Faridabad Crane Accident Reason: जेवर एयरपोर्ट फ्लाईओवर निर्माण में कैसे हुआ भीषण हादसा? गिरी क्रेन-3 की मौत
Faridabad Crane Accident: नोएडा-फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेसवे पर गुरुवार (4 जून) दोपहर एक बड़ा निर्माण हादसा हो गया। जेवर एयरपोर्ट से जुड़े निर्माणाधीन फ्लाईओवर पर गार्डर उठाने के लिए लगाई गई भारी क्रेन अचानक पलट गई। हादसे में 3 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य क्रेन के नीचे दब गए।
घटना पनहेड़ा खुर्द गांव के पास हुई, जहां तेज बारिश के बाद काम शुरू किया गया था। यह हादसा न सिर्फ मजदूरों की जान ले गया, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा मानकों पर फिर सवाल खड़े कर गया है।

Faridabad Crane Accident Reason: हादसा कैसे हुआ?
दोपहर के समय क्षेत्र में तेज बारिश हुई, जिससे निर्माण स्थल पर भारी कीचड़ और फिसलन हो गई। बारिश थमने के कुछ देर बाद मजदूर दोबारा काम पर लग गए। गार्डर (बड़ी धरातलीय बीम) उठाने का काम चल रहा था। इसी दौरान क्रेन का संतुलन बिगड़ गया और वह तेजी से पलट गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय वहां 6-7 मजदूर मौजूद थे। क्रेन के नीचे 3-4 मजदूर दब गए। आसपास काम कर रहे अन्य मजदूरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू कर दिया। पुलिस, निर्माण कंपनी के स्टाफ और ग्रामीणों ने मिलकर मशीनों की मदद से क्रेन को हटाने और दबे लोगों को निकालने का प्रयास किया। घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां 3 मजदूरों को मृत घोषित कर दिया गया।
Jewar Airport Connectivity Project: जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट का महत्व
यह हादसा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी महत्वाकांक्षी कनेक्टिविटी परियोजना का हिस्सा है। नोएडा एयरपोर्ट (जेवर) को दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने के लिए एक्सप्रेसवे और फ्लाईओवर का तेजी से निर्माण चल रहा है।
फरीदाबाद से जेवर तक का यह कॉरिडोर आने वाले समय में हजारों वाहनों की आवाजाही का मुख्य मार्ग बनेगा। प्रोजेक्ट में कई फ्लाईओवर, एलिवेटेड रोड और अंडरपास शामिल हैं। ऐसे में निर्माण की रफ्तार तेज है, लेकिन सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान न देने के आरोप भी लगते रहे हैं।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक:
- बारिश के बाद मिट्टी नरम और दलदली हो जाना
- क्रेन का असंतुलित होना या ओवरलोडिंग
- जमीनी स्तर पर पर्याप्त सपोर्ट न होना
- तेजी में काम शुरू करना
प्रशासन और पुलिस ने हादसे के सभी पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। मजदूरों की मौत के कारणों, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और कंपनी द्वारा फॉलो किए गए प्रोटोकॉल की जांच की जाएगी। फिलहाल निर्माण कार्य रोक दिया गया है।
बचाव कार्य और मौजूदा स्थिति
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। एनडीआरएफ या फायर ब्रिगेड की टीमों को भी बुलाया गया। क्रेन के भारी वजन के कारण बचाव में समय लगा। मृतकों की पहचान कर परिवारों को सूचित किया जा रहा है। घायल मजदूरों का इलाज चल रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले भी छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं, लेकिन इतना गंभीर हादसा पहली बार हुआ है।
भारत में निर्माण हादसों का बढ़ता ग्राफ
यह हादसा अकेला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में देश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के दौरान कई क्रेन पलटने, स्ट्रक्चर गिरने और मजदूरों की मौत के मामले सामने आए हैं।
- निर्माण श्रमिकों की सुरक्षा के लिए ISS (Indian Standards) और OSH (Occupational Safety and Health) गाइडलाइंस मौजूद हैं।
- फिर भी ज्यादातर मामलों में बारिश के बाद बिना जांच के काम शुरू करना, पुरानी मशीनरी का इस्तेमाल और अपर्याप्त ट्रेनिंग मुख्य कारण बनते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मॉनसून सीजन में ऐसे प्रोजेक्ट्स में अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। क्रेन ऑपरेशन के लिए मौसम की जांच, सॉइल टेस्टिंग और सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए।
फरीदाबाद का यह क्रेन हादसा विकास की दौड़ में मानवीय कीमत की याद दिलाता है। जेवर एयरपोर्ट भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का प्रतीक है, लेकिन यह विकास तभी सार्थक होगा जब निर्माण स्थलों पर हर मजदूर की जान सुरक्षित हो। प्रशासन से अपील है कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न दोहराए जाएं।













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