बाइक टैक्सी पर प्रतिबंध मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली सरकार, जानिए मामला

दिल्ली सरकार ने बाइक टैक्सी पर प्रतिबंध मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है।

Arvind Kejriwal new

दिल्ली सरकार के वकील मनीष वशिष्ठ की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका की गई। इस याचिका पर जस्टिस अनिरुद्ध बोस और राजेश बिंदल की अध्यक्षता वाली बेंच बुधवार यानी 6 जून को सुनवाई करेगी। दिल्ली में बाइक टैक्सी के संचालन पर प्रतिबंध लगाने वाले परिवहन विभाग के आदेश पर रोक लगा दी गई थी। अपनी याचिका में सरकार ने कोर्ट से जल्द से जल्द इस मामले की सुनवाई करने को कहा है।

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली मोटर वाहन एग्रीगेटर योजना, 2023 पहले ही तैयार की जा चुकी है, लेकिन इसे मजूंरी मिलना अभी बाकी है और उबर और रैपिडो जैसी कंपनियां बिना वैध परमिट के दिल्ली में अपनी सेवाएं जारी रखे हुए हैं।

याचिका में और क्या कहा गया?
सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2020 और मोटर वाहन अधिनियम के तहत दिल्ली में बिना वैध परमिट प्राप्त किए बाइक टैक्सी के संचालन की अनुमति नहीं है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में सड़क सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस सत्यापन, GPS ट्रैकर और पैनिक बटन आदि लगाने की बाध्यता जैसी शर्तों का पालन किए बिना बाइक टैक्सी चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

क्या है मामला?
फरवरी, 2023 में दिल्ली परिवहन विभाग ने शहर में बाइक टैक्सी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाते हुए एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया था। इसमें कहा गया था कि कमर्शियल उद्देश्य के लिए दोपहिया वाहन का इस्तेमाल मोटर वाहन अधिनियम, 1988 का उल्लंघन है और इस सेवा से जुड़े एग्रीगेटर्स पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने 26 मई को परिवहन विभाग के इस आदेश पर रोक लगा दी थी।

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