CM Soren ने 38 डॉक्टरों को दिया नियुक्ति पत्र, बोले- 50% भी बरतें ईमानदारी तो बदल जाएंगे राज्य के हालात
रांची। झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 38 दंत चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र सौंपा है। नामुकम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 206 आधुनिक सुविधा से लैस एंबुलेंस राज्य को सौंपेगे।
सीएम हेमंत सोरेन ने सेवा सदन के क्षेत्रीय ब्लड ट्रांफ्यूजन सेंटर का उद्घाटन किया। उन्होंने आयुष्मान भारत मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के जरिए लाभ देने के लिए एबी app लांच किया गया। इसमें उनके पैथलॉजी, दवा और जांच की रिपोर्ट मिलेगी।

इसके साथ ही हेमंत सोरन ने स्वास्थ्य ज्योति एप भी लांच किया। इसके जरिए सरकारी अस्पताल और पारा मेडिकल कर्मियों को प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
आयुष्मान योजना के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले रांची, कोडरमा जिला अस्पताल को सीएम ने सम्मान पत्र दिया। कई जिलों के सरकारी चिकित्सकों को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। कुल 48 चिकित्सकों को सम्मानित किया गया।
सीएम ने कहा एंबुलेंस का संचालन और नए ऐप के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधा को सरल बनाया जा रहा है। जन-जन तक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का नया आयाम जोड़ा जा रहा है।
38 नए दंत चिकित्सकों की नियुक्ति करना, स्वास्थ्य को लेकर सरकार लंबे समय से प्रयास कर रही है कि जन-जन तक स्वास्थ्य सेवा कैसे पहुंचे?
यह बड़े आंकड़े बताए जा सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम बहुत ही कठिन है, चुनौतियां भरी हैं। लोगों के स्वास्थ्य को लेकर दुनियाभर में चुनौती है, तो पिछड़े राज्य में इसका कितना प्रभाव होगा यह अंदाजा लगाया जा सकता है।
कोरोना काल काफी कठिन रहा। इस दौरान सरकार महामारी से निकलने का प्रयास किया। संक्रमण के लिए दवा बनती है, वर्षों लगते हैं, फिर तेजी आई और टीका लगाया गया। मुखिया होने के नाते लोगों को प्रेरित और जागरूक करने के लिए हमने भी टीका लिया है। सारे टीके लिए हैं।
मेरी सोच है कि अमीर, गरीब और हर वर्ग के लिए समान स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। इसी सोच से सरकार आगे बढ़ रही है।
सरकार सभी को एक नजर से देखती है और उसे सुविधा उपलब्ध कराती है। राज्य में चुनौती समाप्त नहीं हुई है। यह होने वाली भी नहीं है। सजगता, जागरूकता और संवेदनशीलता से हम चुनौतियों से पार पाएंगे।
एंबुलेंस बहुत पहले से चल रही हैं, कुछ सड़ भी गईं। मुझे याद है कि एम्स के बराबर का अस्पताल रिम्स बना। अपने स्वदेशी व्यवस्था को आत्मसात करते हैं। उस समय बड़े एंबुलेंस होते थे। लेकिन तकनीकि के अभाव में सभी एंबुलेंस मिट्टी में मिल गए।
एंबुलेंस के संचालन पर सरकार पैसे खर्च करेगी। चिकित्सकों को भी वेतन देगी, सरकार बहुत प्रयास कर रही है, घर-घर एंबुलेंस जाकर ग्रामीणों का इलाज करेगी।
ऐसा कई सालों से किया जा रहा है। झारखंड पिछड़ा राज्य है। अधिकतर लोग ग्रामीण, किसान, मजदूर हैं। मैंने देखा है कि जब तक एंबुलेंस गांव जाएंगा।
वह अपने खेत में या मजदूरी कर रहा है। जब तक मजदूर अपने घर जाएगा। तब तक एंबुलेंस वापस लौट कर चली आएगी। ऐसे में ग्रामीणों का क्या लाभ मिलेगा।
हमें यह तय करना होगा कि गांव के लोगों को एक तिथि निर्धारित करना होगा, ताकि तिथि पर वहां पर जाकर इलाज का लाभ उठाएं।
समय देकर एंबुलेंस गांव में ले जाने और वापस लाने से कोई फायदा नहीं होगा। संचालन करने वाली संस्था इस पर ध्यान देगी और ग्रामीणों को इसका लाभ ज्यादा से ज्यादा प्रदान करेगी। सभी गांवों में एंबुलेंस पहुंचने की एक तिथि और समय दिया जाए, ताकि लोग वहां पर उपस्थित रहें।












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