झारखंड में मंत्री और ताकतवर, अब 2.5 से 15 करोड़ रुपये तक की योजनाओं को मंजूरी देने का अधिकार

झारखंड सरकार ने मंत्रियों के पक्ष में एक अहम फैसला लिया है। योजनाओं को स्वीकृति देने के मामले में सचिवों के अधिकार घटा दिए गए हैं। वहीं मंत्रियों को और पावरफुल बना दिया गया है। अब तक 5 करोड़ रुपए तक की योजनाओं को स्वीकृति देने का अधिकार विभागीय सचिवों के पास था। अब राज्य सरकार इसमें कटौती कर ढाई करोड़ तक अधिकार देने जा रही है।

वहीं, मंत्रियों को ढाई करोड़ से 15 करोड़ तक की योजनाओं को स्वीकृत करने का अधिकार मिलेगा। अभी मंत्रियों के पास 5 करोड़ से 15 करोड़ रुपए तक की योजनाओं को स्वीकृत करने का अधिकार था। यह व्यवस्था 2015 से चली आ रही थी।

CM Hemant Soren

महंगाई बढ़ने और रुपए के अवमूल्यन के कारण सरकार समय-समय पर सचिवों और मंत्रियों की योजना स्वीकृति राशि की सीमा बढ़ाती रही है। राज्य में पहली बार ऐसा हुआ है कि पूर्व से चली आ रही स्वीकृति की राशि की सीमा घटाई गई है। कैबिनेट से मंजूरी लेने के बाद सरकार ने कार्यपालिका नियमावली में संशोधन के लिए राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से स्वीकृति मांगी थी। राज्यपाल से 18 सितंबर को मंजूरी दे दी है। अब कैबिनेट सचिवालय अधिसूचना जारी करेगा।

6 सितंबर को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव पर मंजूरी ली थी। इसके बाद कार्यपालिका नियमावली में संशोधन की जरूरत थी। कार्यपालिका नियमावली में संशोधन के लिए राज्यपाल की स्वीकृति की आवश्यकता होती है। सरकार ने इसे राजभवन भेजा था। राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने राज्य सरकार के प्रस्ताव पर अपनी मंजूरी दे दी है।

जानकारों के अनुसार, नई व्यवस्था से अधिकांश योजनाओं की फाइलें अब मंत्रियों के पास जाएंगी। वही स्वीकृत करेंगे। ढाई करोड़ रुपए के दायरे में छोटी योजनाएं ही आती हैं। सामान्य से मध्य और बड़ी योजनाएं ढाई करोड़ से अधिक की होती हंै। यह सब मंत्रियों के दायरे में ही जाएंगी। सचिव ढाई करोड़ से कम की योजनाओं पर स्वीकृति देंगे।

15 करोड़ से अधिक और 25 करोड़ तक की योजनाओं पर विभागीय मंत्री की स्वीकृति जरूरी है। इसके बाद इसे राज्य योजना प्राधिकृत समिति के पास भेजा जाता है। समिति की अनुशंसा पर फाइल योजना मंत्री के पास जाती है। इस प्रस्ताव पर फिलहाल कोई फेरबदल नहीं किया गया है। केवल सचिव और विभागीय मंत्री के अधिकार क्षेत्र में ही बदलाव हुआ है।

पड़ोसी राज्य बिहार में विभागीय सचिव को 5 करोड़ रुपए और मंत्रियों को 5 करोड़ से 15 करोड़ रुपए तक की योजनाओं काे स्वीकृति देने का अधिकार है। झारखंड में भी अब तक ऐसी ही व्यवस्था थी। 8 साल बाद सचिवों के अधिकारों में कटौती की गई है। बड़ा सवाल है कि महंगाई बढ़ने और रुपए के अवमूल्यन के दौर में योजनाओं की राशि की सीमा बढ़ाने के बजाय सचिवों के अधिकार क्षेत्र में कटौती की जा रही है। मंत्रियों का दायरा बढ़ाया गया है।

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