प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से ओडिशा के किसानों को हो फायदा, इसके लिए सरकार ने तैयार किया प्लान
ओडिशा सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) में बदलावा चाहती है। सरकार का कहना है कि स्थानीय आपदा जोखिम श्रेणी के तहत बाढ़ और जंगली जानवरों के हमले के कारण को भी इसमें शामिल किया जाए।
दरअसल ओडिशा चक्रवात से प्रभावित होने वाला राज्य है, राज्य सरकार कृषि मंत्रालय से केंद्र द्वारा जारी पीएमएफबीवाई दिशानिर्देशों की स्थानीय आपदा जोखिम श्रेणी के तहत बाढ़ के कारण धान और गन्ने की फसलों को हुए नुकसान को शामिल करने का अनुरोध कर रही है।

धान राज्य में उगाई जाने वाली एक प्रमुख फसल है जो चक्रवातों के प्रति संवेदनशील है, इसलिए कृषक समुदाय के एक बड़े हिस्से को फसल बीमा के रूप में फसल क्षति मुआवजा नहीं मिल रहा है। कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, पीएमएफबीवाई के तहत स्थानीय आपदा को कवर करने के लिए राज्य सरकार के बार-बार दिए गए सुझावों को केंद्र ने नजरअंदाज कर दिया है।
अधिकारी के मुताबिक पीएमएफबीवाई दिशानिर्देशों के अनुसार, जंगली जानवरों के हमले के कारण फसल के नुकसान की कवरेज के लिए प्रीमियम सब्सिडी वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा वहन की जाती है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 80:20 के अनुपात में प्रीमियम सब्सिडी साझा करने का राज्य सरकार का प्रस्ताव अभी तक स्वीकार नहीं किया गया है।
पीएमएफबीवाई के दिशानिर्देशों के अनुसार जंगली जानवरों के हमलों के कारण फसल के नुकसान के लिए राज्य अतिरिक्त कवरेज प्रदान करने पर विचार कर सकते हैं, जहां जोखिम पर्याप्त माना जाता है और पहचानने योग्य है। ऐड-ऑन कवरेज उन किसानों के लिए वैकल्पिक होगा जो लागू अनुमानित प्रीमियम वहन करेंगे। हालांकि राज्य सरकारें इस कवरेज पर अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान करने पर विचार कर सकती हैं, जहां भी सूचित किया जाए।
दिशानिर्देशों में आगे कहा गया है कि प्रीमियम सब्सिडी केंद्र और राज्य द्वारा 50:50 के अनुपात में साझा की जाती है, जो चक्रवात और बाढ़ सहित आवर्ती आपदाओं के मद्देनजर राज्य पर बोझ है। राज्य सरकार ने केंद्र से शेयरिंग पैटर्न बदलने और प्रीमियम सब्सिडी लागत का 80 प्रतिशत वहन करने का अनुरोध किया है।












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