Abraham Accords: Trump की नई शर्त से बुरा फंसा पाकिस्तान, बदलेगा पासपोर्ट? खाड़ी देशों को भी दिया अल्टीमेटम
Abraham Accords: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने Middle East की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर खाड़ी अरब देश इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं देते, तो अमेरिका प्रस्तावित शांति समझौते से पीछे हट सकता है। ट्रंप ने ईरान के साथ डील को Abraham Accords से जोड़ दिया है, जिससे Middle East में नया तनाव पैदा हो गया है।
White House बैठक में क्या बोले Trump?
White House की cabinet meeting के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि Saudi Arabia, Qatar और United Arab Emirates जैसे देशों का अमेरिका के प्रति “कर्तव्य” है कि वे Abraham Accords में शामिल हों। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ होने वाले किसी भी समझौते का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि ये देश इजरायल को मान्यता देते हैं या नहीं।

“अब्राहम एकॉर्ड्स में शामिल नहीं तो समझौता नहीं”
जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर Gulf देश Abraham Accords में शामिल नहीं होते तो क्या होगा, तो उन्होंने सख्त जवाब दिया। ट्रंप ने कहा-
“मुझे नहीं लगता कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो हमें समझौता करना चाहिए। सच कहूं तो, अगर वे Abraham Accords में शामिल होने के लिए साइन नहीं करते, तो मुझे नहीं पता… मुझे लगता है कि उन देशों का हमारे प्रति यह दायित्व है।” Jean Carroll Case: 'मुझे धकेला फिर टाइट्स नीचे खींची’, ट्रंप पर रेप का आरोप लगाने वाली महिला कौन? होगा एक्शन?Truth Social पोस्ट से बढ़ा विवाद
ट्रंप का यह बयान उनके पहले दिए गए एक अल्टीमेटम का विस्तार माना जा रहा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा था कि ईरान के साथ-साथ Saudi Arabia, Qatar, Pakistan, Turkey, Egypt और Jordan जैसे देशों के लिए भी अब्राहम एकॉर्ड्स पर साइन करना जरूरी होना चाहिए। इस बयान के बाद Middle East की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है।
बुरा फंसा पाकिस्तान
ट्रंप की इस नई शर्त के बाद अगर सबसे ज्यादा कोई फंसता दिख रहा है तो वो है पाकिस्तान। पाकिस्तान के पासपोर्ट पर साफ-साफ लिखा है कि 'इजरायल छोड़कर सभी देशों के लिए मान्य’। मतलब पाकिस्तान इजरायल के अस्तित्व को खारिज करता रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस पर साफ इनकार कर दिया है। ऐसे में अगर ट्रंप ने इसे अनिवार्य कर दिया तो सबसे ज्यादा मुसीबत पाकिस्तान के लिए होगी। क्योंकि वहां के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ट्रंप के सत्ता में आते ही उन्हें लुभाने में लग गए थे, लेकिन उन्हें इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है।
एक साथ सुलझाने की कोशिश दो बड़े संकट
माहौल को देखकर साफ पता चलता है कि ट्रंप फिलहाल दो बेहद जटिल foreign policy issues को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पहला मुद्दा है ईरान के साथ तनाव कम कर regional war को रोकना और दूसरा मुद्दा है Israel और Sunni Arab देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दूरी को खत्म करना।
Saudi Arabia और Qatar पर भी दबाव
ट्रंप ने कहा-
“अमेरिका द्वारा इस जटिल पहेली को सुलझाने के सभी प्रयासों के बाद इसकी शुरुआत Saudi Arabia और Qatar के तत्काल हस्ताक्षर से होने चाहिए और बाकी सभी को भी यही करना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें इस समझौते का हिस्सा नहीं होना चाहिए।”इस बयान को Gulf देशों पर सीधे दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
UAE और Bahrain पहले ही कर चुके हैं साइन
गौरतलब है कि UAE और बहरीन पहले ही 2020 में अब्राहम एकॉर्ड्स पर साइन कर चुके हैं। अब ट्रंप इन देशों से Israel के साथ और ज्यादा गहरे जुड़ाव की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं Pakistan, Saudi Arabia और Qatar जैसे देशों को भी इस समझौते में शामिल होने के लिए दबाव दिया जा रहा है।
Saudi Arabia की अलग शर्त
व्हाइट हाउस की इस शर्त पर टकराव होता दिख रहा है। Saudi Arabia ने कई बार साफ कहा है कि वह तब तक Israel के साथ रिश्ते सामान्य नहीं करेगा, जब तक एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य के लिए स्पष्ट और स्थायी रास्ता नहीं बनाया जाता। लेकिन इजरायल के पीएम नेतन्याहू बार-बार इस मांग को खारिज करते रहे हैं।
ट्रंप ने फिर दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी
जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो क्या अमेरिका वार्ता छोड़कर फिर सैन्य कार्रवाई शुरू करेगा, तो उन्होंने सख्त तेवर दिखाए। इस पर ट्रंप ने कहा-
“हम अभी तक संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन होंगे। या तो ऐसा होगा, या हमें बस काम पूरा करना होगा। मुझे नहीं लगता कि उनके पास कोई दूसरा विकल्प है।”उनके इस बयान को कई लोग इसे मिलिट्री एक्शन की धमकी के तौर पर देख रहे हैं।
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