बिजली की कमी दूर करने के लिए हरियाणा सरकार ने बनाई सौर ऊर्जा रणनीति, 2030 तक रखा लक्ष्य
चंडीगढ़, 17 जुलाई। बिजली की कमी दूर करने के लिए हरेडा ने वर्ष 2023 से 2030 तक की योजना तैयार की है। इसके तहत हर साल प्रदेश में 3500 मेगावाट सौर ऊर्जा के प्लांट लगाए जाएंगे। इनमें ग्राउंड माउंटेड ग्रिड कनेक्टेड सोलर पावर प्लांट, रूफटॉप ग्रिड कनेक्टेड, ऑफ ग्रिड सोलर पावर प्लांट, सोलर पंप ऑफ ग्रिड एवं ऑन ग्रिड, सोलर पावर प्लांट्स ऑन कनाल सिस्टम और केपटिव सोलर पावर प्लांट शामिल हैं। सरकार की ओर से वर्ष 2016 में सोलर पावर पॉलिसी बनाई गई थी। विभाग को वर्ष 2021-22 में 4800 मेगावाट सौर ऊर्जा तैयार करनी थी, लेकिन महज 600 मेगावाट ही बिजली तैयार हो पाएगी।

वहीं प्रदेश में करीब 15 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। धान की पराली पर आधारित प्लांट लगाकर बिजली तैयार की जाएगी। इसके लिए 600 मेगावाट बिजली तैयार करने की योजना है। पांच-पांच मेगावाट के करीब 120 प्लांट लगाए जाएंगे। 2023 के धान सीजन से किसानों से पराली खरीदनी शुरू होगी।
नहर किनारे बनेगी 200 मेगावाट बिजली: हरियाणा के उत्तरी एवं पूर्वी जिलों में नहरों के किनारों पर सोलर बिजली का उत्पादन नहीं हो पाएगा। ऐसे में अब दक्षिण पश्चिम के जिलों में यह योजना तैयार होगी। इनमें सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, नारनौल और मेवात आदि जिले शामिल होंगे। इनमें 200 मेगावाट सौर ऊर्जा पैदा करने की योजना है।
खेतों में तैयार होगी 2000 मेगावाट बिजली
हरेडा ने 2000 मेगावाट बिजली किसानों के खेतों में तैयार करने की योजना बनाई है। इस पर इसी साल काम शुरू होना है। इसके तहत 1000 किसानों के यहां दो-दो मेगावाट के बिजली प्लांट लग सकेंगे। यह बिजली दूसरे किसान प्रयोग कर सकेंगे। इस योजना में कंपनियां भी शामिल हो सकेंगी और किसान स्टेक होल्डर होंगे
सौर ऊर्जा को लेकर अगले 8 साल की कार्य योजना तैयार की गई है। इसके तहत हर साल 3500 मेगावाट बिजली तैयार होगी। 1000 किसानों के खेतों में 2-2 मेगावाट के सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की योजना भी बनाई गई है। सरकार की ओर से अनुमति मिलने के बाद योजनाओं पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
-स्वतंत्र कुमार, चेयरमैन, हरेडा।












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