Ganga Expressway: उखड़ने लगा 36,000 करोड़ का एक्सप्रेसवे? सपा, कांग्रेस और AAP ने Video शेयर कर लगाए आरोप

Ganga Expressway Viral Video: उत्तर प्रदेश में हाल ही में देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे में से एक, 'गंगा एक्सप्रेसवे' का उद्घाटन बड़े जोर-शोर से किया गया था। लेकिन अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP), समाजवादी पार्टी (SP) और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से कुछ तस्वीरें और वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें एक्सप्रेसवे के धंसने और टूटने का दावा किया जा रहा है।

इन वायरल पोस्ट्स के आधार पर विपक्षी दलों ने सरकार की निर्माण नीति और सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि जल्दबाजी में बिना पूरी तैयारी के इसका उद्घाटन किया गया और इसके निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है।

Ganga Expressway

आम आदमी पार्टी (AAP) का आरोप

आम आदमी पार्टी ने इस मामले में सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया है। पार्टी का कहना है कि जिस गंगा एक्सप्रेसवे का प्रधानमंत्री मोदी ने बड़े जोर-शोर से उद्घाटन किया था और जिसके लिए भाजपा ने भारी प्रचार, रील और विज्ञापन बनवाए थे, अब उसी एक्सप्रेसवे के निर्माण में भ्रष्टाचार से जुड़े वीडियो सामने आ रहे हैं। 'आप' ने सवाल खड़ा किया है कि इस गंभीर मामले की जांच कौन कर रहा है और इसके लिए जिम्मेदार दोषियों पर क्या कार्रवाई की जाएगी? पार्टी के मुताबिक, देश की जनता इस पर जवाब चाहती है।

समाजवादी पार्टी (SP) का आरोप

समाजवादी पार्टी मीडिया सेल ने इस घटना को 'भाजपा के भयंकर भ्रष्टाचार का नजारा' करार दिया है। सपा ने आरोप लगाया है कि जनता को दुर्घटनाओं और मौत के मुंह में धकेलने के लिए ऐसी खराब गुणवत्ता वाली सड़क बनाई गई है। पार्टी का दावा है कि कुछ ही दिन पहले उद्घाटित हुआ यह एक्सप्रेसवे धंसने और टूटने लगा है, जिससे हादसे हो रहे हैं। मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए सपा ने कहा कि 'जीरो टॉलरेंस' का भाषण देने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (आदित्यनाथ बिष्ट ठाकुर जी) खुद इस भ्रष्ट व्यवस्था के साझीदार और जनक हैं, जो यूपी को लूटकर खोखला कर रही है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस का आरोप

उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने इसे महज 'क्रेडिट' लेने की राजनीति का नतीजा बताया है। कांग्रेस का कहना है कि बड़े तड़क-भड़क और तामझाम के साथ 29 अप्रैल को जिस गंगा एक्सप्रेसवे का प्रधानमंत्री मोदी ने फीता काटा था, उसका सच अब सबके सामने आ चुका है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बिना पूरी तैयारी के और बेहद घटिया क्वालिटी के साथ सिर्फ श्रेय लेने की जल्दबाजी में यह काम किया गया, जिसका खामियाजा आज राज्य की जनता भुगतने को मजबूर है। कांग्रेस के मुताबिक, भाजपा सरकार ने प्रदेश में विकास करने के बजाय सिर्फ विनाश ही किया है।

एक्सप्रेसवे का बैकग्राउंड और आर्थिक महत्व

इस विवाद के बीच, प्रशासनिक और उद्योग जगत के स्तर पर इस एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए एक गेम-चेंजर माना जा रहा है। 594 किलोमीटर लंबा यह गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ को सीधे प्रयागराज से जोड़ता है और यह कुल 12 जिलों से होकर गुजरता है।

सरकारी अनुमानों और उद्योग जगत के जानकारों के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह चालू होने से पूरे उत्तर प्रदेश में माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) का समय काफी कम होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इससे सालाना लॉजिस्टिक्स लागत पर 30,000 करोड़ रुपये तक की बड़ी बचत हो सकती है। यह छह-लेन वाला एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है। इसे पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गलियारे के तौर पर देखा जा रहा है।

  • राज्य के भीतर माल ढुलाई: उत्तर प्रदेश में अभी सालाना लगभग 24.5 से 26 करोड़ टन माल की ढुलाई राज्य के भीतर ही होती है। इसमें मुख्य रूप से अनाज, निर्माण सामग्री और खुदरा सामान शामिल होता है।
  • राज्य से बाहर जाने वाला माल: राज्य से बाहर जाने वाले माल की मात्रा 13.5 से 15.5 करोड़ टन होने का अनुमान है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, चमड़ा और कृषि उत्पाद प्रमुख हैं।

औद्योगिक विकास और निवेश के नए रास्ते

राज्य के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने बताया कि यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक्स, कृषि, पर्यटन और रोज़गार सृजन को गति देकर राज्य की अर्थव्यवस्था में 'एक नया अध्याय' लिखेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 अप्रैल को हरदोई में किया था। इसके शुरू होने से मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा का समय लगभग 10-12 घंटे से घटकर महज 5-8 घंटे रह गया है।

उन्होंने कहा कि, 'यह एक्सप्रेसवे सिर्फ़ एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि एक एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स गलियारा है। माल की तेज़ आवाजाही और परिवहन लागत में कमी से सालाना लॉजिस्टिक्स पर 25,000-30,000 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है।'

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस गलियारे के किनारे राज्य को पहले ही लगभग 46,660 करोड़ रुपये के 987 निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। इसके तहत 6,507 एकड़ ज़मीन पर 12 औद्योगिक केंद्र (नोड्स) विकसित किए जा रहे हैं। विनिर्माण, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स, भंडार गृह (वेयरहाउसिंग) और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों को इससे भारी फ़ायदा होने की उम्मीद है।

यूपी के एक्सप्रेसवे पर अब AI का पहरा: क्या स्विस तकनीक से खत्म होंगे सड़क हादसे?
यूपी के एक्सप्रेसवे पर अब AI का पहरा: क्या स्विस तकनीक से खत्म होंगे सड़क हादसे?
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+