Alka Gurjar कौन हैं? BJP ने राज्यसभा चुनाव के लिए राजस्थान से क्‍यों बनाया उम्‍मीदवार, क्‍या है रणनीति

Who is Alka Gurjar: बीजेपी ने राजस्थान से राज्यसभा चुनावों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और राष्ट्रीय वरिष्ठ सचिव अलका गुर्जर को चुनाव मैदान में उतारा है। डॉ. सतीश पूनिया राजस्थान की राजनीति में दो दशक से भी अधिक समय से एक प्रमुख जाट नेता रहे हैं और 2023 के विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद, पार्टी ने उन पर भरोसा बनाए रखा।

वहीं लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पार्टी राज्यसभा भेज सकती है, लेकिन बीजेपी ने सभी कयासों को पीछे छोड़ते हुए राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. अलका गुर्जर और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया को उम्‍मीदवार बनाकर बड़ी चाल चल दी है। जानिए कौन हैं अलका गुर्जर और क्‍यों भाजपा ने इन्‍हें बनाया राज्‍यसभा चुनाव के मैदान में उतारा है?

Who is Alka Gurjar

Who is Alka Gurjar: कौन हैं अलका गुर्जर?

अलका गुर्जर का जन्म 21 फरवरी 1961 को हुआ। अलका वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राष्ट्रीय महासचिव के रूप में कार्यरत हैं और इसके साथ ही दिल्ली में भाजपा की सह-प्रभारी भी हैं। राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहीं अलका गुर्जर ने वर्ष 2013 से 2018 तक बांदीकुई विधानसभा क्षेत्र से विधायक (एमएलए) रहीं।

इसके बाद उन्हें भाजपा संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। उन्होंने प्रदेश स्तर के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी संगठनात्मक दायित्व निभाए हैं और पार्टी के कई राज्यों में संगठन को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

अलका गुर्जर के पति कौन हैं?

भाजपा की प्रमुख महिला नेताओं में गिनी जाने वाली अलका गुर्जर के पति डॉ. नाथू सिंह गुर्जर भी पिछली बीजेपी सरकार में मंत्री रहे और पार्टी में वरिष्ठ सांगठनिक भूमिकाओं में थे।

अलका गुर्जर को भाजपा ने क्‍यों बनाया उम्‍मीदवार?

अलका गुर्जर को उम्मीदवार बनाना गुर्जर समुदाय में बीजेपी की पहुंच को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही, यह "नारी वंदन" जैसी पहलों के माध्यम से महिला नेतृत्व पर पार्टी के जोर को भी रेखांकित करता है।

भाजपा ने राजस्‍थान के दो समुदायों को साधा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने इन नामांकनों के जरिए राजस्थान के दो प्रभावशाली समुदायों, जाट और गुर्जर, को साधते हुए सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की है। इन समुदायों का कई विधानसभा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण चुनावी प्रभाव है, जिसे 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस के पास पहले से ही इन दोनों समुदायों के प्रमुख नेता मौजूद हैं। राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा एक अग्रणी जाट चेहरा हैं, जबकि पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पार्टी के सबसे प्रभावशाली गुर्जर नेताओं में से एक हैं।

राजेंद्र राठौड़ को मिली निराशा

हालांकि, बीजेपी में राजेंद्र राठौड़ को भी राज्यसभा भेजने की अटकलें थीं, लेकिन उन्हें एक बार फिर मौका नहीं मिला है। इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें किसी बड़ी सांगठनिक या चुनावी भूमिका के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।

कब होगा राज्‍यसभा चुनाव?

राज्यसभा की तीन सीटों के लिए मतदान 18 जून को होगा और मतगणना भी उसी दिन की जाएगी। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, बीजेपी सांसद राजेंद्र गहलोत और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल 21 जून को समाप्त होने के कारण ये रिक्तियां उत्पन्न हुई हैं।

क्‍या भाजपा आसानी से जीत जाएंगी ये चुनाव?

200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में अपनी मौजूदा संख्या बल के आधार पर, बीजेपी इन तीन में से दो सीटें आसानी से जीतने की स्थिति में है, जबकि कांग्रेस को शेष एक सीट मिलने की उम्मीद है।

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