झारखंड ग्रामीण विकास विभाग: अगले साल 15 नवंबर तक राज्य में बनाए जाएंगे एक लाख सिंचाई कूप
इस योजना की कुल लागत 500 करोड़ रुपये है। इसमें वित्तीय वर्ष 2023-24 में 250 करोड़ रुपये और वित्तीय वर्ष 2024-25 में 250 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

ग्रामीण विकास विभाग के तहत मनरेगा व राज्य योजना से चलनेवाले बिरसा सिंचाई कूप संवर्द्धन मिशन द्वारा राज्यभर में दो चरणों में एक लाख सिंचाई कूप बनाए जाएंगे। सरकार ने कूप निर्माण के लिए डेटलाइन तय कर दी है। इसके तहत 15 नवंबर 2024 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस योजना पर कुल 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें वित्तीय वर्ष 2023-24 में 250 करोड़ और 2024-25 में 250 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। दोनों वित्तीय वर्ष में 50-50 हजार कुओं के निर्माण का लक्ष्य है। ग्रामीण विकास विभाग ने इससे संबंधित संकल्प जारी कर दिया है। जिसमें कहा गया है कि राज्य में मनरेगा के तहत क्रियान्वित अति महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना के अंतर्गत पौधों की सिंचाई में यह योजना सहायक सिद्ध होने के साथ ही एक फसली खेती को दाे फसली खेती में परिवर्तित करने में अत्यधिक उपयोगी साबित हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए दाे वित्तीय वर्ष में एक लाख सिंचाई कूप तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
सिंचाई कूप निर्माण योजना के अनुपालन के लिए प्रखंड एवं जिला स्तर पर गुणवत्ता निगरानी के लिए समिति का गठन किया गया है। जिसमें प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी अध्यक्ष और प्रखंड कृषि पदाधिकारी सदस्य सचिव होंगे। इसी प्रकार जिला स्तरीय निगरानी समिति में उप विकास आयुक्त जिला कार्यक्रम समन्वयक अध्यक्ष होंगे जबकि जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के निदेशक इसके सदस्य सचिव होंगे।
अगले दो साल में एक लाख सिंचाई कूप बनाने के लिए विभाग आवश्यकता और मांग के अनुरूप जिलावार और पंचायतवार लक्ष्य निर्धारण करेगा। संकल्प में कहा गया है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में श्रम एवं सामग्री का अनुपात 60:40 बनाए रखना अनिवार्य होगा। इसके अनुपालन का दायित्व संबंधित प्रखंड के बीडीओ, पंचायत सचिव व मुखिया पर संयुक्त रूप से हाेगी। अगर, किसी कारणवश ग्राम पंचायत में श्रम एवं सामग्री का अनुपात 60:40 नहीं हो पाया, तो डीडीसी सह जिला कार्यक्रम समन्वयक की अनुमति से मनरेगा गाइडलाइन के आधार पर उस अनुपात का अनुपालन करना आवश्यक होगा।












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