CJP Protest Delhi: जब आंदोलनों से निकलीं पार्टियों ने बदल दी सत्ता, क्या 'कॉकरोच जनता पार्टी' दोहराएगी इतिहास?

CJP Protest Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर इस 'GEN Z प्रोटेस्ट' ने सोशल मीडिया से निकलकर सड़कों तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। कुछ ही दिनों पहले तक जिसे इंटरनेट पर एक व्यंग्य और मजाक के रूप में देखा जा रहा था, वह अब लाखों युवाओं के समर्थन के साथ एक बड़े सामाजिक-राजनीतिक अभियान का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत उस समय हुई जब सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के दौरान CJI द्वारा कुछ युवाओं को लेकर की गई टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। इसके बाद अभिजित दिपके ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कॉकरोच जनता पार्टी नाम से अभियान शुरू किया।

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देखते ही देखते इसके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करोड़ों फॉलोअर्स जुड़ गए और अब यह शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों को लेकर खुलकर आवाज उठा रहा है।

हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि कॉकरोच जनता पार्टी भविष्य में चुनावी राजनीति में कदम रखेगी या नहीं, लेकिन भारतीय राजनीति के इतिहास में कई बड़े राजनीतिक दल जन आंदोलनों से ही जन्मे और बाद में सत्ता तक पहुंचे। आइए जानते हैं उन प्रमुख राजनीतिक दलों के बारे में जो किसी न किसी आंदोलन से निकलें...

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM): अलग राज्य आंदोलन से सत्ता तक

झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना वर्ष 1973 में अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर हुई थी। बिनोद बिहारी महतो, ए.के. राय और शिबू सोरेन इसके प्रमुख चेहरे थे। आदिवासी अधिकारों और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे पर शुरू हुआ यह आंदोलन करीब 27 वर्षों तक चला।

आंदोलन के दौरान जनसभाएं, पदयात्राएं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए लोगों को जोड़ा गया। आखिरकार 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ और बाद में शिबू सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री बने।

जनता पार्टी: इमरजेंसी विरोधी आंदोलन का परिणाम

1975 में लगी इमरजेंसी के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन हुआ। लोकनायक जयप्रकाश नारायण इस आंदोलन का चेहरा बने। लोकतंत्र बचाने की इस लड़ाई ने विभिन्न विपक्षी दलों को एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया। जनवरी 1977 में जनता पार्टी का गठन हुआ और उसी वर्ष हुए आम चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर पहली गैर-कांग्रेसी सरकार केंद्र में बनी। मोरारजी देसाई देश के प्रधानमंत्री बने। यह भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जाता है।

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बहुजन समाज पार्टी (BSP): सामाजिक न्याय के आंदोलन से उभार

बहुजन समाज पार्टी की स्थापना 1984 में कांशीराम ने दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को राजनीतिक स्वरूप देने के लिए की थी। बाद में मायावती इस आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरीं। संगठन ने गांव-गांव सदस्यता अभियान चलाया और सामाजिक न्याय के मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन जुटाया। परिणामस्वरूप मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं और BSP राष्ट्रीय राजनीति की प्रमुख ताकतों में शामिल हुई।

असम गण परिषद (AGP): छात्र आंदोलन से सरकार तक

असम में अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर 1979 से शुरू हुआ आंदोलन छह वर्षों तक चला। इस आंदोलन का नेतृत्व ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के नेताओं ने किया। 1985 में असम गण परिषद (AGP) का गठन हुआ। उसी वर्ष असम समझौता हुआ और AGP सत्ता में आ गई। प्रफुल्ल महंत महज 32 वर्ष की उम्र में मुख्यमंत्री बने। यह छात्र आंदोलन से निकली सबसे सफल राजनीतिक कहानियों में से एक मानी जाती है।

तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS): अलग राज्य की मांग से जन्मी पार्टी

आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना राज्य की मांग लंबे समय से चल रही थी। इस आंदोलन को राजनीतिक दिशा देने के लिए के. चंद्रशेखर राव (KCR) ने 2001 में तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) बनाई। करीब 13 सालों तक चले आंदोलन के बाद 2014 में तेलंगाना राज्य का गठन हुआ और KCR पहले मुख्यमंत्री बने। बाद में पार्टी का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति (BRS) कर दिया गया।

आम आदमी पार्टी (AAP): जन लोकपाल आंदोलन से राजनीति तक

2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुए जन लोकपाल आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान खींचा। अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले इस आंदोलन में अरविंद केजरीवाल प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल थे। आंदोलन के बाद 2012 में आम आदमी पार्टी का गठन हुआ। सोशल मीडिया, स्वयंसेवकों और जनसभाओं के माध्यम से पार्टी ने तेजी से समर्थन हासिल किया। 2013 में AAP ने दिल्ली की सत्ता में प्रवेश किया और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने।

क्या इतिहास दोहराएगी कॉकरोच जनता पार्टी?

अगर हम 'आम आदमी पार्टी' (AAP) के उदय को देखें, तो उसने साल 2011-13 के दौर में फेसबुक और सोशल मीडिया का बेहतरीन इस्तेमाल किया था। आज साल 2026 में, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पास इंस्टाग्राम पर 2.2 करोड़ से अधिक की डिजिटल सेना है, जो देश की किसी भी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी (यहां तक कि भाजपा के 90 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ इंस्टाग्राम फॉलोअर्स) से कहीं अधिक है।

हालांकि राजनीतिक दल बनने का फैसला अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन CJP का उदय यह दिखाता है कि आज का युवा पारंपरिक राजनीति से ऊब चुका है। वह व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए नए और व्यंग्यात्मक तरीकों को अपना रहा है। भले ही वे आज एक राजनीतिक दल न हों, लेकिन जंतर-मंतर पर उनकी मौजूदगी यह साबित करती है कि सोशल मीडिया की भीड़ अब जमीन पर उतरकर बदलाव लाने की कमान संभाल चुकी है।"

सोनम वांगचुक, प्रकाश राज और कोंकणा सेन शर्मा जैसे दिग्गज और फिल्मी हस्तियों के समर्थन के बाद अब देखना यह होगा कि क्या आज का यह 'Gen Z छात्र आंदोलन' केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार करवा कर थमेगा, या फिर भारतीय राजनीति के इतिहास में जेएमएम, जनता पार्टी और 'आप' की तरह एक और नई राजनीतिक पार्टी का उदय होगा।

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