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सुखबीर बादल बोले- पंजाब में BJP-अमरिंदर नॉन प्लेयर, खेमेबाजी से कांग्रेस बेदम, शिअद ही विकल्प

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव में 25 साल बाद अकाली दल बीएसपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। इसके अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल का कहना है कि पंजाब में बीजेपी और कैप्टन अमरिंदर सिंह नॉन प्लेयर हैं। वहीं कांग्रेस को लेकर उन्होंने कहा कि कैसे वह खेमेबाजी के चलते ढहती जा रही है। आम आदमी पार्टी के मॉडल को सुखबीर सिंह बादल ने विज्ञापन कैंपेन बताया।

Shiromani akali dals sukhbir badal talk on Punjab assembly election 2022, know what he says

सुखबीर बादल ने कहा कि, हमें समझना होगा कि वह अकाली दल और उसके संरक्षक प्रकाश सिंह बादल ही थे जिन्हें पांच बार जनता का जनादेश प्राप्त हुआ। बादल साहब ही अकाली-बीजेपी गठबंधन के आर्किटेक्ट थे और राज्य में लंबे संघर्ष के बाद भाईचारे का यह संबंध मजबूत हुआ था। बादल साहब शांति और सांप्रदायिक सौहार्द के चैंपियन थे और अकाली दल इस विरासत को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

सुखबीर बोले, हमारे पिता पर पंजाबियों को दृढ़ विश्वास है। अकाली दल लोगों से किए गए वादों के साथ खड़ा होने के लिए जाना जाता है। चाहे किसानों को मुफ्त बिजली देना हो या वंचितों को सामाजिक कल्याण लाभ का दायरा बढ़ाना हो अकालियों ने हमेशा अपने वादे पूरे किए हैं। अकाली दल पंजाबियत के साथ भी खड़ा है। यही वजह है कि पंजाबी उस पर भरोसा करते हैं और भविष्य में भी इसी पर भरोसा करेंगे।

अकाली दल ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो पूरे प्रदेश में मौजूद है। आप मालवा क्षेत्र के सिर्फ तीन जिलों में सीमित है और 20 सीटों पर लड़ रही है। दोआबा और माझा बेल्ट में उसकी कोई मौजूदगी नहीं है। कांग्रेस अपने वादों को पूरा करने में विफलता, भ्रष्टाचार और अलग-अलग तरह के माफियाओं को बढ़ावा देने के चलते दिन-ब-दिन चरमराती जा रही है। अंदरूनी कलह से कांग्रेस को भी नुकसान हो रहा है। बीजेपी, कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस, सुखदेव सिंह ढींडसा की संयुक्त मोर्चा और संयुक्त समाज मोर्चा नॉन प्लेयर हैं।

चुनौती देने की बात तो दूर, बीजेपी तो पंजाब में प्लेयर भी नहीं है । इसे जमीनी स्तर पर भी देखा जा सकता है। असंतुष्ट और बदनाम लोगों को शामिल कर लेने से बीजेपी की चुनावी किस्मत नहीं बदलने वाली। कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुखदेव सिंह ढींडसा जैसे 'जीरो' को इकट्ठा करने से उसका चुनावी नतीजा भी जीरो ही होगा।

दिल्ली मॉडल क्या है? दिल्ली के लोगों को इसने क्या दिया? क्या इसने उन्हें कोविड से बचाया? क्यों दिल्ली के लोगों को अब तक पीने का साफ पानी नहीं मिल पा रहा है? केजरीवाल एक भी नया कॉलेज या अस्पताल क्यों नहीं खोल पाए हैं? दिल्ली मे में सरकारी भर्तियां क्यों नहीं हुईं? संविदा कर्मचारियों को नियमित क्यों नहीं किया जाता? ये ऐसे सवाल हैं जिन्हें केजरीवाल बड़ी चतुराई से 850 करोड़ के विज्ञापन देकर छुपाते हैं। दिल्ली मॉडल एक विज्ञापन अभियान है जिसमें एक सौदे के रूप में चुनावी सर्वेक्षण भी शामिल हैं। लोगों को इसके बारे में बताने की जरूरत है...केजरीवाल कैसे पंजाबियों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं।

पंजाब और पंजाबियों के साथ इस भ्रष्ट और घोटालेबाज कांग्रेस सरकार ने पूर्ण रूप से विश्वासघात किया। पंजाबी अब समझ चुके हैं उन्हें पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कैसे धोखा दिया था। कैप्टन ने जो भी वादे किए थे एक भी पूरे नहीं हुए चाहे वह किसानों का पूरा कृषि ऋण माफी हो या फिर युवाओं के लिए घर-घर नौकरी। कांग्रेस ने लीडरशिप में बदलाव लाकर लोगों को बरगलाने की कोशिश की है। चन्नी ने घोषणाओं के अलावा कुछ नहीं किया। उनके भतीजे के आवास से मिले 10 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की जब्ती के साथ ही उनकी भ्रष्ट गतिविधियों का खुलासा हुआ है।

बीएसपी की ताकत समझने के लिए आपको 2019 लोकसभा चुनाव के नतीजे देखने होंगे, खासकर दोआबा बेल्ट में। लगभग दो दशकों से गिनती में न होने के बावजूद यहां के निर्वाचन क्षेत्रों में उसके वफादार वोटर हैं। अकेले चुनाव लड़ने वाली बीएसपी को तब 3.5 फीसदी वोट शेयर मिले थे। अकाली दल ने पिछली बार 1996 में बीएसपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था तब हमारे गठबंधन को 13 में से 11 सीटें मिली थीं।

चरणजीत सिंह चन्नी दलित कार्ड का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कभी भी अनुसूचित जाति समुदाय के लिए बात नहीं की। वह कैबिनेट का हिस्सा थे लेकिन कभी भी एससी छात्रवृत्ति घोटाले के अपराधियों के खिलाफ कोई विरोध या कार्रवाई की मांग नहीं की। उन्होंने तब भी विरोध नहीं किया जब लाखों की संख्या में नीले कार्ड हटा दिए गए थे, जो दलितों और समाज के वंचित वर्गों के लिए सामाजिक कल्याण लाभ सुनिश्चित करते हैं।

यह सवाल कोई नहीं पूछ रहा है। उल्टा पंजाबी यह पूछ रहे हैं कि मजीठिया पर झूठे केस क्यों किए गए? आपको यह भी पूछना चाहिए। क्योंकि सच यह है कि कांग्रेस ने दो डीजीपी और ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन के तीन डायरेक्टरों को बदलकर मजीठिया के खिलाफ झूठा केस किया गया है। यह भी सच है कि फतेहगढ़ साहिब और पटियाला के एसएसपी ने मजीठिया के खिलाफ लिखित में झूठा मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया था। आखिर में यह काम एक अयोग्य डीजीपी को सौंप दिया गया। इस डीजीपी (एस चट्टोपाध्याय) को लेकर हाल ही में एक ऑडियो सामने आया है जिसमें वह ड्रग्स तस्करों का सहयोग करते हुए सुने जा सकते हैं। तो आप देखिए कि सच तो कुछ और ही है।

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