'महिला सांसदों के साथ ऐसा व्यवहार', MP काकोली घोष ने कल्याण बनर्जी पर लगाए संगीन आरोप, सजा देने की भी मांग की

Kakoli Ghosh Dastidar Slams Kalyan Banerjee: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों सिर्फ विपक्ष के हमलों से नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के अंदर उठ रहे बवंडर से जूझती दिख रही है। पार्टी की चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने अब खुलकर बगावती तेवर अपना लिए हैं। मामला सिर्फ नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह संसद के भीतर "महिला सांसदों के साथ अपमानजनक व्यवहार" जैसे गंभीर आरोपों तक पहुंच चुका है।

काकोली घोष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर TMC सांसद और पार्टी के मौजूदा चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति मांगी है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कल्याण बनर्जी का व्यवहार उनके साथ ही नहीं, बल्कि कई महिला सांसदों के प्रति भी अपमानजनक रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने TMC की अंदरूनी लड़ाई को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। सवाल सिर्फ एक सांसद की नाराजगी का नहीं, बल्कि उस राजनीतिक असंतोष का है जो बंगाल चुनाव के बाद तेजी से सतह पर आता दिख रहा है।

Kakoli Ghosh Dastidar Slams Kalyan Banerjee

क्या है पूरा मामला और काकोली ने क्या आरोप लगाए? (Kakoli Ghosh Allegations Kalyan Banerjee)

पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान अब खुलकर दिल्ली के गलियारों तक पहुंच चुकी है। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक औपचारिक शिकायती पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने अपनी ही पार्टी के नवनियुक्त चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

  • दुर्व्यवहार का आरोप: काकोली घोष का दावा है कि लोकसभा के भीतर कल्याण बनर्जी ने उनके साथ बेहद अमर्यादित और अपमानजनक व्यवहार किया।
  • केवल एक नहीं, कई महिला सांसद शिकार: पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कल्याण बनर्जी का यह अनुचित रवैया केवल उनके प्रति नहीं था, बल्कि वे सदन में कई अन्य महिला सांसदों के साथ भी इसी तरह का अपमानजनक बर्ताव करते रहे हैं।
  • सख्त सजा की मांग: उन्होंने लोकसभा स्पीकर से इस मामले में तुरंत दखल देने, औपचारिक शिकायत दर्ज करने की अनुमति देने और कल्याण बनर्जी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए 'सजा' सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।
कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार? TMC सांसद को क्यों मिली Y श्रेणी की CISF सुरक्षा
कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार? TMC सांसद को क्यों मिली Y श्रेणी की CISF सुरक्षा

आखिर विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

असल टकराव की शुरुआत तब मानी जा रही है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी के संसदीय ढांचे में बड़ा बदलाव किया। काकोली घोष को लोकसभा में चीफ व्हिप के पद से हटाकर यह जिम्मेदारी कल्याण बनर्जी को दे दी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यहीं से दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़नी शुरू हुई।

काकोली घोष ने इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर भी नाराजगी जाहिर की थी। पार्टी के भीतर यह संदेश गया कि वह खुद को साइडलाइन महसूस कर रही हैं। दिलचस्प बात यह भी रही कि उन्हें पद से हटाए जाने के कुछ घंटों के भीतर केंद्र सरकार ने Y श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला लिया। यह फैसला ऐसे समय आया जब TMC के कई बड़े नेताओं की सुरक्षा घटाई जा रही थी। इससे राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिली।

Kakoli Ghosh Dastidar Slams Kalyan Banerjee

शुभेंदु अधिकारी की बैठक में पहुंचीं, फिर बढ़ा सस्पेंस

मामला तब और गर्म हो गया जब काकोली घोष पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता वाली एक बैठक में नजर आईं। बताया गया कि पार्टी ने उन्हें अनौपचारिक तौर पर वहां जाने से मना किया था।

बैठक के बाद शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि काकोली घोष ने उनसे कहा, "अब मुझे आजादी मिल गई है।" इसके बाद TMC में अटकलें तेज हो गईं कि क्या वह पार्टी छोड़ सकती हैं। हालांकि उन्होंने अभी तक सांसद पद या पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है।

कौन हैं काकोली घोष दस्तीदार और क्या है उनका बैकग्राउंड? ( Who Is Kakoli Ghosh)

काकोली घोष दस्तीदार पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक बेहद स्थापित और जाना-माना चेहरा हैं। 23 नवंबर 1959 को जन्मी 66 वर्षीय काकोली का परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से देश और राज्य की राजनीति व लोकसेवा से जुड़ा हुआ है।

