तीसरी मुंबई बनने का रास्ता साफ, ट्रांस-हार्बर लिंक की एक साइड का ट्रायल शुरू, CM और DCM ने लिया जायजा
शिवड़ी-न्हावासेवा ट्रांस हार्बर लिंक प्रॉजेक्ट के तहत कुल 22 किमी लंबे ब्रिज का निर्माण हो रहा है। समंदर में बने देश के सबसे लंबा ब्रिज 16.5 किमी पानी पर, जबकि 5.5 किमी जमीन पर तैयार किया जा रहा है।

मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने समुद्र के रास्ते मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ने का काम पूरा कर लिया है। राज्य के दो शहरों की दूरी कम करने के लिए पानी पर 16.5 किमी लंबे ब्रिज तैयार करने का काम पूरा हो गया है। वर्ष के अंत तक ब्रिज को वाहनों के आवाजाही के लिए खोल दिया जाएगा। बुधवार को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समंदर पर बने देश के सबसे लंबे ब्रिज का ट्रायल देखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि एमटीएचएल के तैयार होने से मुंबई, नवी मुंबई के बाद तीसरी मुंबई बनाने का रास्ता साफ हो गया है। नवी मुंबई के करीब के परिसर में तेजी से विकास होगा। वहीं, उपमुख्यमंत्री के अनुसार जमीन की कमी से मुंबई के विकास में आ रही अड़चनें अब दूर हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार की ट्रिलियन डॉलर इकनॉमी का मार्ग भी एमटीएचएल से होकर गुजरने वाला है।
शिवड़ी-न्हावासेवा ट्रांस हार्बर लिंक प्रॉजेक्ट (एमटीएचएल) के तहत कुल 22 किमी लंबे ब्रिज का निर्माण हो रहा है। समंदर में बने देश के सबसे लंबा ब्रिज 16.5 किमी पानी पर, जबकि 5.5 किमी जमीन पर तैयार किया जा रहा है। सबसे लंबा ब्रिज तैयार करने के लिए देश में पहली बार कई नई तकनीक का इस्तेमाल हुआ है। 100 साल तक यात्रियों को समुद्र के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचाने के लिए पहली बार ऑर्थोट्रॉपिक स्टील डेक (ओएसडी) तकनीक अपनाई गई है। एमटीएचएल पर देश में पहली बार ओपन रोड टोलिंग सिस्टम इस्तेमाल होगी, ताकि वाहन बगैर रुके दौड़ सकें।
प्रॉजेक्ट की मौजूदा स्थिति
एमटीएचएल के निर्माण का काम 94 फीसदी तक पूरा हो चुका है। पानी से लेकर तक जमीन तक ब्रिज का ढांचा तैयार करने का काम पूरा हो गया है। पूरे प्रॉजेक्ट का काम तीन पैकेज में हो रहा है। अब केवल पूरे मार्ग पर सड़क तैयार करने, मार्किंग करने समेत कुछ छोटे काम बचा है। एमएमआरडीए के मुताबिक, चार महीने में बचा हुआ काम पूरा कर लिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने नियम बदले
फडणवीस के मुताबिक, एमटीएचएल के निर्माण को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने अपने नियमों में बदलाव किया है। अब तक अन्य देशों से कर्ज केंद्र सरकार फिर केंद्र सरकार से पैसे प्रॉजेक्ट पर काम करने वाली संस्था को मिलता था। लेकिन एमटीएचएल के लिए केंद्र ने अपने नियम में बदलाव कर कर्ज सीधे एमएमआरडीए को दिलाया है।












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