उत्तराखंड में समान सेवा नियमावली के लिए अंतिम तैयारी, इन प्रमुख बिंदुओं पर सौंपी गई रिपोर्ट
देहरादून, 14 अप्रैल: पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में गठित वेतन विसंगति समिति अब समान वेतनमान-पदनाम के पदधारकों के लिए समान सेवा नियमावली बनाने और विभिन्न संवर्गों के पुनर्गठन के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटेगी। समिति कर्मचारी संगठनों की मांगों से जुड़े वेतन विसंगति के मामलों और संशोधित सुनिश्चित करियर प्रोन्नयन योजना (एमएसीपी) से संबंधित सात बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है।

प्रदेश में वेतन विसंगति के मामलों को लेकर आंदोलन पर आमादा कर्मचारी संगठनों की मांगों पर विचार करने को सरकार ने बीते अगस्त माह में वेतन विसंगति समिति का गठन किया था। समिति को संशोधित सुनिश्चित करियर प्रोन्नयन (एमएसीपी) योजना समेत नौ बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार करनी थी। कर्मचारी संगठनों एमएसीपी का विरोध करते हुए एसीपी की बहाली की मांग कर रहे हैं। समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने सात बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी है।
सूत्रों के अनुसार समिति ने एसीपी की बहाली और एमएसीपी को हटाने को लेकर संतुलित रुख रखा है। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट में एमएसीपी और एसीपी को लेकर प्रदेश की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर संस्तुति दी गई है।एसीपी की बहाली पर समिति के हामी नहीं भरने की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन सभी बिंदुओं पर अंतिम निर्णय सरकार को लेना है। समिति इन बिदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर चुकी थी, लेकिन चुनाव के चलते इसे सौंपने में विलंब हुआ।
अब समिति के सामने दो बिंदु शेष रह गए हैं। इनमें समान सेवा नियमावली और संवर्गों का पुनर्गठन शामिल है। समिति अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि इन दोनों बिंदुओं पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इससे संबंधित विभागीय प्रस्तावों, कार्मिक की नियमावली एवं वेतन और सेवा शर्तों का अध्ययन किया जा रहा है।
कार्मिकों से संबंधित इन प्रमुख बिंदुओं पर सौंपी गई रिपोर्ट
- वेतन विसंगति के प्रकरण
- एसीपी व एमएसीपी से संबंधित विसंगतियों का परीक्षण
- वेतन-भत्तों का पुनरीक्षण
- एमएसीपी की व्यवस्था में संशोधन
- राज्य कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के संबंध में परीक्षण के बाद संस्तुति












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