नगर निगम के चुनाव को लेकर शहर में चर्चा, आम आदमी पार्टी ने कही ये बात

केंद्रीय चुनाव आयोग ने जालंधर लोकसभा हेतु उपचुनाव की तारीख की घोषणा तो कर दी है परंतु राज्य में नगर निगमों के चुनाव लटकते चले जा रहे हैं। c

भगवंत मान

केंद्रीय चुनाव आयोग ने जालंधर लोकसभा हेतु उपचुनाव की तारीख की घोषणा तो कर दी है परंतु राज्य में नगर निगमों के चुनाव लटकते चले जा रहे हैं। अब शहर में नई चर्चा शुरू हो गई है जिसके अनुसार कहा जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के ही कुछ नेता निगम चुनावों को और लटकाकर अगस्त के अंत तक ले जाना चाह रहे हैं ताकि रक्षाबंधन के आसपास ही यह चुनाव हो सकें। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि अगस्त महीने में आम आदमी पार्टी अपना सबसे बड़ा चुनावी वायदा पूरा कर सकती है जिसके तहत राज्य की हर महिला को प्रतिमाह एक हजार रुपए दिए जाने की घोषणा की जाएगी। वैसे कहा जा रहा है कि यह वायदा पूरा करते समय सरकार कुछेक शर्तों को जोड़ सकती है।

गौरतलब है कि अभी तक निगम चुनावों हेतु वार्डबंदी तक फाइनल नहीं हुई है। निगम चुनाव संबंधी चर्चा करने वालों का यह भी मानना है कि अमृतपाल प्रकरण के चलते भी आम आदमी पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है क्योंकि राज्य में लॉ एंड आर्डर की स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही।

लोगों की मुश्किलों की सुनवाई नहीं कर रहे निगम के अफसर
जिस प्रकार जालंधर नगर निगम के चुनावों में कई महीने की देरी होने जा रही है उससे शहर के लोगों को कई प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। शहर के वार्डों में कोई पार्षद इत्यादि न होने से लोगों को अपनी समस्याएं निगम तक पहुंचाने में मुश्किल आ रही है। दूसरी बड़ी बात यह है कि इस समय नगर निगम के ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी लापरवाह बने हुए हैं जिस कारण लोगों की ज्यादातर शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो पा रही। उपचुनाव के मद्देनजर भी सरकारी मशीनरी चुनावी कार्यों में व्यस्त रहेगी, ऐसे में भी लोगों की मुश्किलों में वृद्धि होनी स्वाभाविक ही है। लोगों को विभिन्न दस्तावेजों इत्यादि पर पार्षदों के हस्ताक्षर इत्यादि करवाने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

'आप' के जालंधर यूनिट में है एकता का अभाव
विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड तोड़ बहुमत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी की सरकार में चाहे संगठन एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता दिख रहा है परंतु जालंधर यूनिट की बात करें तो यहां आप नेताओं के बीच परस्पर एकता का अभाव नजर आ रहा है। दो विधायक सत्तापक्ष से और दो विपक्ष से हैं, ऐसे में चारों विधानसभा क्षेत्रों का आपसी तालमेल भी गड़बड़ा रहा है। छावनी विधानसभा क्षेत्र में पहले दो ग्रुप हुआ करते थे जिनमें से एक का नेतृत्व मैडम राजविंदर कौर और दूसरे का सुरेंद्र सोढ़ी का था परंतु अब कहीं न कहीं जगबीर बराड़ ग्रुप भी नजर आना शुरू हो गया है। इसी प्रकार जिस तरह से वैस्ट विधानसभा क्षेत्र में अकाली दल और कांग्रेस के उच्च नेता शामिल करवाए जा रहे हैं, उससे भी तालमेल बिगड़ता नजर आने लगा है। माना जा रहा है कि 'आप' के जालंधर यूनिट में आपसी मतभेद टिकट वितरण के समय खुलकर सामने आ सकते हैं। वैसे यह मतभेद वार्डबंदी की प्रक्रिया दौरान भी दिख रहे हैं।

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