बनेगा।
कर्नाटक में तेज हुआ सत्ता परिवर्तन का सस्पेंस
कर्नाटक में पिछले कई दिनों से कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज है। माना जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान सिद्धारमैया से पद छोड़ने के लिए कह चुका है और डीके शिवकुमार को नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इसी बीच राज्यपाल की अनुपस्थिति ने पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सिद्धारमैया आज अपना इस्तीफा सौंपेंगे और कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ होगा या फिर सियासी समीकरण आखिरी वक्त पर बदल जाएंगे।














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