पंजाब: विधानसभा में मान सरकार ने शुरू कराई विश्वास प्रस्ताव पर बहस, भड़के कांग्रेसियों ने किया सेशन का बायकॉट
चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा सेशन के अंतिम दिन की कार्रवाई शुरू होते ही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही गैंगस्टर दीपक टीनू के मामले पर मंत्री अमन अरोड़ा ने जवाब दिया। इसके बाद मान सरकार की तरफ से लाए गए विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो गई। वहीं, विश्वास मत पर चर्चा शुरू होते ही सदन में हंगामा हो गया। विपक्षी विधायक शून्यकाल में चर्चा पर अड़े। मार्शल की टीम ने विपक्षी विधायकों की घेराबंदी की। कांग्रेस विधायकों ने वेल में आकर आप सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सेशन का बायकॉट किया।

बहस के दौरान विधायक शीतल अंगुराल ने कहा कि ऑपरेशन लोटस के तहत अमित शाह से पहले अनुराग ठाकुर से मुलाकात की बात कही गई थी। शीतल अंगुराल ने विजिलेंस में ताजा शिकायत दर्ज करवाई है जिसमें उन्होंने बताया है कि उन्हें ऑफर देने वाले खुद को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट बता रहे थे।
पराली, बिजली और जीएसटी के मुद्दे पर बुलाए गए पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हंगामे के बीच विश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव को लेकर ही राज्यपाल ने सदन बुलाए जाने पर आपत्ति जताई थी लेकिन सरकार ने कैबिनेट की बैठक के मुद्दों को आधार बनाते हुए सदन की मंजूरी मांगी थी। सत्र बुलाए जाने की मंजूरी तो मिली लेकिन सत्र से पहले बुलाई गई बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (बीएसी) की बैठक में विश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया। इसके विरोध में कांग्रेस विधायकों ने खूब हंगामा किया था।
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को चुनौती दी थी कि अगर उनकी सरकार को बहुमत साबित करने की इतनी चाहत है तो वह विधानसभा चुनाव करवाकर दोबारा लोगों का विश्वास हासिल करें। नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने विधानसभा परिसर में कहा कि सरकार विश्वास प्रस्ताव लाकर सदन का समय बर्बाद कर रही है। जिन मुद्दों को लेकर यह सत्र बुलाया गया है, उनमें से किसी भी मुद्दे पर पहले दिन चर्चा नहीं हुई।
इसके बाद बाजवा ने स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को मुख्यमंत्री भगवंत मान के आचरण के खिलाफ सदन में पेश करने के लिए निंदा प्रस्ताव भेजा था। जिसमें बाजवा ने कहा था कि सरकार ने सदन के समक्ष सूचीबद्ध कार्यों का विवरण रखते हुए बताया था कि राज्य सरकार विधायी विचार के लिए जीएसटी, पराली जलाने, बिजली परिदृश्य आदि के मुद्दों को शामिल करेगी। राज्य सरकार ने इन्हीं कार्यों की जानकारी राज्यपाल को भी दी थी। इनके आधार पर सत्र बुलाए जाने की अनुमति मिली है लेकिन इन्हें दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री ने गुप्त तरीके से विश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया।












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