तेलंगाना चुनाव: जानें सीपीआई (एम) के उम्मीदवार कैसे अनजाने में बीआरएस की कर रहे मदद
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में सीपीआई केवल एक निर्वाचन सीट कोठागुडेम से ही संतुष्ट है जो उसे कांग्रेस ने चुनाव लड़ने के लिए आवंटित की है। इसके साथ कांग्रेस ने तेलंगाना में सत्ता में आने पर सीपीआई को दो एमएलसी सीटों का वादा किया है। वहीं सीटों के बंटवारें को लेकर बातचीत विफल होने बाद, सीपीआई (एम) ने अकेले जाने का फैसला किया और 19 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार उतारे।

गौरतलब है कि राज्य में पिछले कुछ वर्षों में दोनों कम्युनिकस्ट पार्टियों में गिरावट आई है। 2018 के विधानसभा चुनावों में उन्हें कोई जीत नहीं मिली, हालांकि सीपीआई (एम) ने 2014 में भद्राचलम सीट जीती थी। कृषि प्रधान राज्य में कम्युनिस्टों का पतन सभी की समझ से परे है।
बता दें विभाजन से पहले सीपीआई ने 1962 में तत्कालीन आंध्र प्रदेश में 51 सीटें जीती थीं और 1964 में पार्टी के विभाजन के बाद भी, सीपीआई ने 31 और सीपीआई (एम) ने 22 सीटें जीती थीं। इसके बाद लगातार पार्टी का स्तर गिरता गया
नौबत ये आ गई है कि वो कांग्रेस की कृपादृष्टि पर अकेली सीट पर चुनाव लड़ रही है।
तेलंगाना के चुनावी रणक्षेत्र में कोठागुडेम तक सीमित सीपीआई, बीआरएस को चुनौती देने के लिए कांग्रेस पर निर्भर है। बीआरएस के उम्मीदवार, वनमा वेंकटेश्वर राव, मूल रूप से कांग्रेस के हैं और इसलिए कांग्रेस इस अकेली सीट पर सीपीआई को सपोर्ट कर रही।
2022 के मुनुगोड उपचुनाव में अपने उम्मीदवार को पूर्ण समर्थन देने के बाद सीपीआई और सीपीआई (एम) ने बीआरएस से एक कड़वा सबक सीखा था। कम्युनिस्टों को उम्मीद थी कि बीआरएस के साथ पार्टियां आएगी लेकिन बीआरएस नेताओं ने फोन तक उठाना बंद कर दिया था।
बीआरएस ने जब किनारा कर लिया तो कम्युनिस्ट पार्टियों ने कांग्रेस का समर्थन लेने का फैसला किया लेकिन सीटों के बंटवारे पर नहीं बनी तो कांग्रेस के रवैये से तंग आकर सीपीआई (एम) अलग हो गई और अपमान से आहत होकर, सीपीआई (एम) ने 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए।
हालांकि सीपीआई (एम) अनजाने में सत्तारूढ़ दल बीआरएस की मदद कर रही है। सीपीआई (एम) की उपस्थिति से केवल बीआरएस को मदद मिलेगी क्योंकि इससे सत्ता विरोधी वोट में कटौती होने की संभावना है। वाम दल ने अपने कार्यकर्ताओं से कांग्रेस का समर्थन करने का आग्रह किया है, लेकिन चुनाव के सूक्ष्म प्रबंधन में बीआरएस की चालाकी को देखते हुए, कोई भी निश्चित नहीं हो सकता है कि सीपीआई (एम) के वोट आखिरकार कहां जाएंगे।












Click it and Unblock the Notifications