सोनिया ने पीएम को लिखे पत्र में 'महिला आरक्षण बिल' को नहीं किया शामिल तो BRS नेता कविता ने उठाया सवाल
संसद का विशेष सत्र 18 से 22 सितंबर तक बुलाया गया है। विशेष सत्र से पहले कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा और स्पेशल सत्र में नौ मुद्रों को उठाए जाने की पैरवी की है। सोनिया गांधी के इस पत्र के नौ मुद्दों में 'महिला आरक्षण विधेयक' का मुद्दा नहीं है। जिस पर तेलंगाना की बीआरएस एमएलसी कविता ने आपत्ति जताते हुए कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से सवाल किया है।

बीआरएस नेता कविता ने कहा कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष और सांसद सोनिया गांध ने प्रधानमंत्री को भेजे अपने पत्र में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा की तात्कालिकता को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
महिला आरक्षण विधेयक के लिए कविता कर चुकी हैं भूख हड़ताल
बता दें तेलंगाना मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव की बेटी कविता, विधेयक को पेश करने और पारित करने की मांग को लेकर मार्च की शुरुआत में भूख हड़ताल पर बैठी थीं और इस पर कानून बनाने की मांग को बढ़ाने के लिए पूरे भारत में राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों के साथ बातचीत कर रही थीं।
लंबित मांग को सूचीबद्ध क्यों नहीं किया गया
बुधवार को कविता ने कहा पूछा कि सोनिया गांधी ने मोदी को लिखे पत्र में अन्य मुद्दों के साथ महिला आरक्षण विधेयक की लंबे समय से लंबित मांग को सूचीबद्ध क्यों नहीं किया गया? जबकि विपक्षी नेता चाहते थे कि सरकार संसद के आगामी विशेष सत्र में उठाए।
नौ मुद्दों पर स्पेशल सत्र में चर्चा करने की सोनिया ने की है पैरवी
बता दें सोनिया गांधी ने बुधवार को पीएम मोदी को जो पत्र लिखा है उसमें संसद के विशेष सत्र के लिए को एजेंडा सूचीबद्ध नहीं करने पर आपत्ति जताते हुए मणिपुर हिंसा और मूल्य वृद्धि समेत नौ मुद्दों पर स्पेशल सत्र में चर्चा की जाए इसका अनुरोध किया था।
महिला आरक्षण विधेयक का मुद्दा सोनिया गांधी द्वारा ना शामिल करने पर कविता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा
ये देखकर दुख हुआ कि संसदीय दल की अध्यक्ष और सांसद सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा की तात्कालिकता को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया। इसके साथ ही बीआरएस नेता कविता ने कहा सोनिया गांधी जी राष्ट्र लैंगिक समानता के लिए आपकी सशक्त वकालत का इंतजार कर रहा है। पीएम मोदी को लिखे पत्र में 9 महत्वपूर्ण मुद्दे हैं लेकिन महिला आरक्षण विधेयक क्यों नहीं? क्या महिलाओं का प्रतिनिधित्व एक राष्ट्रीय अनिवार्यता नहीं है?
बीआरएस नेता कविता द्वारा महिला आरक्षण विधेयक का मुद्दा उठाए जाने के बाद कांग्रेस और भाजपा सहित 47 राजनीतिक दलों को लिखे उनके पत्र से देश भर में ध्यान आकर्षित किया और उनसे संसद में विधेयक के पारित होने को सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।












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