  • पारिवारिक विरासत: उनके नाना पश्चिम बंगाल के पोस्टमास्टर जनरल थे। उनके सगे चाचा स्वर्गीय अरुण मैत्रा एक स्वतंत्रता सेनानी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके थे। वहीं उनके मामा गुरुदास दासगुप्ता भी भारतीय संसद के सम्मानित सदस्य थे।
  • पेशे से डॉक्टर: राजनीति में आने से पहले काकोली एक डॉक्टर (Physician) हैं। उन्होंने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से अपनी मेडिकल की डिग्री ली। इसके बाद उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से ऑब्सटेट्रिक अल्ट्रासाउंड में पोस्ट ग्रेजुएट ट्रेनिंग भी पूरी की।
  • पति का रसूख: उनके पति डॉ. सुदर्शन घोष दस्तीदार भी देश के जाने-माने इनफर्टिलिटी और आईवीएफ (IVF) स्पेशलिस्ट हैं और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
Kakoli Ghosh Dastidar Slams Kalyan Banerjee

काकोली घोष का राजनीतिक सफर और रसूख (Kakoli Ghosh Political Career)

शुरुआती दौर में कई चुनावों (डायमंड हार्बर, हावड़ा, बालीगंज और जादवपुर विधानसभा) में हार का सामना करने के बाद काकोली घोष ने टीएमसी के भीतर अपनी एक मजबूत पहचान बनाई।

  • चार बार की सांसद: साल 2009 में टीएमसी ने उन्हें पहली बार बारासात लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां उन्होंने 1 लाख 22 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 2014, 2019 तथा 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज कर संसद पहुंचीं।
  • पार्टी में बड़े पद: वे ऑल इंडिया तृणमूल महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और 'बंगा जननी' कार्यक्रम की मुख्य कमान संभाल रही थीं। इसके अलावा वे लोकसभा में सभापतियों के पैनल (Panel of Chairpersons) की सदस्य और बुल्गारिया के लिए भारतीय संसदीय मैत्री समूह की लीडर भी नियुक्त की गई थीं।
  • सामाजिक कार्य: राजनीति के साथ-साथ उन्होंने झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने और तस्करी की शिकार महिलाओं के बच्चों के लिए स्कूल व दवाखाना खोलने में बड़ी भूमिका निभाई है।

पदों से इस्तीफा और भाजपा से बढ़ती नजदीकियां

काकोली घोष की नाराजगी सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने सुब्रत बख्शी को पत्र लिखकर पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों (जिसमें बारासात जिला अध्यक्ष का पद भी शामिल था) से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने लिखा कि वे काफी समय से मानसिक संघर्ष और लंबे चिंतन से गुजर रही थीं, जिसके बाद उन्होंने यह कदम उठाया। हालांकि उन्होंने कहा है कि वे एक आम कार्यकर्ता के रूप में जुड़ी रहेंगी।

इस इस्तीफे के तुरंत बाद बंगाल की राजनीति तब और गरमा गई जब काकोली घोष कल्याणी में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में शामिल होने पहुंच गईं। सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी नेतृत्व ने उन्हें इस बैठक में जाने से मना किया था, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि बैठक में काकोली ने उनसे कहा, "अब आखिरकार मुझे आजादी मिल गई है।"

इस्तीफे के पत्र में उठाए भ्रष्टाचार और आरजी कर कांड पर सवाल

काकोली घोष ने अपने इस्तीफे में टीएमसी सरकार को घेरने वाले कई संवेदनशील मुद्दों का सीधा जिक्र किया है, जिसने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं:

  • भ्रष्टाचार और घोटाले: उन्होंने राज्य में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले, विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार और जेल से जुड़े विवादों पर गहरी चिंता जताई।
  • आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड: उन्होंने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर की दर्दनाक मौत के मामले को भी अपने इस्तीफे का आधार बनाया, जो कि उनका खुद का एल्मा मेटर (Schooled college) भी रहा है।
  • आई-पैक (I-PAC) का दखल: उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति में बाहरी एजेंसी आई-पैक के बढ़ते हस्तक्षेप और संगठन में गैर-निर्वाचित लोगों के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे पुराने कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

क्या बंगाल में गिरने वाली है सरकार? समझिए आंकड़ों का गणित

काकोली घोष के इस कदम के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सौमित्र खान ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि टीएमसी के करीब 20 सांसद इस समय बीजेपी के संपर्क में हैं और अगर बीजेपी ने हरी झंडी दी, तो अगले कुछ दिनों में टीएमसी पूरी तरह बिखर जाएगी।

हालांकि, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद और झूठ का पुलिंदा बताया है। यानी अगर सौमित्र खान का दावा सच साबित होता है और 20 सांसद एक साथ पाला बदलते हैं, तभी उनकी संसद सदस्यता बच पाएगी।

नगरपालिकाओं में भी मची है भगदड़

टीएमसी के भीतर बिखराव सिर्फ शीर्ष स्तर पर ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिखने लगा है। चुनावी नतीजों के बाद से उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों की सात नगरपालिकाओं से 100 से अधिक पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस संकट की आंच ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर तक पहुंच गई है। डायमंड हार्बर नगरपालिका के कुल 16 बोर्ड सदस्यों में से 8 सदस्यों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया है, जिससे स्थानीय संगठन पूरी तरह बैकफुट पर आ गया है। हालांकि, इस सामूहिक इस्तीफे पर टीएमसी के शीर्ष नेतृत्व ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया नहीं दी है।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+