ओडिशा सरकार ने ट्रांसजेंडरों के लिए जारी की समान अवसर नीति, जानिए डिटेल
भुवनेश्वर, 06 अक्टूबर: ओडिशा सरकार ने ट्रांसजेंडरों के लिए समान अवसर नीति जारी की है, जिसके परिणामस्वरूप शिकायत दर्ज कराने के 15 दिनों के भीतर उनकी शिकायतों के निवारण के लिए एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। नीति यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि केवल सेक्शुअल ओरिएंटेशन के आधार पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को किसी भी अवसर से वंचित न किया जाए। ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ किसी भी पद, कोर्स ,पदोन्नति, ट्रांस्फर पोस्टिंग स्तर के मामले में भेदभाव नहीं किया जाएगा।

कोई भी कर्मचारी जो नीति का उल्लंघन करता है या किसी भी तरह से किसी भी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ भेदभाव करता है, या उन्हें परेशान करता है तो उसके साथ सेवा नियमों में निर्धारित तरीके से निपटा जाएगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि यह विभाग उम्र, लिंग, यौन अभिविन्यास, रंग, विकलांगता, वैवाहिक स्थिति, राष्ट्रीयता, जाति और धर्म के आधार पर बिना किसी भेदभाव के समान रोजगार के अवसर प्रदान करेगा।
सब-इंस्पेक्टर के पद के लिए आवेदन करने की अनुमति
दरअसल इस साल जून में, ओडिशा पुलिस ने ट्रांसजेंडरों को सब-इंस्पेक्टर के पद के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी, जबकि राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पद के लिए ट्रांसजेंडरों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। ओडिशा पुलिस में अब तक 26 ट्रांसजेंडर लोगों ने सब-इंस्पेक्टर के पद के लिए आवेदन किया है, जबकि लगभग 20 ने रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पद के लिए आवेदन किया है। वहीं राज्य में फिलहाल शहरी विकास विभाग में कुल करीब 40 ट्रांसजेंडर कार्यरत हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में 4,316 ट्रांसजेंडर परिवार
ओडिशा में सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना (2011) के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में 4,316 ट्रांसजेंडर परिवार और शहरी क्षेत्रों में 463 ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं। हालांकि, उनकी वर्तमान संख्या बहुत अधिक होगी, क्योंकि अब उनके पास भारत के सुप्रीम कोर्ट के साथ अपनी ट्रांसजेंडर पहचान को व्यक्त करने का साहस है, जो किसी व्यक्ति के स्व-पहचाने गए लिंग को पुरुष, महिला या तीसरे लिंग के रूप में कानूनी मान्यता प्रदान करता है।












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